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India Poverty Reduction: भारत में कम हुई गरीबी, दुनिया में अब किस नंबर पर हम?

India Poverty Reduction: भारत ने गरीबी के मामले में अपनी स्थिति काफी ज्यादा सुधारी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारत ने गरीब स्तर में कैसे यह सुधार किया. जानें इस बारे में पूरी जानकारी.

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  • भारत ने पिछले 12 सालों में सबसे तेज़ी से गरीबी घटाई है।
  • 2011-23 के बीच लगभग 49.6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए।
  • अत्यधिक गरीबी 2.6% और बहुआयामी गरीबी 16% तक कम हुई।
  • खपत वृद्धि, रोज़गार, सरकारी योजनाओं ने गरीबी घटाने में मदद की।

India Poverty Reduction: अक्टूबर 2026 में प्रकाशित विश्व बैंक की गरीबी और समानता संक्षिप्त रिपोर्ट के मुताबिक भारत में गरीबी में कमी आई है. 2011 से 2023 के बीच लगभग 496 मिलियन लोग गरीबी से बाहर निकले हैं. रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 12 सालों में भारत ने दुनिया में सबसे तेजी से गरीबी कम करने वाले देशों में अपनी जगह बनाई है. यह आंकड़े अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली आबादी के अनुपात में एक बड़ा बदलाव दर्शाते हैं. इसी के साथ घरेलू उपभोग, रोजगार और कल्याणकारी सहायता में सुधार की तरफ इशारा करते हैं. 

यह रिपोर्ट आर्थिक और गैर-आर्थिक दोनों तरह के पैमाने पर हुई प्रगति को दिखाती है. इसमें ऐसे पांच राज्यों की पहचान का भी जिक्र है जहां काफी ज्यादा गरीबी में आई कल कमी का लगभग दो तिहाई हिस्सा दर्ज किया गया है. 

अत्यधिक गरीबी घटकर 2.6% हुई 

रिपोर्ट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के अनुपात में भारी गिरावट देखने को मिली है. यह आंकड़ा 27.1% से घटकर 2.6% पर आ गया है. 2011 से 2023 के बीच भारत में लगभग 496 मिलियन लोग गरीबी से बाहर निकले हैं. 

रिपोर्ट में निम्न मध्यम आय वाली गरीबी रेखा के स्तर पर भी बड़ी कमी दर्ज की गई है. इस दायरे में आने वाली आबादी का अनुपात 57.7% से घटकर 16.1% रह गया है. इन आंकड़ों से पता चलता है कि गरीबी में आई यह कमी सिर्फ सबसे निचले स्तर तक ही सीमित नहीं रही. इसी के साथ उच्च स्तर से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में भी काफी कमी आई है. 


India Poverty Reduction: भारत में कम हुई गरीबी, दुनिया में अब किस नंबर पर हम?

बहुआयामी गरीबी में सुधार

विश्व बैंक की यह रिपोर्ट इनकम आधारित पैमानों से हटकर भी प्रगति को दर्शाती है. बहुआयामी गरीबी के गैर मौद्रिक संकेतकों में स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बहुआयामी गरीबी दर 2005-06 के 53.8% घटकर आज लगभग 15.5% से 16.4% के दायरे में आ गई है.

यह संकेतक सिर्फ इनकम के आंकड़ों की तुलना में लोगों के जीवन स्तर की एक बड़ी तस्वीर पेश करते हैं. इनमें आई कमी उन क्षेत्रों में सुधार का संकेत देती है जो लोगों के अवसरों और उनके कल्याण को तय करते हैं. इस वजह से यह रिपोर्ट मौद्रिक गरीबी की सीमाओं और जीवन के जरूरी पहलुओं तक पहुंच को मापने वाले पैमानों के जरिए हुई प्रगति को बताती है.


India Poverty Reduction: भारत में कम हुई गरीबी, दुनिया में अब किस नंबर पर हम?

गरीबी के स्तर में कमी कैसे आई?

रिपोर्ट में गरीबी कम होने की एक वजह परिवारों द्वारा काफी ज्यादा खपत को बताया गया है. बेहतर खपत और खरीदने की क्षमता इस बात को दर्शाती है कि परिवार अब चीजों और सेवाओं पर ज्यादा खर्च करने में सक्षम हैं. 

रोजगार ने भी इसमें एक बड़ा योगदान दिया है. परिवारों में कमाने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ी है, जिसमें महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी में भी बढ़ोतरी हुई है. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में. काम करने वाले परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ने से इनकम और खरीदने की क्षमता मजबूत हो सकती है. 

सरकारी कल्याणकारी कार्यक्रम भी इसमें एक बड़ा हिस्सा हैं. सामाजिक सुरक्षा उपायों ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है. इसमें मुफ्त राशन योजनाओं के जरिए से मिलने वाली खाद्य सब्सिडी और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए दी जाने वाली नकद सहायता शामिल है. 

पांच राज्यों का योगदान लगभग 65% 

रिपोर्ट में पांच राज्यों पर खास ध्यान दिया गया है. इसमें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश शामिल हैं. भारत में अत्यधिक गरीबी में आई कुल कमी का लगभग दो तिहाई हिस्सा यानी करीब 65 प्रतिशत इन्हीं राज्यों से आया है. 

इन राज्यों का संयुक्त योगदान इन्हें रिपोर्ट में बताए गए राष्ट्रीय बदलाव का मुख्य केंद्र बनाता है. आंकड़ों से यह पता चलता है कि गरीबी में आई कुल कमी का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं पांच राज्यों से निकला है. 

भारत कौन से नंबर पर आता है? 

विश्व बैंक के मुताबिक पिछले 12 सालों में भारत में गरीबी में आई कमी दुनिया में सबसे तेज रही है. 496 मिलियन लोगों का गरीबी से बाहर आना 3.00 और 4.20 की गरीबी रेखाओं में गिरावट और बहुआयामी गरीबी में सुधार इस बदलाव के बड़े पैमाने को दर्शाते हैं. अगर पूरी दुनिया की बात करें तो गरीबी के मामले में भारत 190 से ज्यादा देशों की लिस्ट में 154वें नंबर पर आता है.

यह भी पढ़ें: राज्यसभा के पूर्व सांसद आरके सिन्हा को कितनी मिलती थी पेंशन, अब कौन हकदार?

स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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