Sonam Wangchuk Hunger Strike: संसद के सदस्य नहीं हैं सोनम वांगचुक फिर कैसे बन सकते हैं शिक्षा मंत्री, केजरीवाल की अपील में कितना दम?
Sonam Wangchuk Hunger Strike: हाल ही में केजरीवाल ने सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाने की अपील की है. आइए जानते हैं कि क्या बिना संसद सदस्यता के सोनम वांगचुक शिक्षा मंत्री बन सकते हैं..

- केजरीवाल ने सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाने का सुझाव दिया।
- संविधान गैर-सांसद को मंत्री बनने की अनुमति देता है।
- छह माह में संसद सदस्य बनना मंत्री पद हेतु आवश्यक।
Sonam Wangchuk Hunger Strike: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में सोनम वांगचुक से मुलाकात की. सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं. मुलाकात के दौरान केजरीवाल ने शिक्षा और नीट पेपर लीक से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने के लिए वांगचुक की तारीफ की. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जगह सोनम वांगचुक को नियुक्त किया जाना चाहिए. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या कोई व्यक्ति जो संसद का सदस्य नहीं है केंद्रीय शिक्षा मंत्री बन सकता है?
बिना संसद सदस्यता के शिक्षा मंत्री
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 (5) के तहत जो व्यक्ति सांसद नहीं है उसे भी केंद्रीय मंत्री नियुक्त किया जा सकता है. हालांकि ऐसी नियुक्ति के साथ कुछ संवैधानिक शर्तें जुड़ी होती हैं.
संविधान प्रधानमंत्री को किसी भी योग्य भारतीय नागरिक को केंद्रीय मंत्री नियुक्त करने की इजाजत देता है. अब भले ही वह व्यक्ति नियुक्ति के समय संसद के किसी भी सदन का सदस्य ना हो.
हालांकि संविधान यह भी कहता है कि मंत्री के तौर पर शपथ लेने के लिए 6 महीने के अंदर उस व्यक्ति को लोकसभा या फिर राज्यसभा का सदस्य बनना जरूरी है. अगर वह व्यक्ति इस समय सीमा के अंदर किसी भी सदन की सदस्यता को हासिल नहीं कर पाता तो उसका मंत्री पद अपने आप खत्म हो जाता है.
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क्या कहता है अनुच्छेद 75(5) ?
अनुच्छेद 75(5) ऐसे मंत्री के लिए 6 महीने की संवैधानिक मोहलत देता है जो सांसद नहीं है. भारत के राजनीतिक इतिहास में कई बार इस प्रावधान का इस्तेमाल किया गया है. इसके जरिए ऐसे विशेषज्ञों या फिर राजनीतिक नेताओं को केंद्रीय कैबिनेट में शामिल होने का मौका मिला है जो नियुक्ति के समय संसद के सदस्य नहीं थे. लेकिन बाद में वे संसद में शामिल हुए.
केजरीवाल की मांग पर क्यों हो रही है चर्चा?
नीट पेपर लीक मामले को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और यह सुझाव दिया कि उनकी जगह शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को नियुक्त किया जाए. इस प्रस्ताव ने लोगों का ध्यान खींचा है क्योंकि वांगचुक शिक्षा और इनोवेशन के क्षेत्र में अपने काम के लिए जाने जाते हैं.
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