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इस देश का नहीं है कोई भी अपना संविधान, जानें कौन तय करता है नियम कानून?

Unwritten Constitution: दुनिया में कुछ ऐसे देश भी हैं जिनका अपना कोई लिखित संविधान नहीं है. आइए जानते हैं वहां कानून कैसे काम करता है.

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  • कुछ देश एक लिखित संविधान के बिना संचालित होते हैं।
  • यूनाइटेड किंगडम, इजरायल में अलिखित संवैधानिक व्यवस्था है।
  • कानून, परंपराएं, न्यायिक निर्णय इनके संविधान का आधार हैं।
  • सऊदी अरब का ढाँचा शरिया और शाही फरमानों पर टिका है।

Unwritten Constitution: जब भी हम किसी देश के संविधान के बारे में सोचते हैं तो आमतौर पर हमारे मन में एक दस्तावेज की तस्वीर उभरती है. यह बहुत दस्तावेज होता है जिसमें सरकार के बुनियादी नियम, नागरिकों के अधिकार और अलग-अलग संस्थाओं की शक्तियां लिखी होती हैं. उदाहरण के लिए भारत और अमेरिका में लिखित संविधान हैं जो साफ तौर पर बताते हैं कि उनकी राजनीतिक व्यवस्थाएं किस तरह से काम करती हैं. लेकिन हैरानी की बात है कि कुछ देश बिना किसी एक लिखित संवैधानिक दस्तावेज के ही चलते हैं. आइए जानते हैं उन सभी देशों के बारे में.

यूनाइटेड किंगडम 

यूनाइटेड किंगडम बिना किसी एक लिखित संविधान वाले देश का सबसे बड़ा उदाहरण है. इसकी राजनीतिक व्यवस्था सदियों में धीरे-धीरे विकसित हुई है, ना कि किसी एक संवैधानिक दस्तावेज के जरिए स्थापित की गई. कानून बनाने और बदलने में ब्रिटिश संसद बड़ी भूमिका निभाती है. संसद द्वारा पारित कानून देश के संवैधानिक ढांचे का एक बड़ा हिस्सा है. 1215 का मैग्ना कोर्टा और 1689 का बिल ऑफ राइट्स जैसे ऐतिहासिक दस्तावेजों ने भी ब्रिटेन के संवैधानिक विकास को प्रभावित किया है. इन कानून के साथ-साथ अदालती फैसला और लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक परंपरा यह तय करने में मदद करती हैं कि सरकार और दूसरी संस्थाएं किस तरह से काम करती हैं.


इस देश का नहीं है कोई भी अपना संविधान, जानें कौन तय करता है नियम कानून?

इजरायल 

इजरायल में कोई एक व्यापक लिखित संविधान नहीं है. इसके बजाय इसका संविधानिक ढांचा देश की संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है द्वारा बनाए गए कई बुनियादी कानून पर आधारित है. यह कानून सरकार, संस्था और व्यक्तिगत अधिकार के बुनियादी पहलुओं से जुड़े हैं. इस वजह से इजरायल की संवैधानिक व्यवस्था किसी एक एकीकृत दस्तावेज के बजाय कई जरूरी कानूनी दस्तावेज के जरिए काम करती है. 

सऊदी अरब 

सऊदी अरब की व्यवस्था ब्रिटेन या फिर न्यूजीलैंड में पाए जाने वाले संसदीय मॉडल से बिल्कुल अलग है. राजशाही होने के नाते इसका कानूनी और राजनीतिक ढांचा इस्लामी शरिया से काफी ज्यादा प्रभावित है. इसमें कुरान और सुन्नत से लिए गए सिद्धांत शामिल हैं. देश के शासन में शाही फरमान भी बड़ी भूमिका निभाते हैं. राजा के पास राज्य के कामकाज को चलाने के लिए नियम और फरमान जारी करने का व्यापक का अधिकार होता है. 


इस देश का नहीं है कोई भी अपना संविधान, जानें कौन तय करता है नियम कानून?

न्यूजीलैंड 

न्यूजीलैंड में भी कोई एक संवैधानिक दस्तावेज नहीं है. इसके बजाय इसकी संवैधानिक व्यवस्था कानून, अदालती फैसले, राजनीतिक परंपरा और ऐतिहासिक समझौते में फैली हुई है. संवैधानिक अधिनियम 1986 इस ढांचे का एक बड़ा हिस्सा है. 1840 में माओरी प्रतिनिधियों और ब्रिटिश क्राउन के बीच हुई वेटंगी की संधि भी न्यूजीलैंड के संवैधानिक इतिहास में बड़ी जरूरी है.

लिखित बनाम अलिखित संवैधानिक व्यवस्था 

जब इन व्यवस्थाओं की तुलना भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों से की जाती है तो इनके बीच का अंतर और भी साफ हो जाता है. लिखित संवैधानिक व्यवस्था में बुनियादी नियम एक औपचारिक दस्तावेज में इकट्ठा किए जाते हैं. अलिखित व्यवस्था में संवैधानिक नियम कानून, अदालती फैसलों, परंपरा और ऐतिहासिक दस्तावेजों में बिखरे होते हैं.

जिन देशों में संविधान कानूनी रूप से सर्वोच्च होता है वहां सामान्य कानूनों को चुनौती दी जा सकती है अगर वे संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं. ब्रिटेन जैसी व्यवस्था में संसदीय कानून को पारंपरिक रूप से कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति प्राप्त रही है. 

लिखित संविधान में अक्सर संशोधन के लिए खास प्रक्रिया या फिर बहुमत की जरूरत होती है. अलिखित संवैधानिक व्यवस्था आमतौर पर नए कानून, न्यायिक फैसले और स्थापित राजनीतिक प्रथाओं के जरिए से धीरे-धीरे विकसित हो सकती है.

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असल में नियम कौन बनाता है?

एक ही संविधान न होने का मतलब यह नहीं है कि संवैधानिक नियम नहीं हैं. इसका सीधा सा मतलब है कि वे नियम अलग-अलग स्रोतों से आते हैं. ब्रिटेन में संसद कानून का मुख्य स्रोत है. इजरायल में नेसेट के बुनियादी कानून मुख्य संवैधानिक ढांचा बनाते हैं. न्यूजीलैंड में संसद, कानून, अदालत और संवैधानिक परंपरा मिलकर व्यवस्था को आकार देती है.  सऊदी अरब में शरिया के सिद्धांत और शाही अधिकार मुख्य भूमिका निभाते हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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