जिस्म पर शहद लगा छोड़ती थी चींटियां, इस रानी की हैवानियत से कांपते थे दुश्मन
हंगरी की क्रूर काउंटेस एलिजाबेथ बाथरी अपनी जवानी बनाए रखने के लिए लड़कियों को चींटियों और सुइयों से अमानवीय यातनाएं देती थी. जिसके चलते उसे ताउम्र अपने ही महल के एक बंद कमरे में कैद रहना पड़ा.

- रसूखदार बाथरी को आजीवन कैद मिली, तीन साल बाद मृत्यु।
इतिहास के पन्नों में कई ऐसे सनकी और जालिम शासकों के नाम दर्ज हैं, जिनकी खौफनाक हरकतों के किस्से आज भी लोगों का दिल दहला देते हैं. इन्हीं में से एक बेहद क्रूर नाम 17वीं सदी की हंगेरियन काउंटेस एलिजाबेथ बाथरी का है, जिसे इतिहास ब्लड काउंटेस के नाम से भी जानता है. बाथरी पर अपने ही महल में मासूम नौकरानियों और गरीब किसान परिवारों की लड़कियों को अगवा कर उन पर रोंगटे खड़े करने वाले अत्याचार करने और उनकी हत्याएं करने का आरोप था. आइए जानते हैं कि अपने ऊंचे रुतबे की आड़ में इस रानी ने किस तरह हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थीं.
सेजथे कैसल का खौफनाक सच और छापा
कहानी साल 1610 के आसपास की है, जब हंगरी के राजा मैथियस के कड़े निर्देश पर काउंट ज्योर्गी थुर्जो की अगुवाई में एक दल सेजथे कैसल पहुंचा. वहां जब छापेमारी की गई, तो महल के भीतर का नजारा देखकर जांच करने वाले भी सहम गए. महल की चहारदीवारी के अंदर काउंटेस एलिजाबेथ बाथरी कम उम्र की लड़कियों को अत्यंत भयानक और दर्दनाक यातनाएं दे रही थी. हालांकि, बाथरी की इस क्रूरता की चर्चा पूरे इलाके में पहले से ही थी, लेकिन उसके शक्तिशाली पारिवारिक बैकग्राउंड की वजह से लंबे समय तक किसी में भी उसके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत नहीं थी.
राजशाही परिवार में जन्म और शैतानी सीख
एलिजाबेथ बाथरी का जन्म 1560 में ट्रांसिल्वेनिया के एक बेहद धनाढ्य और रसूखदार घराने में हुआ था. उसके परिवार का प्रभाव इतना व्यापक था कि उसके रिश्तेदारों में राजा, जज, कार्डिनल और बड़े योद्धा शामिल थे. हालांकि, इस शाही परिवार के भीतर कुछ लोग बेहद सनकी प्रवृत्ति के थे. ऐतिहासिक विवरण बताते हैं कि बाथरी के एक चाचा ने उसे बचपन में ही अमानवीय और शैतानी प्रथाओं से अवगत कराया था. वहीं, उसकी एक महिला रिश्तेदार ने उसे यौन विकृतियों और क्रूर व्यवहार की बारीकियां सिखाई थीं, जिसने उसके दिमाग पर गहरा असर डाला.
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चीटियों से मौत देने की सजा
महज 15 साल की उम्र में बाथरी का विवाह काउंट नदाशी से हुआ और दोनों सेजथे कैसल में रहने लगे. बाथरी की हिंसक और क्रूर मानसिकता को समझते हुए उसके पति ने महल के अंदर एक गुप्त यातना कक्ष बनवाया था. बाथरी अपनी नौकरानियों को तड़पाने के लिए बेहद घिनौने तरीके अपनाती थी. वह लड़कियों की उंगलियों के नाखूनों में नुकीली सुइयां चुभो देती थी. इतना ही नहीं, वह असहाय पीड़ितों को बांधकर उनके नग्न शरीर पर शहद का लेप लगा देती थी और फिर उन्हें जहरीली मधुमक्खियों और भूखी चींटियों के बीच तड़प-तड़पकर मरने के लिए छोड़ देती थी.
पति के निधन के बाद बढ़ा नरसंहार और घिनौनापन
1600 के शुरुआती दशक में जब बाथरी के पति की मृत्यु हो गई, तो उसकी हैवानियत का कोई अंत नहीं रहा. उसने अपनी सहायिकाओं इलोना और डोरोत्ता के साथ मिलकर आसपास के गांवों से सीधी-सादी लड़कियों को अगवा करना शुरू कर दिया. यातनाएं देने की सीमा इतनी बढ़ गई थी कि बाथरी पीड़ितों के शरीर के अंग काट देती थी. एक प्रसंग के अनुसार, उसने एक लाचार लड़की को उसी के शरीर का मांस पकाकर खाने पर मजबूर कर दिया था. इसके अलावा, वह खुद भी अपनी पीड़ितों के मांस को पकाकर खाने जैसी विकृत मानसिकता का प्रदर्शन करती थी.
क्या वाकई कुंवारी लड़कियों के खून से नहाती थी रानी?
एलिजाबेथ बाथरी से जुड़ी सबसे चर्चित किंवदंती यह है कि वह हमेशा जवान और सुंदर दिखने के लिए कुंवारी लड़कियों के खून से स्नान करती थी. माना जाता था कि युवा खून उसकी बढ़ती उम्र को रोक सकता है. इसी वजह से लोककथाओं में उसे ब्लड काउंटेस कहा गया और बाद में उसकी तुलना काल्पनिक वैम्पायर किरदारों से होने लगी. हालांकि, आधुनिक इतिहासकार इस बात पर जोर देते हैं कि खून से नहाने का कोई ठोस लिखित दस्तावेज या सबूत नहीं मिलता है. यह कहानी उसकी वास्तविक क्रूरताओं के आधार पर बाद में रची गई एक लोकप्रिय अफवाह मानी जाती है.
जब अमीर घरानों की बेटियों पर डाला हाथ
बाथरी का यह खूनी खेल सालों तक इसलिए बेरोकटोक चलता रहा क्योंकि स्थानीय प्रशासन उसके रसूखदार परिवार के दबाव में था।. लेकिन जब उसकी शिकार केवल गरीब किसानों की बेटियां न रहकर, स्थानीय अमीर और कुलीन परिवारों की लड़कियां भी बनने लगीं, तब हंगामा मच गया. असरदार सरदारों के दबाव में आकर राजा मैथियस को सख्त कदम उठाने पड़े. जनवरी 1611 में बाथरी और उसके साथियों पर आधिकारिक मुकदमा चलाया गया, जिसमें उस पर लगभग 80 लड़कियों की बर्बर हत्या करने का संगीन आरोप साबित हुआ.

महल के अंधेरे कमरे में कैद और अंत
अदालत ने बाथरी के सहयोगियों को तो मौत की सजा सुनाई, लेकिन उसके शाही खून और ऊंचे राजनैतिक संबंधों को देखते हुए उसे मृत्युदंड नहीं दिया गया. इसके बजाय, सजा के तौर पर उसे उसी के सेजथे कैसल के एक छोटे से बिना खिड़की वाले कमरे में जीवनभर के लिए चुनवा दिया गया. उस कमरे में सांस लेने के लिए सिर्फ एक छोटा सा छेद छोड़ा गया था, जिससे उसे खाना दिया जाता था. इस भयानक एकांत कारावास के तीन साल बाद, अगस्त 1614 में खूनी काउंटेस एलिजाबेथ बाथरी उसी अंधेरे कमरे में मृत पाई गई.
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