US-Israel Attack Iran: जंग के बीच ट्रंप ने दुनिया के लिए खोला तेल का बड़ा 'खजाना', 400 मिलियन बैरल ऑयल अब...
US-Israel Attack Iran: मिडिल ईस्ट युद्ध और होर्मुज स्ट्रैट बंद होने के बीच ट्रंप प्रशासन ने 30 दिन के लिए रूसी तेल खरीदने की छूट दी है. इस बीच तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सभी देशों को 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दे दी है. यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी दबाव है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं. ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. खास तौर पर Strait of Hormuz के बंद होने से स्थिति और गंभीर हो गई है. यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है और आमतौर पर दुनिया की कुल दैनिक तेल खपत का लगभग 20 से 25 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है.
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने गुरुवार (12 मार्च 2026) को बताया कि उसने एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत 12 मार्च तक जहाजों में लदा हुआ रूसी कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदे और बेचे जा सकते हैं. यह अनुमति वॉशिंगटन समय के अनुसार 11 अप्रैल की आधी रात तक लागू रहेगी. इस फैसले से दुनियाभर में लगभग 30 अलग-अलग स्थानों पर फंसे करीब 124 से 125 मिलियन बैरल रूसी तेल को बाजार तक पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है. इससे वैश्विक तेल आपूर्ति में आई अचानक कमी को कुछ हद तक कम करने की उम्मीद है. इससे पहले 5 मार्च को भी अमेरिका ने एक अलग 30 दिन की छूट जारी की थी, जिसके तहत भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल के कार्गो खरीदने की अनुमति दी गई थी. इस फैसले का मकसद संकट के दौरान तेल आयातकों को कुछ राहत देना था.
अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का बयान
अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कदम सीमित समय के लिए और बहुत खास परिस्थितियों में उठाया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि इससे रूस को बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा. इस बीच अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने यह भी घोषणा की है कि अमेरिका अपने रणनीतिक तेल भंडार से 172 मिलियन बैरल कच्चा तेल बाजार में जारी करेगा. यह कदम बढ़ती ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है. यह फैसला अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के साथ मिलकर की जा रही बड़ी योजना का हिस्सा है. इस एजेंसी के 32 सदस्य देशों ने मिलकर लगभग 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में जारी करने का वादा किया है. एजेंसी के अनुसार मौजूदा युद्ध के कारण दुनिया को इतिहास की सबसे बड़ी तेल आपूर्ति बाधा का सामना करना पड़ रहा है.
ईरान युद्ध शुरू होने से पहले तेल की कीमत
ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने से पहले 28 फरवरी से पहले कच्चे तेल की कीमत लगभग 73 से 75 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन हमला शुरू होने और खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर हमलों के बाद कीमतें तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं. युद्ध की शुरुआत के बाद से ईरान ने लगभग पूरी तरह से Strait of Hormuz को बंद कर दिया है. यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है. रिपोर्ट के अनुसार अब तक इस मार्ग में कम से कम 16 जहाजों पर हमले हो चुके हैं और ईरान ने आगे भी हमले जारी रखने की चेतावनी दी है. इस बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने पद संभालने के बाद अपने पहले बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखना जरूरी है. उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि निकट भविष्य में इस मार्ग के दोबारा खुलने की संभावना कम है.
Source: IOCL


























