Cyclone Arnab: कितने हजार किमी तक होता है किसी तूफान का असर? जान लें लिमिट
Cyclone Arnab: पूरे भारत में इस वक्त चक्रवात अर्नब और वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से भारी बारिश और ओलावृष्टि हो रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि किसी तूफान का असर कितने किलोमीटर तक हो सकता है.

- चक्रवात अर्नब-पश्चिमी विक्षोभ से देश में मौसम बदला।
- तूफान का असर 1000-2200 किलोमीटर तक हो सकता है।
- तट से 1000 किलोमीटर दूर भी भारी बारिश संभव है।
- ज़मीन पर आते ही नमी घटने से तूफान कमजोर होते हैं।
Cyclone Arnab: पूरे भारत में चक्रवात अर्नब और वेस्टर्न डिस्टरबेंस के प्रभाव की वजह से मौसम की स्थिति में काफी बदलाव आया है. इन प्रणालियों की वजह से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के ऊंचे इलाकों में भारी मौसमी बर्फबारी हुई है. इसी के साथ देश का लगभग 50% से 60% हिस्सा बारिश, तूफान और ओलावृष्टि से जूझ रहा है.
इसी बीच आइए जानते हैं कि आखिर कितने हजार किलोमीटर तक कोई तूफान असर पैदा करता है और क्या होती है इसकी लिमिट.
चक्रवाती तूफान कितना चौड़ा हो सकता है?
किसी चक्रवाती तूफान का प्रभाव उसके आकार और तीव्रता के आधार पर लगभग 1000 किलोमीटर से लेकर 2200 किलोमीटर से ज्यादा तक हो सकता है. एक सामान्य चक्रवाती तूफान का मेन डायमीटर लगभग 480 से 500 किलोमीटर होता है. आसपास के क्लाउड बैंड इसके केंद्र के पास के क्षेत्र से हटकर मौसम को प्रभावित कर सकते हैं.
अंतर्देशीय क्षेत्र में बारिश
तूफान जमीन से टकराने के बाद तट से दूर की जगहों को प्रभावित करना जारी रख सकता है. मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित समुद्री तट से 1000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर स्थित राज्यों में भी भारी बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं, जब कोई बड़ी मौसमी प्रणाली इस क्षेत्र को प्रभावित करती है.
चक्रवात अर्नब का प्रभाव तट से सैकड़ों किलोमीटर दूर तक महसूस किया गया. वेस्टर्न डिस्टरबेंस के साथ-साथ बारिश, तूफान और ओलावृष्टि भी हुई. उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम में भी भारी मौसमी बर्फबारी हुई.

1979 का रिकॉर्ड तोड़ने वाला तूफान
रिपोर्ट्स के मुताबिक सबसे बड़ा तूफान सुपर टाइफून टिप है जो 1979 में आया था. इसका डायमीटर लगभग 2,222 किलोमीटर था. टिप तूफान के प्रभाव के लिए बताई गई सीमा के ऊपरी सिरे को दर्शाती है. इसका डायमीटर एक सामान्य चक्रवाती तूफान के लगभग 480 से 500 किलोमीटर डायमीटर से चार गुना ज्यादा था. यह तुलना उस पैमाने पर रोशनी डालती है जिस तक एक असाधारण मौसम प्रणाली पहुंच सकती है.
भूस्खलन के बाद तूफान कमजोर क्यों हो जाते हैं?
अपने संभावित प्रभाव के बावजूद भी चक्रवाती तूफान आमतौर पर कमजोर हो जाते हैं क्योंकि वह समुद्र से जमीन की तरफ बढ़ते हैं. समुद्र के ऊपर वे नमी की आपूर्ति का इस्तेमाल करते हैं जो प्रणाली को बनाए रखने में मदद करती है. एक बार जब वे अंतर्देशीय चले जाते हैं तो नमी की आपूर्ति कम हो जाती है. इसी समय चलते तूफान और जमीन की सतह के बीच घर्षण इसके सर्कुलेशन को धीमा कर देता है.
आमतौर पर तप से लगभग 150 से 200 किलोमीटर अंदर की यात्रा करने के बाद तूफान कमजोर हो जाता है. यह अंत में अपनी चक्रवाती शक्ति खो सकता है और अवसाद में बदल सकता है, जो कम दबाव का क्षेत्र है.

तूफान की पहुंच की सीमा को समझना
यही वजह है कि असाधारण स्थिति में तूफान का प्रभाव सैकड़ों किलोमीटर से लेकर 2200 किलोमीटर से भी ज्यादा हो सकता है. इसका डायमीटर, बादल और नमी क्षेत्र और भूस्खलन के बाद कमजोर होना बताता है की क्यों मौसम का प्रभाव तूफान के केंद्र से आगे बढ़ सकता है.
दूरी के आंकड़ों का क्या मतलब है?
आंकड़े दो अलग-अलग मापों के बारे में बताते हैं. एक तूफान का डायमीटर और वह व्यापक क्षेत्र जिस पर इसके प्रभाव देखे जा सकते हैं. 480 से 500 किलोमीटर का डायमीटर एक खास प्रणाली की अनुमानित चौड़ाई को दर्शाता है. 1000 से 2200 किलोमीटर से ज्यादा की पहुंच इसके प्रभाव की संभावित सीमा के बारे में बताती है. इसमें केंद्र से काफी दूर का मौसम भी शामिल हो सकता है. इन माप को अलग रखने से यह समझने में मदद मिलती है कि किसी तूफान का रिपोर्ट किया गया प्रभाव उसके मुख्य डायमीटर से बड़ा क्यों हो सकता है.
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मौसम के प्रभाव की तीव्रता
भारत की वर्तमान मौसम स्थिति में दो प्रणालियां एक साथ काम कर रही हैं. चक्रवात अर्नब और एक सक्रिय वेस्टर्न डिस्टरबेंस देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, तूफान, ओलावृष्टि और बर्फबारी से जुड़े मैं. भारत के लगभग 50 से 60% हिस्से में बारिश और तूफान की गतिविधियां मौजूदा हालातों के भौगोलिक विस्तार को दर्शाती हैं. ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र में बर्फबारी इस मौसम पैटर्न का एक और हिस्सा है.
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