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सिर्फ 1.89 रुपये बढ़ा RPF जवानों का राशन भत्ता, जानें आजादी के वक्त कितना था यह?

रेलवे सुरक्षा में तैनात जवानों को 1.89 रुपये का इजाफा हुआ है. पिछले पांच साल में यह सबसे कम बढ़ोतरी दर्ज हुई है. ऐसे में महंगाई के दौर में इस फैसले पर सवाल तेज हो गए हैं.

रेलवे स्टेशन पर तैनात जवान, रात की ड्यूटी, ठंडा फर्श और हाथ में चाय का कप. देशभर की ट्रेनों और यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा जिन कंधों पर है, उनके राशन भत्ते में इस साल कितनी बढ़ोतरी हुई? जवाब सुनकर आप चौंक सकते हैं. महंगाई के दौर में जहां रोजमर्रा का खर्च लगातार बढ़ रहा है, वहीं आरपीएफ जवानों को मिला है महज 1.89 रुपये प्रतिदिन का इजाफा. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह बढ़ोतरी वाकई राहत है? आइए जानें कि यह भत्ता आजादी के वक्त कितना था.

1.89 रुपये की बढ़ोतरी पर चर्चा तेज

भारतीय रेलवे की सुरक्षा संभालने वाले Railway Protection Force और आरपीएसएफ के करीब 70 हजार जवानों के राशन भत्ते में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 1.89 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि की गई है. यह दर 1 अप्रैल 2025 से लागू मानी जाएगी. पहले जहां यह भत्ता 150.04 रुपये प्रतिदिन था, अब इसे बढ़ाकर 151.93 रुपये कर दिया गया है.

महीने के हिसाब से देखें तो इस बढ़ोतरी से एक जवान को करीब 50 से 60 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे. ऐसे समय में जब सब्जियों, दाल, दूध और गैस की कीमतें लगातार ऊपर हैं, यह रकम कितनी राहत दे पाएगी, इस पर सवाल उठ रहे हैं. 

पिछले साल ज्यादा, इस साल सबसे कम

आंकड़े बताते हैं कि 2024-25 में राशन भत्ते में 7.29 रुपये प्रतिदिन की बढ़ोतरी हुई थी. उससे पहले 2023-24 में 6.32 रुपये और 2022-23 में 8.74 रुपये का इजाफा किया गया था. 2021-22 में तो 9.67 रुपये तक की वृद्धि दर्ज हुई थी, लेकिन इस बार 1.89 रुपये की बढ़ोतरी पिछले पांच वर्षों में सबसे कम है.

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह संशोधन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई में बदलाव के आधार पर किया जाता है और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के मानकों के अनुरूप है. हालांकि, जवानों के बीच इस बार की दर को लेकर असंतोष की चर्चा भी सामने आ रही है. 

2015 से अब तक का सफर

अगर पिछले एक दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2015-16 में यही राशन भत्ता 97.85 रुपये प्रतिदिन था. इसके बाद धीरे-धीरे इसमें बढ़ोतरी होती रही और 2023-24 में यह 150.04 रुपये तक पहुंच गया था. अब 2025-26 के लिए 151.93 रुपये तय किया गया है. यानी करीब दस साल में भत्ता लगभग 54 रुपये बढ़ा है, लेकिन मौजूदा महंगाई दर को देखते हुए कई लोग इसे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं. खासतौर पर तब, जब जवानों की ड्यूटी 24 घंटे की सतर्कता मांगती है और कई बार दूर-दराज के इलाकों में तैनाती होती है. 

आजादी के समय क्या था हाल?

आजादी के समय आरपीएफ के राशन भत्ते के सटीक ऐतिहासिक आंकड़े आसानी से उपलब्ध नहीं हैं. उस दौर में वर्तमान जैसी संरचना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के समान मानक लागू नहीं थे, इसलिए सीधी तुलना करना संभव नहीं है, लेकिन यह तय है कि तब की आर्थिक परिस्थितियां और वेतन संरचना आज से बिल्कुल अलग थीं.

जिम्मेदारी बड़ी, भत्ता सीमित

आरपीएफ और आरपीएसएफ के जवान ट्रेनों, स्टेशनों और यात्रियों की सुरक्षा की पहली पंक्ति में खड़े रहते हैं. त्योहारों, भीड़भाड़ और विशेष ट्रेनों के समय उनकी ड्यूटी और भी कठिन हो जाती है. ऐसे में राशन भत्ते की हर छोटी-बड़ी बढ़ोतरी उनके दैनिक जीवन पर असर डालती है. सरकारी पक्ष का तर्क है कि यह संशोधन तय नियमों के तहत किया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर चर्चा यही है कि क्या 1.89 रुपये की बढ़ोतरी मौजूदा खर्चों के हिसाब से पर्याप्त है? 

यह भी पढ़ें: क्या रोबोट का भी होता है पेटेंट, इसमें कितना लगता है पैसा और कहां करना होता है अप्लाई?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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