एक्सप्लोरर

इतने बड़े इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को कैसे किया गया था लॉन्च, किस तकनीक का हुआ था इस्तेमाल?

International Space Station: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को अंतरिक्ष में कैसे लॉन्च किया गया था. आइए जानते हैं.

International Space Station: अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन अंतरिक्ष में अब तक बनाई गई सबसे शानदार इंजीनियरिंग परियोजनाओं में से एक है. 400 टन से ज्यादा वजनी और लगभग 1 फुटबॉल मैदान के आकार तक फैले इस स्टेशन को कभी भी एक बड़ी संरचना के रूप में लॉन्च नहीं किया गया था. इसके बजाय इसे कक्षा में टुकड़े-टुकड़े करके इकट्ठा किया गया. साथ ही अलग-अलग मॉड्यूलों को अंतरिक्ष में ले जाया गया और कई सालों तक जोड़ा गया. इस मॉड्यूलर दृष्टिकोण ने कई देशों के लिए प्रयोगशाला, रहने वाले क्वार्टर, बिजली प्रणाली और दूसरे घटकों में योगदान करना संभव बना दिया.

मॉड्यूल के साथ शुरू हुई पहल

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को बनाने में पहला बड़ा कदम 20 नवंबर 1998 को उठाया गया. रूस ने प्रोटॉन रॉकेट पर जरिया मॉड्यूल लॉन्च किया. जरिया ने विकासशील स्टेशन के लिए प्रारंभिक प्रणोदन, शक्ति और बुनियादी नियंत्रण कार्य प्रदान किए. 

सिर्फ कुछ हफ्तों बाद दिसंबर 1998 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने स्पेस शटल पर यूनिटी कनेक्टिंग मॉड्यूल लॉन्च किया. दोनों घटकों को कक्षा में जोड़ा गया. इससे भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशन की नींव तैयार हुई.


इतने बड़े इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को कैसे किया गया था लॉन्च, किस तकनीक का हुआ था इस्तेमाल?

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को एक टुकड़े में क्यों लॉन्च नहीं किया गया? 

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन एक ही लॉन्च में कक्षा में स्थापित करने के लिए काफी बड़ा और भारी था. यहां तक कि आज के सबसे बड़े रॉकेट भी पूरी तरह से इकट्ठे 400 टन के अंतरिक्ष स्टेशन को कक्षा में नहीं ले जा सकते हैं. 

इसके बजाय इंजीनियरों ने स्टेशन को प्रबंधनीय खंडों में बांट दिया. हर मॉड्यूल एक रॉकेट या फिर अंतरिक्ष शटल की पेलोड क्षमता के अंदर फिट हो सकता है. साथ ही पहले से ही पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे स्टेशन से जोड़ा जा सकता है.

1998 और 2011 के बीच 40 से ज्यादा मिशन आयोजित किए गए. नासा के अंतरिक्ष शटल बेड़े ने खासतौर से जरूरी भूमिका निभाई, कई घटकों को कक्षा में पहुंचाया, जबकि रूसी लॉन्च वाहनों ने कई दूसरे मॉड्यूल और आपूर्ति पहुंचाई.

यह भी पढ़ेंः कितने बच्चों तक मिलती है मैटरनिटी लीव, क्या तीसरे बच्चे पर बदल जाता है नियम?

कैनाडर्म 2 ने असेंबली को संभव बनाया 

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की प्रौद्योगिकी के सबसे जरूरी टुकड़ों में से एक कैनाडर्म 2 है. यह कनाडा द्वारा विकसित एक रोबोटिक भुजा है. यह लगभग 17 मीटर लंबा है और स्टेशन के बाहरी हिस्से में घूम सकता है. रोबोटिक भुजा ने अंतरिक्ष यात्रियों को बड़े घटकों को पकड़ने, स्थानांतरित करने और स्थिति में लाने की अनुमति दी. इन्हें माइक्रोग्रैविटी में मैन्युअल रूप से संभालना काफी मुश्किल होता है. 

आसान शब्दों में कहें तो यह स्टेशन को बनाने में क्रेन के रूप में काम कर सकता है, अलग-अलग जगहों के बीच उपकरण और मॉड्यूल को पहुंचने में मदद कर सकता है और साथ ही असेंबली संचालन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की मदद कर सकता है. निर्माण और रखरखाव कार्यों को पूरा करने के लिए अंतरिक्ष यात्री लगातार अतिरिक्त वाहन गतिविधियां करते थे, जिन्हें आमतौर पर स्पेसवॉक के रूप में जाना जाता है.


इतने बड़े इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को कैसे किया गया था लॉन्च, किस तकनीक का हुआ था इस्तेमाल?

मॉड्यूल को कैसे जोड़ा गया? 

अलग-अलग घटकों को बिल्कुल सटीकता के साथ एक साथ लाना पड़ा. इस वजह से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन स्वचालित डॉकिंग, रोबोटिक बर्थिंग और मैनुअल प्रक्रिया के संयोजन का इस्तेमाल करता है. डॉकिंग सिस्टम अंतरिक्ष यान और मॉड्यूल को स्टेशन तक पहुंचने और उससे जुड़ने की अनुमति देता है. बर्थिंग में विजिटिंग मॉड्यूल या फिर अंतरिक्ष यान को पकड़ने और उसे कनेक्शन बिंदु के सामने रखने के लिए रोबोटिक हाथ का इस्तेमाल करना शामिल है. एक बार अटैच हो जाने के बाद यांत्रिक और विद्युत कनेक्शन को सुरक्षित किया जा सकता है.

एक बहुराष्ट्रीय इंजीनियरिंग परियोजना 

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण सिर्फ इस वजह से किया जा सका क्योंकि अलग-अलग देशों ने संगत तकनीकी मानकों के मुताबिक घटकों को विकसित किया. संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान और कनाडा सभी ने बड़े हार्डवेयर और प्रौद्योगिकी में योगदान दिया. अलग-अलग अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा विकसित प्रयोगशालाएं, जीवित मॉड्यूल, रोबोटिक सिस्टम, बिजली उपकरण और दूसरे बुनियादी ढांचे अंत में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन बने. इसके लिए डॉकिंग तंत्र और विद्युत कनेक्शन से लेकर कंप्यूटर सिस्टम और जीवन-समर्थन बुनियादी ढांचे तक हर चीज के सटीक कोऑर्डिनेशन की जरूरत थी.

यह भी पढ़ेंः हर सेकंड कितना पानी फेंकती है वॉटर कैनन, जानें ये कितने खतरनाक

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

स्टेडियम से एयरपोर्ट तक, पीएम मोदी के नाम पर किन मशहूर जगहों के नाम?
स्टेडियम से एयरपोर्ट तक, पीएम मोदी के नाम पर किन मशहूर जगहों के नाम?
शराब की दुकानों से एक दिन में कितना कमाती है दिल्ली, कितना होगा नुकसान?
शराब की दुकानों से एक दिन में कितना कमाती है दिल्ली, कितना होगा नुकसान?
कौन हैं शांति का नोबेल पाने वाली नावी पिल्लै, भारत से इनका क्या कनेक्शन?
कौन हैं शांति का नोबेल पाने वाली नावी पिल्लै, भारत से इनका क्या कनेक्शन?
दुनिया के कितने देशों की सत्ता उखाड़ चुके हैं Gen Z, यहां देख लें लिस्ट
दुनिया के कितने देशों की सत्ता उखाड़ चुके हैं Gen Z, यहां देख लें लिस्ट
Advertisement

वीडियोज

क्या दिल्ली में कल लॉकडाउन लग जाएगा?
प्रदर्शन से पहले ही CJP कार्यकर्ताओं पर एक्शन शुरू
Bollywood News: नाना पाटेकर के निधन की खबर से भावुक हुए सितारे, सोशल मीडिया पर दी आखिरी विदाई (09.10.26)
YRKKH: Krish का काला सच आया सामने, Armaan ने खोया आपा, Poddar House में हुआ महासंग्राम!
नाना पाटेकर की अंतिम यात्रा की तैयारी शुरू, गांव में पसरा सन्नाटा
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
CJP को प्रोटेस्ट के लिए जंतर-मंतर पर नहीं मिली परमिशन, क्या है दिल्ली पुलिस की दलील
CJP को प्रोटेस्ट के लिए जंतर-मंतर पर नहीं मिली परमिशन, क्या है दिल्ली पुलिस की दलील
मध्य प्रदेश HC ने रद्द किया 27% OBC आरक्षण, कोटा फिर 14 फीसदी हुआ
मध्य प्रदेश HC ने रद्द किया 27% OBC आरक्षण, कोटा फिर 14 फीसदी हुआ
उपचुनाव रिजल्ट: अमित शाह बोले, 'राहुल गांधी के दुष्प्रचार के बावजूद जीत रही BJP'
उपचुनाव रिजल्ट: अमित शाह बोले, 'राहुल गांधी के दुष्प्रचार के बावजूद जीत रही BJP'
11 छक्के 6 चौके, एबी डिविलियर्स ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 277 के स्ट्राइक रेट से ठोका शतक
11 छक्के 6 चौके, एबी डिविलियर्स ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 277 के स्ट्राइक रेट से ठोका शतक
'दृश्यम 3' 250 करोड़ के पार, 'सिंघम अगेन' का रिकॉर्ड तोड़ बनी अजय देवगन की दूसरी हाईएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म
'दृश्यम 3' 250 करोड़ के पार, 'सिंघम अगेन' का रिकॉर्ड तोड़ बनी अजय देवगन की दूसरी हाईएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म
'...तो शायद मैं ये पुरस्कार शेयर कर लूं', नोबेल शांति पुरस्कार विजेता ने लिए ट्रंप के मजे
'...तो शायद मैं ये पुरस्कार शेयर कर लूं', नोबेल शांति पुरस्कार विजेता ने लिए ट्रंप के मजे
नंदीग्राम जीत के बाद BJP ने 75816 वोट मार्जिन से फतह किया रेजीनगर उप-चुनाव
नंदीग्राम जीत के बाद BJP ने 75816 वोट मार्जिन से फतह किया रेजीनगर उप-चुनाव
तमिलनाडु उपचुनाव में TVK की जीत से भड़के स्टालिन, CM विजय पर निकाली भड़ास
तमिलनाडु उपचुनाव में TVK की जीत से भड़के स्टालिन, CM विजय पर निकाली भड़ास
Embed widget