आखिर क्या है डोनबास, जिसे हासिल करने के बाद पुतिन युद्ध रोकने के लिए तैयार?
What Is Donbas: रूस-यूक्रेन युद्ध का केंद्र बना डोनबास, जिस पर कब्जा करने के बाद पुतिन ने युद्ध रोकने की शर्त रखी है. यह इलाका आर्थिक और सामरिक रूप से बेहद अहम माना जाता है, चलिए जानें क्यों?

हाल ही में जब रूस के राष्ट्रपति पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात अलास्का में हुई थी. तीन घंटे तक चली इस बैठक में ज्यादातर वक्त यूक्रेन पर संभावित समझौते को लेकर चर्चा हुई थी. इस दौरान पुतिन ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि यह मुलाकात दो देशों के मध्य शांति समझौता करा सकती है, हालांकि उन्होंने साफ तौर पर शर्तें नहीं बताई थीं. लेकिन इस वक्त रूस सिर्फ डोनबास से यूक्रेन की पूरी तरह से वापसी चाहता है. इसके बदले में वह युद्ध रोकने के लिए तैयार है. लेकिन आखिर डोनबास क्या है और वह पुतिन के लिए इतना खास क्यों है. चलिए जानें.
क्या है डोनबास?
पुतिन ने बार-बार डोनेत्सक और लुहांस्क की अहमियत की बात कही है. यही दोनों इलाके मिलकर डोनबास कहे जाते हैं. पुतिन का कहना है कि डोनबास का यह इलाका एतिहासिक रूप से रूस से जुड़ा रहा है. यह सोवियत कालीन विरासत का भी हिस्सा है, लेकिन संवैधानिक कानूनों के तहत डोनबास यूक्रेन का हिस्सा है. हालांकि डोनबास इलाके का ताना बाना बहुत हद तक मिलता जुलता है. 19वीं शताब्दी की शुरुआत और उसके बाद सोवियत काल के वक्त भी डोनबास औद्योगिक केंद्र रहा. यह इलाका प्राकृतिक संसाधनों से भरा हुआ है.
क्यों खास है डोनबास
डोनबास यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में स्थित एक बड़ा औद्योगिक इलाका है. यहां की आबादी का बड़ा हिस्सा रूसी भाषा बोलता है और रूस समर्थक माना जाता है. यही वजह है कि 2014 में जब रूस ने क्रीमिया पर कब्जा किया था, तभी से डोनबास भी विवादों का केंद्र बना हुआ है. उस समय से यहां रूस समर्थक विद्रोही सक्रिय हैं और उन्होंने खुद को यूक्रेन से अलग घोषित कर दिया था.
यूक्रेन का होगा बड़ा नुकसान
रूस का कहना है कि डोनबास के लोग खुद को यूक्रेन का हिस्सा नहीं मानते और वहां की जनता की सुरक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है. जबकि यूक्रेन और पश्चिमी देश इसे रूस की विस्तारवादी नीति मानते हैं. अमेरिका और यूरोपीय देशों का साफ कहना है कि रूस यूक्रेन की जमीन हथियाने की कोशिश कर रहा है. डोनबास क्षेत्र आर्थिक और सामरिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है. यहां कोयले की खदानें हैं, भारी उद्योग हैं और यह इलाका यूक्रेन की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाता है. अगर रूस इस पर पूरी तरह कब्जा कर लेता है तो यूक्रेन को बड़ा नुकसान होगा और रूस की ताकत और बढ़ जाएगी.
डोनाबास मिलने के बाद ही युद्ध रोकेंगे ट्रंप
अब पुतिन का कहना है कि डोनबास को हासिल करने के बाद ही वे युद्ध रोकने पर विचार करेंगे. यानी साफ है कि रूस की प्राथमिकता इसी क्षेत्र पर कब्जा करना है. फिलहाल रूस ने डोनबास के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लिया है, लेकिन पूरा इलाका अभी उसके हाथ में नहीं आया है.
युद्ध की शुरुआत से अब तक लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और हजारों की जान जा चुकी है. पश्चिमी देश लगातार यूक्रेन को हथियार और मदद भेज रहे हैं, ताकि वह रूस का मुकाबला कर सके. वहीं, रूस का दावा है कि उसकी विशेष सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक डोनबास पूरी तरह से उसके नियंत्रण में नहीं आ जाता है.
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Source: IOCL























