किन किन देशों में बैन है स्टारलिंक? भारत में आया तो कितना तेज होगा इंटरनेट
एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक दुनिया के कई देशों में प्रतिबंधित है; आइए जानते हैं कि किन देशों में यह बैन है और भारत आने पर इसकी स्पीड कितनी होने वाली है

दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क और उनकी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी Starlink भारत में अपनी एंट्री को लेकर एक बेहद गंभीर विवाद के केंट्र में आ गए हैं. हाल ही में मस्क ने भारत में लाइसेंस मिलने में हो रही देरी पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए सीधे रिलायंस इंडस्ट्रिज के चेयरमैन मुकेश अंबानी पर निशाना साधा है. मस्क ने सोशल मीडिया पर अंबानी को प्रधानमंत्री अंबानी और भारत का असली बॉस कहकर संबोधित किया.
मस्क का आरोप है कि कुछ ताकतवर उधोगपति अपने एकाधिकार को बनाए रखने के लिए भारत के आम नागरिकों तक Starlink की तकनीक को पहुंचने से रोक रहे हैं. इस बड़े विवाद में देश के विपक्षी राजनीति भी कूद पड़ी, जिसने इस मुद्दे को सरकार और कॉरपोरेट सांठगांठ से जोड़ दिया है. इन तमाम ताजा विवादों के बीच भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर सस्पेंस बना हुआ है, जबकि दुनिया के कई बड़े देश सुरक्षा कारणों से इस हाई-टेक इंटरनेट सर्विस को अपने यहां पहले ही पूरी तरह प्रतिबंधित कर चुके हैं.
किन-किन देशों में पूरी तरह बैन है स्टारलिंक?
ग्लोबल डेटा के अनुसार, दुनिया के कई देशों ने अपने आंतरिक कानूनों और सुरक्षा कारणों से Starlink के इस्तेमाल पर ताला रखा है. इस लिस्ट में सबसे बड़ा नाम चीन और रूस का है. चीन ने अपनी बेहद सख्त सुरक्षा नीतियों और इंटरनेट नियंत्रण के कारण Starlink को देश में काम करने की अनुमति नहीं दी है.
वहीं रूस में भी इस पर कड़ा प्रतिबंध है और इसका अनधिकॉत इस्तेमाल पूरी तरह से गैरकानूनी माना गया है. इसके अलावा ईरान, उत्तर कोरिया, सीरिया, अफगानिस्तान, बेलारूस, म्यांमार और क्यूबा जैसे देशों में भी Starlink की सेवाओं पर पूरी तरह से रोक है. इन देशों का मानना है कि विदेशी सैटेलाइट तकनीक से उनके नागरिकों के निजी डेटा और राष्ट्रिय संप्रभुता को खतरा हो सकता है.
भारत में क्यों हो रही है इसके लॉन्च में देरी?
भारत सरकार ने स्टारलिंक को देश में काम करने के लिए पूरी तरह खारिज या रिजेक्ट नहीं किया है, बल्कि कुछ जरूरी मंजूरियों को लेकर मामला अभी प्रक्रिया में है. भारत सरकार के दूरसंचार विभाग और सुरक्षा एजेंसियों की सबसे बड़ी चिंता डेटा प्राइवेसी और नेशनल सिक्योरिटी को लेकर है.
सरकार का कहना है कि भारतीय यूजर्स का इंटरनेट डेटा देश की सीमाओं के भीतर ही रहना चाहिए और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा एजेंसियां इसकी निगरानी कर सकें. हालांकि, हालिया अपडेट्स के मुताबिक स्टारलिंक ने भारत की शर्तों को मानते हुए देश में करीब 20 गेटवे साइट्स तैयार कर लिए हैं और भारतीय डेटा को भारत में ही रखने पर सहमति जताई है.
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भारत में आया तो कितनी तेज होगी इंटरनेट स्पीड?
जब स्टारलिंक भारत में अपनी कमर्शियल सर्विस की शुरुआत करेगा, तो इंटरनेट की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. वैश्विक स्तर पर चल रहे ट्रायल्स और कंपनी के डेटा के अनुसार, स्टारलिंक से भारतीय यूजर्स को 100 Mbps से लेकर 200 Mbps तक की सुपरफास्ट इंटरनेट स्पीड आसानी से मिल सकती है, जो कुछ खास परिस्थितियों में 400 Mbps से भी ऊपर जा सकती है.
यह स्पीड आम तौर पर मिलने वाले सामान्य मोबाइल नेटवर्क से कई गुना अधिक होगी. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें लेटेंसी यानी डेटा ट्रांसफर में लगने वाला समय बेहद कम होगी, जिससे बिना किसी रुकावट के हाई-डेफिनिशन वीडियो कॉलिंग, गेमिंग और लाइव स्ट्रीमिंग की जा सकेगी.
ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों की बदल जाएगी सूरत
स्टारलिंक का सबसे ज्यादा फायदा देश के उन हिस्सों को मिलेगा जहां आज भी मोबाइल नेटवर्क का सिग्नल नहीं पहुंच पाता है. भारत के ऊंचे पहाड़ी इलाके, घने जंगल, द्वीप समूह और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्र जहां फाइबर केबल बिछाना नामुमकिन है, वहां केवल एक छोटी सी छतरी लगाकर हाई-स्पीड इंटरनेट चलाया जा सकेगा. हालांकि, इसके लिए शुरुआती सेटअप कॉस्ट और मासिक प्लान की कीमत काफी ज्यादा हो सकती है.
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