बाब अल-मंडेब से हर दिन कितना होता है अंतरराष्ट्रीय व्यापार, इस रास्ते से भारत क्या-क्या आता है?
Bab el-Mandeb Strait: हाल ही में बाब अल मंडेब को भी बंद करने की खबरें सामने आ रही हैं. आइए जानते हैं कि यहां से किन-किन चीजों का भारत में इंपोर्ट किया जाता है.

- मध्य पूर्व तनाव से बाब अल मंडेब रणनीतिक मार्ग चर्चा में।
- यह जलमार्ग प्रतिदिन अरबों डॉलर का वैश्विक व्यापार संभालता।
- भारत ऊर्जा, उर्वरक, औद्योगिक सामान यहीं से पाता।
- मार्ग बंद होने पर यात्रा लंबी, आपूर्ति श्रृंखला बाधित।
Bab el-Mandeb Strait: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच बाब अल मंडेब एक बार फिर से चर्चा में है. अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव से होर्मुज स्ट्रेट पहले ही प्रभावित हो चुका है वहीं ईरान ने इस बात की चेतावनी दी है कि अगर इरानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले जारी रहे तो यमन के हूती विद्रोही बाब अल मंडेब को भी बंद कर देंगे. इसके बाद ग्लोबल ट्रेड पर काफी बड़ा असर पड़ेगा. आइए जानते हैं कि हर दिन यहां से कितना व्यापार होता है और यह रास्ता भारत के लिए क्यों जरूरी है.
बाब अल मंडेब से कितना इंटरनेशनल ट्रेड?
यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. यह एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच एक जरूरी गेटवे का काम करता है. हर दिन इस रास्ते से लगभग 9 से 10 अरब डॉलर का इंटरनेशनल ट्रेड होता है. इसके अलावा हर दिन यहां से लगभग चार से पांच मिलियन बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद ले जाए जाते हैं. ग्लोबल स्तर पर यह कॉरिडोर दुनिया के समुद्री व्यापार का लगभग 10% से 12% और ग्लोबल कंटेनर ट्रैफिक का लगभग 30% हिस्सा संभालता है.
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भारत इस रास्ते से क्या इंपोर्ट करता है?
भारत अपनी एनर्जी सिक्योरिटी और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन के लिए कई जरूरी चीजों का इंपोर्ट इसी रास्ते से करता है. रूसी कच्चे तेल की एक बड़ी मात्रा लाल सागर और बाब अल मंडेब रास्ते से भारत पहुंचती है और फिर भारतीय रिफाइनरी में प्रोसेस की जाती है. इस कॉरिडोर का इस्तेमाल यूरोप और उत्तरी अफ्रीका के देशों से लिक्विफाइड नेचुरल गैस लाने के लिए भी किया जाता है. भारत इस रास्ते से पोटाश और फॉस्फेट फर्टिलाइजर जैसे जरूरी एग्रीकल्चरल इनपुट इंपोर्ट करता है.
यूरोप से मशीनरी, इंजीनियरिंग इक्विपमेंट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे महंगे इंडस्ट्रियल सामान भी यही से आते हैं. इसके अलावा भारत की फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली इंडस्ट्रियल केमिकल और एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट्स भी यहीं से लाए जाते हैं.
अगर यह रास्ता ब्लॉक हो जाए तो क्या होगा?
अगर संघर्ष या फिर कमर्शियल जहाज पर हमले की वजह से यह रास्ता बंद हो जाता है तो जहाजों को लाल सागर से बचने और अफ्रीका के चारों तरफ केप ऑफ गुड होप से होकर जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. जहाज को अपनी यात्रा पूरी करने में आमतौर पर 10 से 14 दिन अतिरिक्त लगा सकते हैं. इससे कार्गो की डिलीवरी में देरी होगी और सप्लाई चेन में रुकावट आएगी.
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