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Minority Government: देश में ये थी सबसे लंबी चलने वाली अल्पमत की सरकार, बहुमत के बिना पूरे किए थे 5 साल

Minority Government: तमिलनाडु में विजय और उनकी पार्टी टीवीके को सरकार बनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं देश की सबसे लंबी चलने वाली अल्पमत सरकारों के बारे में.

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  • तमिलनाडु में गठबंधन राजनीति के बीच विजय की पार्टी सबसे बड़ी बनी।
  • कांग्रेस बाहरी समर्थन से बहुमत जुटाने में असमर्थ रही।
  • पूर्व में नरसिम्हा राव ने अल्पमत सरकार का कार्यकाल पूरा किया।
  • एलपीजी सुधारों से भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया।

Minority Government: तमिलनाडु में राजनीतिक  अनिश्चितता जारी रहने के साथ ही गठबंधन की राजनीति और अल्पमत सरकारों को लेकर चर्चाएं एक बार फिर से शुरू हो चुकी हैं. अभिनेता से राजनेता बने विजय और उनकी पार्टी टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी, लेकिन इसके बावजूद भी वह बहुमत के आंकड़ों से पीछे है. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बाहरी समर्थन के बावजूद भी सीटों की संख्या अभी भी 113 ही है. इस स्थिति ने भारतीय राजनीति के इतिहास के सबसे उल्लेखनीय अध्यायों में से एक में फिर से दिलचस्पी जगा दी है. यह अध्याय है पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली अल्पमत सरकार का.

बिना बहुमत के बनी सरकार 

1991 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. लेकिन उसे सिर्फ 232 सीट ही मिल पाई. यह बहुमत के आंकड़े 272 से काफी कम थी. बहुमत के लिए जरूरी संख्या न होने के बावजूद पी.वी. नरसिम्हा राव ने वामपंथी दलों और क्षेत्रीय सहयोगियों के बाहरी समर्थन से सरकार बनाने में सफलता हासिल की. उस समय कई राजनीतिक जानकारों का ऐसा मानना था कि यह सरकार कुछ महीनों से ज्यादा नहीं टिक पाएगी. लेकिन उसके उलट इस सरकार ने अपना पूरे 5 साल का कार्यकाल पूरा किया.

पूरे 5 साल का कार्यकाल 

पी.वी. नरसिम्हा राव ने 21 जून 1991 को प्रधानमंत्री का पद संभाला और 16 मई 1996 तक सत्ता में बने रहे. इस उपलब्धि का एक ऐतिहासिक महत्व था. क्योंकि राव नेहरू गांधी परिवार से बाहर के पहले ऐसे कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने जिन्होंने अपना पूरे 5 साल का कार्यकाल पूरा किया.

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कैसे हुआ बहुमत का प्रबंधन?

अपनी सरकार के शुरुआती सालों में राव को लगातार राजनीतिक अस्थिरता और बार-बार लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्तावों का सामना करना पड़ा. हालांकि उन्होंने छोटे दल, निर्दलीय सांसद और पार्टी से अलग हुए गुटों का समर्थन हासिल करके धीरे-धीरे अपनी स्थिति को मजबूत किया. 

वक्त के साथ राजनीतिक बातचीत और गठबंधन के कुशल प्रबंधन के जरिए कांग्रेस बहुमत के आंकड़े के और करीब पहुंच गई. बिखरे हुए राजनीतिक माहौल में अल्पमत की सरकार को बनाए रखने की यह क्षमता राव के सबसे खास राजनीतिक हुनर में से एक बन गई.

वह सरकार जिसने भारत की अर्थव्यवस्था बदल दी 

राव सरकार को ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बनाने वाली बात सिर्फ उसके टिके रहना नहीं था. जब राव ने पद संभाला तब भारत एक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा था. विदेशी मुद्रा भंडार इतना काम हो गया था कि खबरों के मुताबिक देश के पास इंपोर्ट के लिए सिर्फ दो हफ्ते का ही पैसा बचा था. इसके जवाब में राव ने मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री नियुक्त किया और ऐतिहासिक एलपीजी सुधार, लिबरलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन और ग्लोबलाइजेशन की शुरुआत हुई.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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