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Cacao Currency: इस सभ्यता के लोग चॉकलेट को करेंसी में करते थे इस्तेमाल, जानें क्या थी इसके पीछे की वजह?

Cacao Currency: दुनिया में एक समय ऐसा भी था जब चॉकलेट को पैसे के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था. आइए जानते हैं ऐसा कब होता था और क्या थी इसकी वजह.

Cacao Currency: एक समय ऐसा भी था जब चॉकलेट को पैसे के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था. दरअसल पुरानी माया और एज्टेक सभ्यताओं में कोको बीन्स को करेंसी के एक जाने-माने रूप के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था. ये समाज कोको को इतना महत्व देते थे कि कभी-कभी इसकी असल कीमत सोने से भी ज्यादा हो जाती थी. 

देवताओं का एक पवित्र तोहफा 

पुराने माया और एज्टेक के लिए कोको का गहरा धार्मिक मतलब था. वे लोग मानते थे कि देवता क्वेटजालकोटल ने इंसानों को कोको का पौधा तोहफे में दिया. इस दिव्य जुड़ाव की वजह से कोक को अक्सर देवताओं का खाना कहा जाता था. यह रस्म, समारोह और खास लोगों के इस्तेमाल में एक बड़ी भूमिका निभाता था. इसकी पवित्र हैसियत ने इसकी अहमियत को काफी ज्यादा बढ़ा दिया था. इससे इसे एक तरह का आध्यात्मिक महत्व मिला. इस वजह से इसे करेंसी के तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा. 

दुर्लभ होने की वजह से कीमती

कोको के पेड़ कहीं भी नहीं उगते. उन्हें ट्रॉपिकल मौसम, भारी बारिश, नमी और ध्यान से रखी गई मिट्टी की जरूरत होती है.  इस ज्योग्राफिकल लिमिट की वजह से मेसोअमेरिका के बड़े हिस्सों में कोको काफी कम मिलता था. अब क्योंकि सप्लाई नेचुरली कम थी इस वजह से डिमांड ज्यादा रही. इकोनॉमिक तौर पर कमी ने इसकी वैल्यू बनाए रखने में मदद की.

प्रैक्टिकल और ड्यूरेबल 

कई खाने की चीजों के उलट कोको बीन्स को सुखाकर लंबे समय तक बिना खराब हुए स्टोर किया जा सकता था. वे हल्के, पोर्टेबल और गिनने में आसान थे. इन्हें पीसकर एक एनर्जी देने वाला ड्रिंक बनाया जा सकता था. इसे योद्धा, अमीर लोग और पुजारी पीते थे. 

रोजमर्रा की जिंदगी में टैक्स और ट्रेड 

इनका इस्तेमाल ना सिर्फ मार्केट में होता था बल्कि माया शासक टैक्स के तौर पर भी वसूलते थे. किसान और लोग अपनी श्रद्धांजलि का कुछ हिस्सा कोको में देते थे. इसे बाद में  रीडिस्ट्रीब्यूट या फिर ट्रेड किया जा सकता था. भीड़-भाड़ वाले मार्केट में कोको रोजाना की खरीदारी के लिए छोटे चेंज के तौर पर काम आता था. पुराने रिकॉर्ड में कीमतों की अनुमानित तुलना बताई गई है. एक कद्दू की कीमत चार कोको बीन्स, एक खरगोश की कीमत लगभग 10 और एक टर्की पक्षी की कीमत 100 बीन्स तक हो सकती थी.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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