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समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल को शार्क और व्हेल से कैसे रखा जाता है सुरक्षित, कौन है इसका जिम्मेदार

दुनिया का पूरा इंटरनेट डेटा समंदर के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए ट्रांसफर किया जाता है. चलिए जानें कि समंदर में जो केबल्स बिछाए जाते हैं उनको शार्क से कैसे सुरक्षित रखते हैं.

इंटरनेट की आधुनिक दुनिया पूरी तरह से समंदर की गहराइयों में छिपे एक बेहद जटिल नेटवर्क पर टिकी हुई है. जब भी हम कोई ऑनलाइन काम करते हैं, तो हमारा डेटा आसमान से नहीं, बल्कि महासागरों के तल पर फैले लाखों किलोमीटर लंबे फाइबर ऑप्टिक तारों से होकर गुजरता है. इन तारों को समंदर के खूंखार जीवों और पानी के भारी दबाव से बचाना एक बेहद चुनौतीपूर्ण काम है. इंसानों की बनाई यह तकनीक शार्क के दांतों और व्हेल की भारी हलचल को नाकाम करते हुए दुनिया को आपस में जोड़े रखती है. चलिए जानें कि इनको शार्क के नुकीले दातों से कैसे बचाया जाता है.

कैसे होते हैं सबमरीन केबल्स?

समुद्र के नीचे बिछी इन खास तारों को सबमरीन केबल्स कहा जाता है. दिखने में यह केबल किसी मोटे पाइप जैसे भारी-भरकम होती हैं, लेकिन इनके बिल्कुल केंद्र में इंसानी बाल जितने महीन कांच के रेशे यानी फाइबर ऑप्टिक्स होते हैं. इन्हीं बारीक रेशों के भीतर से हमारा पूरा इंटरनेट डेटा प्रकाश की रफ्तार से एक देश से दूसरे देश की तरफ दौड़ता है. महासागरों के खाने पानी, भयानक दबाव और नमकीन पर्यावरण के बीच भी यह नाजुक फाइबर पूरी तरह से सुरक्षित रहकर सालों-साल बिना थके लगातार काम करते रहते हैं.

शार्क से कैसे होती है केबल की सुरक्षा?

इन केबल्स को शार्क जैसे जीवों के हमलों से बचाने के लिए उन पर कई परतों वाला मजबूत रक्षा कवच चढ़ाया जाता है. केबल के सबसे बाहरी हिस्से पर स्टील के मजबूत तारों का एक अभेद्य जाल बुना जाता है, जिसके ऊपर वॉटरप्रूफ पॉलीथीन की खास जेली की कोटिंग की जाती है. शार्क को अक्सर केबल्स ते आसपास पैदा होने वाले बेहद हल्के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड से खिंचाव महसूस होता है, जिससे वे इसे काटने की कोशिश करती हैं. मगर केबल की यह फैलादी परत शार्क के नुकीले दांतों को भीतर के मुख्य तारों तक पहुंचने ही नहीं देती है.

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जहाजों के लंगर और मछली के जालों से कैसे रखते हैं सुरक्षित?

उथले पानी या तटीय इलाकों में समुद्री जीवों के अलावा इंसानी गतिविधियों जैसे जहाजों के भारी लंगर और मछली पकड़ने वाले जालों का सबसे बड़ा खतरा होता है. इस जोखिम से निपटने के लिए केबल्स को समुद्र की खुली सतह पर छोड़ने के बजाय रोबोटिक हलों की मदद से समंदर के तल के अंदर करीब एक से तीनमीटर तक गहराई में दफना दिया जाता है. गहरे समुद्र में, जहां पानी कई हजार मीटर गहरा होता है और इंसानी दखल या जीवों का खतरा न के बराबर होता है, वहां केबल्स को सीधे बिछा दिया जाता है.

कैसे होता है समुद्री केबल बिछाने का काम?

किसी भी समुद्री रास्ते पर केबल बिछाने का काम बेहद सूझबूझ और सटीक योजना के साथ किया जाता है. केबल डालने से पहले आधुनिक सोनार तकनीकों और पानी के अंदर चलने वाले रिमोट कंट्रोल वाहनों की मदद से पूरे समुद्री रास्ते का एक-एक इंच का नक्शा तैयार किया जाता है. इस प्रक्रिया में इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता है कि केबल का रास्ता किसी नुकीली चट्टान, सक्रिय ज्वालामुखी या बेहद संवेदनशील समुद्री जीवों के प्राकृतिक आवास के बीच से होकर न गुजरे, जिससे केबल हमेशा के लिए सुरक्षित रहे.

कौन से इसे सुरक्षित रखने का जिम्मेदार?

इन केबल्स को सुरक्षित रखने और पूरे इंटरनेट सिस्टम को चालू रखने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी दुनिया की बड़ी टेलीकॉम और टेक कंपनियों जैसे गूगल, मेटा और टाटा कम्युनिकेशंस के वैश्विक संगठनों की होती है. इसके अलावा इंटरनेशनल केबल प्रोटेक्शन कमेटी इस पर पूरी निगरानी रखती है. अगर कभी किसी प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना की वजह से केबल को नुकसान पहुंचता भी है, तो तुरंत अत्याधुनिक केबल रिपेयर शिप्स को समंदर में रवाना किया जाता है, जो पानी के नीचे से खराब हिस्से को निकालकर उसे कुछ ही देर में ठीक कर देते हैं.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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