Top Fish Eating Countries: ये हैं मछली खाने वाले टॉप-5 देश, इसमें नंबर-1 पर क्यों है भारत?
Top Fish Eating Countries: कुल मछली खपत के मामले में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल हुआ भारत, जानिए देश में क्यों तेजी से बढ़ रही है मछली की मांग और क्या हैं इसके पीछे के मुख्य कारण

Top Fish Eating Countries: वैश्विक स्तर पर खान-पान की आदतों में समुद्री भोजन और मछली की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. मछली को प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड और जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों का एक बेहतरीन स्त्रोत माना जाता है, जिसके कारण दुनियाभर में इसकी मांग काफी ज्यादा है. जब कुल टन भार के आधार पर दुनिया में सबसे ज्यादा मछली खाने वाले टॉप-5 देशों की बात आती है, तो वैश्विक आंकड़ों के अनुसार चीन इस सूची में पहले स्थान पर आता है. वहीं, भारत भी इस मामले में पीछे नहीं है और विशाल जनसंख्या के कारण कुल खपत के मामले में दुनिया के शीर्ष 5 देशों में मजबूती से शामिल है.
मछली की कुल खपत में चीन है नंबर-1 पर
दुनिया भर के खाद्य और कृषि संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, सालाना कुल मछली खपत के मामले में चीन वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान पर काबिज है. चीन में हर साल लगभग 6 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक मछली की खपत होती है, जो पूरी दुनिया की कुल खपत का एक बड़ा हिस्सा है. वहां का विशाल एक्वाकल्चर उद्योग और तटीय क्षेत्रों में रहने वाली बड़ी आबादी इस उच्च खपत का मुख्य कारण है. चीन के बाद कुल खपत के मामले में भारत, इंडोनेशिया, म्यांमार और वियतनाम जैसे देश शीर्ष 5 की सूची में आते हैं, जहां पारंपरिक रूप से भोजन में मछली को मुख्य आहार माना जाता है.
वैश्विक रैंकिंग में कहां खड़ा है भारत
कुल खपत के परिप्रेक्ष्य में भले ही भारत दुनिया के टॉप-5 देशों का हिस्सा है, लेकिन प्रति व्यक्ति सालाना खपत के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है. प्रति व्यक्ति उपभोग के लिहाज से मालदीव और आइसलैंड जैसे छोटे तटीय देश दुनिया में सबसे आगे हैं, जहां एक व्यक्ति सालभर में 80 किलोग्राम से ज्यादा मछली खा जाता है. इसकी तुलना में भारत प्रति व्यक्ति मछली आपूर्ति के मामले में वैश्विक सूची में 132वें स्थान के आसपास आता है. इसका मुख्य कारण भारत की एक बड़ी आबादी का शाकाहारी होना और देश के आंतरिक व मैदानी राज्यों में मछली की सीमित उपलब्धता है.
भारत में तेजी से बदल रहा है खान-पान का पैटर्न
भले ही प्रति व्यक्ति रैंकिंग कम हो, लेकिन पिछले 15 वर्षों में भारतीयों के खान-पान में एक बड़ा बदलाव देखा गया है. अध्ययनों से पता चलता है कि भारत में प्रति व्यक्ति मछली की खपत में 80 प्रतिशत से अधिक की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो पहले 4.9 किलोग्राम से बढ़कर अब लगभग 8.89 किलोग्राम प्रति वर्ष तक पहुंच चुकी है. देश में बढ़ते मध्यम वर्ग, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और पौष्टिक भोजन की मांग के कारण मछली खाने वाले लोगों की संख्या में सालाना 4 फीसदी से ज्यादा की दर से इजाफा हो रहा है.
यह भी पढ़ें: मिडटर्म हारकर भी राष्ट्रपति कैसे बने रहेंगे ट्रंप? जानें अमेरिका का कानून
उत्पादन के मामले में दूसरे स्थान पर है भारत
खपत के साथ-साथ भारत मछली उत्पादन के मामले में भी दुनिया का एक बड़ा पावरहाउस बन चुका है. भारत वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है, जो वैश्विक उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत का योगदान देता है. केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही नीली क्रांति और 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' जैसी बड़ी पहलों के कारण अंतर्देशीय मछली पालन में 142 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल आया है. यही वजह है कि देश में उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ अब घरेलू बाजारों में भी मछली की आपूर्ति और खपत दोनों में रिकॉर्ड तेजी देखी जा रही है.
यह भी पढ़ें: इजरायल के पीएम को कितनी सैलरी मिलती है, प्रधानमंत्री मोदी से ज्यादा या कम?






















