LPG Ships: सर्व शक्ति से लेकर शिवालिक तक... होर्मुज से LPG लाने वाले जहाजों के नाम कैसे रखे जाते हैं?
LPG Ships: भारत का सर्व शक्ति टैंकर होर्मुज को पार कर चुका है. इसी बीच आइए जानते हैं कि जहाजों के नाम कैसे रखे जाते हैं.

- सर्व शक्ति एलपीजी टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से सफलतापूर्वक गुजरा।
- जहाजों के नाम सांस्कृतिक, भौगोलिक और रणनीतिक ताकत दर्शाते हैं।
- नामकरण के लिए शिपिंग महानिदेशालय से मंजूरी आवश्यक है।
- भारतीय जहाज नामकरण में नारियल तोड़ने की परंपरा है।
LPG Ships: भारत से जुड़ा एलपीजी टैंकर सर्व शक्ति होर्मुज स्ट्रेट को पार कर गया है. दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की वजह से इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही धीमी पड़ गई थी. लेकिन इन सबके बीच एक दिलचस्प सवाल यह है कि आखिर सर्व शक्ति और शिवालिक जैसे जहाजों के नाम कैसे रखे जाते हैं? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
कैसे रखे जाते हैं नाम?
भारतीय एलपीजी वाहक जहाजों के नाम यूं ही अपने मन से नहीं रख दिए जाते. उनके नाम काफी सोच-समझकर चुने जाते हैं. ऐसा इसलिए ताकि वे देश की सांस्कृतिक जड़, भूगोल और रणनीतिक ताकत को दर्शा सकें. सर्व शक्ति जैसे नाम शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं. इसी तरह शिवालिक जैसे नाम हिमालय पर्वतमाला से प्रेरित हुए हैं.
जहाज के नामकरण में थीम
शिपिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया जैसे संगठन जहाजों का नाम रखते समय एक थीम आधारित दृष्टिकोण को अपनाते हैं. जैसे वेरी लार्ज गैस करियर्स जो भारी मात्रा में एलपीजी लाते हैं अक्सर ऐसे नाम रखते हैं जो शिवालिक जैसे पहाड़ों से प्रेरित होते हैं.
सांस्कृतिक और पारंपरिक प्रभाव
भारतीय जहाजों के नामों में अक्सर एक सांस्कृतिक झलक देखने को मिलती है. शक्ति, देवी जैसे शब्द या फिर जग और देश जैसे उपसर्ग आमतौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं. निजी शिपिंग कंपनी भी अपनी नामकरण शैली बनाए रखती है. जैसे ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग जैसी कंपनियां अक्सर अपने बेड़े के नाम में जग जैसे उपसर्गों का इस्तेमाल करती हैं.
मंजूरी प्रक्रिया
किसी भी जहाज का नाम रखना सिर्फ रचनात्मकता की बात नहीं है. यह एक कानूनी प्रक्रिया है. प्रस्तावित नाम को मंजूरी के लिए शिपिंग महानिदेशालय के पास जमा करना होता है. अधिकारी इस बात को पक्का करते हैं कि नाम अनोखा हो और पहले से किसी दूसरे जहाज को ना दिया गया हो. मंजूरी मिलने के बाद ही जहाज को उसका आधिकारिक पंजीकरण मिलता है.
समुद्र में पहचान और निशान
एक बार मंजूरी मिल जाने के बाद जहाज का नाम उसकी संरचना पर स्थायी रूप से प्रदर्शित किया जाता है. आमतौर पर जहाज के अगले हिस्से और पिछले हिस्से पर यह नाम लिखा जाता है. भारत में किसी जहाज का नाम रखने पर आयोजन भी होता है. जहाज अपनी यात्रा शुरू करने से पहले उसकी सुरक्षा और समृद्धि के लिए अलग अलग रीति-रिवाज और प्रार्थना की जाती हैं. शैम्पेन की बोतल तोड़ने की पश्चिमी परंपरा के उलट भारतीय समारोहों में अक्सर नारियल तोड़ा जाता है.
यह भी पढ़ें: भारत में अब तक नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, जानें पड़ोसी देशों में कैसे हैं हालात?























