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कतर, यूएई, सऊदी अरब...मुस्लिम देशों के ये हैं कट्टर दुश्मन, जानिए जंग हुई तो किसका पलड़ा रहेगा भारी?

मिडिल ईस्ट पिछले कुछ समय से काफी अशांत है. ईरान और इजरायल की जंग ने फिर से इसमें चिंगारी फूंक दी है. चलिए, आपको कतर, यूएई, सऊदी अरब के बारे में बताते हैं कि कौन किसपर भारी है.

मिडिल ईस्ट में जीओ पालिटिक्स काफी तेजी से बदल रही है. ईरान और इजरायल के बीच हुए युद्ध के बाद बाकी मुस्लिम देश भी खुद को तैयार कर रहे हैं. मध्य पूर्व की राजनीति में कतर, यूएई और सऊदी अरब तीन ताकतवर मुस्लिम देश हैं, लेकिन इनके रिश्तों में गहरी दरार और अविश्वास की परतें हैं जो समय-समय पर उभरती रहती हैं.  2017 में जब सऊदी अरब, यूएई और कुछ अन्य अरब देशों ने मिलकर कतर पर आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंध लगाए थे तो यह दुश्मनी दुनिया के सामने पूरी तरह उजागर हो गई थी. वजह थी कतर का ईरान के करीब होना और उस पर आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप. चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं कि अगर इनके बीच जंग हुई तो किसका पलड़ा भारी रहेगा. 

कतर से दुश्मनी

सऊदी अरब, यूएई और कुछ अन्य अरब देशों ने प्रतिबंध के बाद 2021 में इन देशों ने सुलह कर ली, लेकिन अंदरूनी तनाव और सामरिक होड़ आज भी जिंदा है. सऊदी अरब अपने विशाल सैन्य बल और भारी बजट के चलते क्षेत्र में दबदबा रखता है, उसके पास अमेरिकी हथियारों का बड़ा जखीरा और बड़ी जनशक्ति है, लेकिन यमन जैसे युद्धों में उसका प्रदर्शन कमजोर रहा है. वहीं यूएई को ‘लिटिल स्पार्टा’ कहा जाता है, क्योंकि उसकी सेनाएं भले छोटी हैं, लेकिन अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी, ड्रोन, साइबर क्षमता और प्रोफेशनल ट्रेनिंग में आगे हैं. कतर सबसे छोटा है लेकिन उसकी ताकत है अमेरिका से मिली सैन्य साझेदारी और अल-उदीद एयरबेस, जो अमेरिकी सेनाओं का बड़ा ठिकाना है.

कौन पड़ेगा किसपे भारी

हाल ही में कतर को अमेरिका से MQ-9B जैसे उन्नत ड्रोन मिले हैं, जो यूएई को नहीं दिए गए, इससे साफ है कि तकनीकी मोर्चे पर कतर को प्राथमिकता मिल रही है. अगर इन तीनों के बीच जंग होती है तो सऊदी संख्या में भारी रहेगा, यूएई रणनीति और आधुनिकता में बाजी मार सकता है और कतर अमेरिकी सहयोग के दम पर टिका रह सकता है. लेकिन किसी भी जंग का फैसला सिर्फ हथियार नहीं करते, बल्कि गठबंधन, भू-राजनीति और कूटनीति की चालें उसे तय करती हैं, और फिलहाल इन तीनों देशों में भरोसे की कमी ही सबसे बड़ा खतरा है, जो कभी भी चिंगारी बनकर पूरे खाड़ी क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकता है. 

हालांकि, इसकी उम्मीद कम है कि ये तीन देश आपस में लड़े क्योंकि तीनों की अर्थव्यवस्था तेजी से ग्रो कर रही है, अगर ये जंग की स्थिति में जाते हैं तो इससे इनकी अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा. ईरान पर जंग का प्रभाव इस लिए ज्यादा नहीं पड़ा क्योंकि उसके ऊपर पहले से ही कई अमेरकी प्रतिबंध लगे हुए हैं.

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