Naval Mines: समंदर में कैसे बिछाई जाती हैं बारूदी सुरंगें, इन्हें हटाना क्यों है मुश्किल काम?
Naval Mines: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के दौरान बारूदी सुरंगें एक बार फिर से चर्चा में आ चुकी हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि यह कितनी खतरनाक होती हैं और इन्हें हटाना मुश्किल क्यों होता है.

- ईरानी नौकाओं को होर्मुज स्ट्रेट में नष्ट करने का निर्देश दिया गया।
- बारूदी सुरंगें शिपिंग मार्गों को बाधित करने के लिए बिछाई जाती हैं।
- विभिन्न प्रकार की सुरंगें होती हैं, जिन्हें ढूंढना बेहद कठिन है।
- आधुनिक सुरंगें सेंसर से लैस होती हैं, जो उन्हें और खतरनाक बनाती हैं।
Naval Mines: युद्ध काल में समुद्र में बिछाए जाने वाली बारूदी सुरंगें एक बार फिर से चर्चा का विषय बन चुकी हैं. हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिए हैं कि होर्मुज स्ट्रेट में अगर कोई भी ईरानी नौका बारूदी सुरंगें बिछाते हुए पकड़ी जाती है तो उसे नष्ट कर दें. इससे एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इन बारूदी सुरंगों को कैसे तैनात किया जाता है और इन्हें हटाना खतरनाक काम क्यों है? आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब.
समुद्र में बारूदी सुरंगें कैसे बिछाई जाती हैं?
बारूदी सुरंगें बिछाना सिर्फ विस्फोटक गिराने जितना आसान नहीं होता. यह एक सैन्य अभियान है जिसे शिपिंग रूट और नौसैनिक गतिविधि को बाधित करने के लिए डिजाइन किया गया है. सुरंगें अक्सर अलग-अलग प्लेटफार्म के मिश्रण का इस्तेमाल करके बिछाई जाती हैं. युद्धपोत और खतरनाक आक्रमण नौकाएं जरूरी मार्गों पर इन्हें तेजी से बिछा सकती हैं. कभी-कभी संदेह से बचने के लिए नागरिक दिखने वाले जहाजों का भी इस्तेमाल किया जाता है. पनडुब्बियां भी इसमें एक बड़ी भूमिका निभाती हैं.
कितनी तरह की होती हैं बारूदी सुरंगें?
बारूदी सुरंगों को उनके उद्देश्य और स्थान के आधार पर अलग-अलग तरीकों से डिजाइन किया जाता है. बंधी हुई सुरंगें समुद्र तल से जुड़ी हुई होती हैं लेकिन एक निश्चित गहराई पर तैरती रहती हैं. तल में बिछाई गई सुरंगें सीधे समुद्र तल पर होती हैं, छिपी रहती हैं और इनका पता लगाना काफी मुश्किल होता है. दूसरी तरफ बहती हुई सुरंगें तैरती रहती हैं और धाराओं के साथ चलती हैं.
इन सुरंगों का पता लगाना मुश्किल क्यों है?
बारूदी सुरंगों को हटाने में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है उन्हें ढूंढना. ये उपकरण अक्सर पानी के नीचे गहराई में छुपे होते हैं या फिर गाद और मलबे की परतों के नीचे दबे होते हैं. मानक सोनार प्रणालियां इनका पता लगाने में विफल हो सकती हैं. खासकर जब इन्हें समुद्र तल में घुलमिल जाने या फिर स्थिर रहने के लिए डिजाइन किया गया हो.
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आधुनिक सुरंगें और भी खतरनाक
संपर्क में आते ही विस्फोट करने वाली पुरानी सुरंग के उलट आधुनिक बारूदी सुरंग एडवांस्ड सेंसर का इस्तेमाल करती हैं. ये जहाज के चुंबकीय क्षेत्र, इंजन के शोर या फिर पानी में दबाव परिवर्तन का पता लगा सकती हैं. इसका मतलब है कि विस्फोट के लिए जहाज को सुरंगों को छूने की भी जरूरत नहीं होती.
कुछ सुरंगें तो इस तरह से बनाई जाती हैं कि वे सुरंग निकासी अभियान को धोखा दे सकें. वे एक तय संख्या में जहाजों के गुजरने के बाद ही सक्रिय होती हैं. इससे सुरक्षा का झूठा एहसास होता है.
इतना ही नहीं बल्कि समय के साथ समुद्री धाराएं सुरंगों की जगह बदल सकती हैं. यानी कि अब वे उस जगह पर नहीं हो सकती जहां उन्हें असल में रखा गया था. इससे उन्हें ढूंढने और हटाने का काम और भी मुश्किल हो जाता है.
काफी महंगी प्रकिया
इन बारूदी माइन को साफ करने की प्रक्रिया को माइनवीपिंग कहा जाता है. यह काफी महंगी प्रक्रिया होती है. इसके लिए खास तरह के जहाज, पानी के अंदर चलने वाले ड्रोन और काफी ज्यादा प्रशिक्षित लोगों की जरूरत होती है. एक बारूदी सुरंग को निष्क्रिय करने में कई घंटे लग सकते हैं.
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