India Oil: मिडिल ईस्ट का तेल बिकना बंद हुआ तो भारत के लिए क्या-क्या होंगे ऑप्शंस? देखें पूरी लिस्ट
India Oil: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर ईंधन आपूर्ति पर पड़ रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अगर होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से बंद हो जाए तो भारत इस परेशानी से कैसे निपटेगा.

- वैकल्पिक समुद्री मार्गों और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की योजनाएं तैयार।
India Oil: मिडिल ईस्ट में तनाव अभी भी जारी है. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर टैक्स लगाना शुरू कर दिया है और अमेरिका ने नाकाबंदी. अगर मिडल ईस्ट से तेल की सप्लाई पूरी तरह से रुक जाए तो भारत को एक गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है. भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 80% से 88% हिस्सा इंपोर्ट करता है. हालांकि भारत ने ऐसे संकट से निपटने के लिए पहले ही कई बैकअप रणनीतियां बनाई हुई हैं. आइए जानते हैं कि अगर यह रास्ते बंद हो जाते हैं तो भारत इस स्थिति को कैसे संभाल सकता है.
भारत की सुरक्षा की पहली पंक्ति
भारत की सबसे मजबूत रणनीतियों में से एक है विविधीकरण. देश ने कई देशों से तेल लेकर एक ही क्षेत्र पर अपनी निर्भरता पहले ही काफी कम कर ली है. रूस एक प्रमुख सप्लायर के रूप में उभरा है. यहां बड़ी मात्रा में तेल आसानी से उपलब्ध है. इसी के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका से इंपोर्ट और कनाडा से संभावित सप्लाई भी बढ़ रही है.
इसके अलावा पश्चिम अफ्रीका के देश जैसे नाइजीरिया और अंगोला भरोसेमंद बैकअप विकल्पों के रूप में काम करते हैं. लैटिन अमेरिकी देश जैसे ब्राजील, मेक्सिको, कोलंबिया और वेनेजुएला भी जरूरत पड़ने पर सप्लाई में काफी बढ़ोतरी कर सकते हैं.
आपातकालीन सुरक्षा कवच
भारत ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के रूप में एक सुरक्षा बफर बनाया है. ये भंडार प्रमुख स्थानों पर जमीन के नीचे बनी सुविधाओं में रखे जाते हैं. साथ ही इनका इस्तेमाल आपातकालीन स्थितियों में किया जाता है. फिलहाल विशाखापट्टनम, मैंगलौर और पादुर जैसे शहरों में मौजूद भंडार लगभग 9.5 दिनों की मांग को पूरी कर सकते हैं. तेल कंपनियों के पास मौजूद स्टॉक को मिलकर भारत के पास कुल मिलाकर लगभग 74 दिनों का बैकअप है.
वैकल्पिक समुद्री मार्ग
अगर होर्मुज स्ट्रेट तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है तो भारत वैकल्पिक शिपिंग रास्तों का इस्तेमाल कर सकता है. एक प्रमुख विकल्प अफ्रीका के चारों ओर से जाने वाला केप ऑफ गुड होप मार्ग है. हालांकि इस रास्ते से यात्रा का समय और लागत बढ़ जाती है.
घरेलू उत्पादन को बढ़ावा
संकट के समय भारत अपने देश में ही तेल रिफायनिंग और ईंधन का उत्पादन बढ़ा सकता है. रिफाइनरियों को यह निर्देश दिया जा सकता है कि वे देश की अंदरूनी मांग को पूरा करने के लिए पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का उत्पादन ज्यादा से ज्यादा करें.
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