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Tokyo Fire Safety: दुनिया के किस शहर में है आग से निपटने की सबसे अच्छी व्यवस्था, भारत को सीखने की है जरूरत

टोक्यो ने 1923 के ग्रेट कांटो भूकंप और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हुई बमबारी में भारी तबाही देखी थी. उस समय इस शहर में बड़ी संख्या में लकड़ी के मकान थी, जिसके कारण आग तेजी से फैलती थी.

Tokyo Fire Safety: हाल ही में लखनऊ के अलीगंज जिले में हुए भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर फायर सेफ्टी और आपदा प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए. इस भीषण हादसे में कई लोगों की जान चली गई, जिसके बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी और कोचिंग सेंटर समेत कई व्यवसायिक इमारत की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जा रही है. इससे पहले भी दिल्ली में एक होटल में आग से 22 लोगों की मौत हो गई थी. आए दिन होने वाली इन आग की घटनाओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. इन घटनाओं के बाद यह भी सवाल उठने लगा है कि दुनिया में कौन सा शहर आग लगने की घटनाओं से निपटने के मामले में सबसे आगे माना जाता है और वहां ऐसा क्या है जो उसे बाकी शहरों से अलग बनाता है. 

टोक्यो माना जाता है आग से निपटने में सबसे अलग 

फायर सेफ्टी के मामले में जापान की राजधानी टोक्यो को दुनिया के सबसे सुरक्षित शहरों में गिना जाता है. यह पहचान उसे एक दिन में नहीं मिली, बल्कि विशाल विनाशकारी भूकंपों, बड़े पैमाने पर लगी आग और युद्धकालीन तबाही से सबक लेकर शहर ने अपनी पूरी शहरी योजना और आपदा प्रबंधन प्रणाली को नई सिरे से तैयार किया है. आज टोक्यो को इस बात के लिए जाना जाता है कि वहां आग की घटनाएं बड़ी आपदा बनने से पहले ही कंट्रोल कर ली जाती है. 

टोक्यो ने तबाही से सीखे सबक 

टोक्यो ने 1923 के ग्रेट कांटो भूकंप और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हुई बमबारी में भारी तबाही देखी थी. उस समय इस शहर में बड़ी संख्या में लकड़ी के मकान थे, जिसके कारण आग तेजी से फैलती थी. इन घटनाओं ने प्रशासन को यह समझा दिया कि केवल आग बुझाने की व्यवस्था ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शहर को इस तरह विकसित करना होगा कि आग फैलने की संभावना कम हो. इस सोच के साथ टोक्यो ने शहरी विकास में फायर सेफ्टी को प्रमुख स्थान दिया. धीरे-धीरे भवन निर्माण नियमों को सख्त किया गया, अग्नि रोधी संरचनाएं विकसित की गई और आधुनिक अग्निशमन नेटवर्क तैयार किया गया. 

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दुनिया का सबसे बड़ा फायर डिपार्टमेंट टोक्यो में

टोक्यो फायर डिपार्टमेंट को दुनिया का सबसे बड़े अग्निशमन संगठनों में शामिल किया गया है. इसके पास लगभग 18 हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं, जो महानगर के अलग-अलग हिस्सों में तैनात रहते हैं. पूरे शहर में दर्जनों फायर स्टेशन बनाए गए हैं, जिससे किसी भी घटना स्थल तक कम समय में पहुंचा जा सके. इस डिपार्टमेंट के पास बड़ी संख्या में फायर इंजन, सीढ़ी वाहन, एंबुलेंस, रेस्क्यू वाहन, पानी और विमान मौजूद है. यही वजह है कि यह आग, भूकंप, दुर्घटना या किसी दूसरी आपदा की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सकती है. 

शहर की बनावट भी आग रोकने में मददगार 

टोक्यो की सफलता का एक बड़ा कारण है, उसका इंफ्रास्ट्रक्चर भी है. शहर में कई ऐसी बड़ी इमारतों का निर्माण किया गया है, जो आग के फैलाव को रोकने के लिए प्राकृतिक अवरोध का काम करते हैं. पुराने लकड़ी वाले इलाकों को धीरे-धीरे कम किया गया और उनकी जगह अग्निरोधी निर्माण को बढ़ावा दिया गया. कई स्थान पर चौड़ी सड़के और खुले क्षेत्र बनाए गए ताकि आग लगने की स्थिति में एक इलाके से दूसरे इलाके तक तेजी से आग न फैल सके.

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कविता एबीपी नेटवर्क नोएडा के साथ बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही है. वर्तमान में कविता का मुख्य फोकस शिक्षा, करियर और नौकरी से जुड़ी खबरों पर रहता है.

करीब 3.5 साल से पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी कव‍िता एबीपी नेटवर्क से पहले राजस्थान पत्रिका में काम कर चुकी है. यहां  उन्होंने नेशनल एडिशन और अलग-अलग सप्लीमेंट्स के लिए काम किया. राजस्थान पत्रिका में करियर की उड़ान और सी न्यूज जैसे कॉलम वह कवर करती थी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो के साथ काम करने का अवसर मिला, जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन की बारीकियों को समझने का अनुभव दिया. वहीं पत्रकारिता के अलावा कविता की खास रुचि खेल, विशेष रूप से क्रिकेट में है. राजस्थान पत्रिका में रहते हुए कविता ने मदर्स डे स्पेशल स्पोर्ट्स एडिशन में भी काम किया है.

पढ़ाई की बात करें तो कविता ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की.

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