महिला कोटे की नौकरी और बाद में कर लें जेंडर चेंज, क्या चली जाएगी नौकरी?
महिला कोटे से मिली नौकरी और बाद में कराया जेंडर चेंज, पिंपरी-चिंचवड़ के इस हैरान करने वाले केस के बीच जानिए क्या कहता है हमारा कानून और क्या चली जाएगी नौकरी.

महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस प्रशासन से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा में है. यहां एक महिला पुलिस कर्मचारी का बीड से पिंपरी-चिंचवड़ ट्रांसफर हुआ था, जिसके बाद उन्होंने जरूरी सरकारी अनुमति लेकर जेंडर री-असाइनमेंट सर्जरी करवाई और अपना सर्विस रिकॉर्ड में जेंडर महिला से पुरुष कराने के लिए आवेदन दिया. चूंकि इस कर्मचारी की भर्ती महिला के तौर पर हुई थी, इसलिए अब सवाल उठ रहा है कि क्या भर्ती के समय मिले आरक्षण या अन्य नियमों को देखते हुए इनकी नौकरी पर कोई असर पड़ेगा.
क्यों उठ रहा है यह सवाल?
दरअसल, सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण और कई सुविधाएं तय होती हैं, जो भर्ती प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवार के जेंडर के आधार पर तय होती हैं. ऐसे में अगर कोई कर्मचारी नौकरी में आने के बाद अपना जेंडर बदलता है, तो विभाग के सामने यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि उस कर्मचारी को आगे किस श्रेणी में रखा जाए, और भर्ती के वक्त मिले फायदे जारी रहेंगे या नहीं. पिंपरी-चिंचवड़ के मौजूदा मामले में भी विभाग के सामने यही असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
कानूनी तौर पर क्या है स्थिति?
देश में ट्रांसजेंडर पर्सन्स एक्ट के तहत किसी व्यक्ति को अपनी लिंग पहचान बताने और बदलने का अधिकार दिया गया है, लेकिन नौकरी में भर्ती के समय मिले आरक्षण या लाभ का जेंडर बदलने के बाद क्या होगा, इस पर कानून में सीधा और स्पष्ट प्रावधान नहीं है. यही वजह है कि ज्यादातर मामलों में विभागों को अदालत या सरकार के स्तर पर अलग से फैसला लेना पड़ता है. सुप्रीम कोर्ट में भी हाल ही में ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों की सरकारी भर्ती से जुड़े मामलों पर सुनवाई चल रही है, जिसमें यह सवाल उठाया गया है कि पुरुष और महिला जैसी सीमित श्रेणियों में बंटी भर्ती प्रक्रिया ट्रांसजेंडर या जेंडर बदलने वाले कर्मचारियों के लिए कितनी व्यावहारिक है.
नौकरी जाने की आशंका कितनी सही
विशेषज्ञों के मुताबिक, सामान्य तौर पर सिर्फ जेंडर बदलने की वजह से किसी कर्मचारी की नौकरी सीधे नहीं जाती, क्योंकि नियुक्ति के समय व्यक्ति ने सभी पात्रता शर्तें पूरी की होती हैं. हालांकि, महिला आरक्षण के तहत मिली सीट, प्रमोशन में मिलने वाला लाभ या महिला संवर्ग से जुड़ी अन्य सुविधाएं आगे मिलती रहेंगी या नहीं, यह हर विभाग अपने नियमों और सरकार के दिशा-निर्देशों के आधार पर तय करता है.
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पिंपरी-चिंचवड़ मामले में पुलिस प्रशासन का रुख
पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस में तैनात इन दोनों महिला कांस्टेबलों के परिवारों ने शुरुआत में इस शादी का काफी विरोध किया और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायत भी पहुंचाई थी. हालांकि, पुलिस प्रशासन ने बेहद परिपक्व रुख अपनाते हुए साफ कर दिया कि चूंकि दोनों कर्मचारी बालिग हैं और आपसी सहमति से अपने निजी जीवन का फैसला ले रही हैं, इसलिए विभाग उनकी शादी या इलाज की प्रक्रिया में कोई दखल नहीं देगा.
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