गेहूं की बुवाई से पहले किसान जरूर करें ये काम, वरना होगा नुकसान!
आप भी धान की कटाई के बाद गेंहूं की बुवाई में जल्दबाजी करते हैं तो ये गलती आपको भारी पड़ सकती है. किसानों को बुवाई से पहले खेत की जांच करनी चाहिए. यहां जानें गेहूं की बुवाई से पहले खेत कैसे तैयार करें.

Gehun Ki Buwai: देश के कई हिस्सों में इस समय किसान धान की कटाई कर रहे हैं. इसके साथ ही वे अगली फसल की तैयारी भी शुरू कर रहे हैं. धान के बाद ज्यादातर किसान गेंहू की बुवाई करके अच्छी पैदावार लेने की सोच रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं, धान की कटाई के तुरंत बाद गेहूं बोना आपकी मेहनत पर पानी फेर सकता है?
दरअसल, धान की कटाई के बाद कई खेतों में जरूरत से ज्यादा नमी रह जाती है, जिससे गेहूं के बीज ठीक से नहीं उग पाते. ऐसे में किसानों को बुवाई से पहले खेत की सही तैयारी कर लेने चाहिए. इसी कड़ी में आइए जानते हैं कि, धान की कटाई के कितने दिन बाद गेहूं बोना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
धान की कटाई के बाद खेत को क्यों दें आराम?
धान की खेती में खेत में काफी पानी रहता है. ऐसे में कटाई के बाद भी मिट्टी में जरूरत से ज्यादा नमी हो सकती है. अगर किसान इसी गीली मिट्टी में गेहूं या दूसरी रबी फसल के बीज डाल देते हैं, तो बीजों के सड़ने और ठीक से अंकुरित नहीं होने का खतरा रहता है. इसलिए धान की कटाई के बाद खेत की हालत देखकर ही अगली फसल की बुवाई करनी चाहिए.
5 से 7 दिन तक खुला छोड़ें खेत
धान की कटाई के बाद ज्यादा गीले खेत को करीब 5 से 7 दिन तक खुला छोड़ना फायदेमंद हो सकता है. इससे मिट्टी में हवा पहुंचेगी और अतिरिक्त पानी सूख जाएगा. हालांकि, अगर खेत पहले से सूखा है, तो इतने दिन इंतजार करना जरूरी नहीं है. खेत की मिट्टी जब भुरभुरी हो जाए और उसमें पानी जमा न हो, तब अगली फसल की तैयारी शुरू करें.
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बुवाई के समय कितनी होनी चाहिए नमी?
रबी की फसलों के बीज उगने के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी (10 से 25 फीसदी) होना जरूरी है. हालांकि, हर खेत की मिट्टी अलग होती है. इसलिए सिर्फ नमी का प्रतिशत देखकर बुवाई न करें. मिट्टी में इतनी नमी होनी चाहिए कि बीज आसानी से अंकुरित हो सकें, लेकिन पानी ज्यादा न हो.
जुताई और खेत को समतल करना जरूरी
धान की कटाई के बाद खेत की जरूरत के हिसाब से जुताई करें. बड़े ढेलों को तोड़कर मिट्टी भुरभुरी बनाएं और खेत को समतल कर लें. इससे बीज एक जैसी गहराई पर बोए जा सकेंगे और सिंचाई का पानी भी खेत में बराबर पहुंचेगा. जहां हो पाए, किसान कम जुताई वाली तकनीक से भी गेहूं की बुवाई कर सकते हैं.
गेहूं की बुवाई कब करें?
उत्तर भारत के कई सिंचित इलाकों में गेहूं की समय पर बुवाई के लिए नवंबर का पहला पखवाड़ा अच्छा माना जाता है. हालांकि, सही समय इलाके, मौसम और गेहूं की किस्म पर निर्भर करता है. इसलिए स्थानीय कृषि विभाग की सलाह के मुताबिक बुवाई करें.
ज्यादा यूरिया डालने से बचें किसान
इसके साथ ही किसानों को जरूरत से ज्यादा खाद नहीं डालनी चाहिए. मिट्टी की जांच कराकर ही खाद का इस्तेमाल करें. इससे फसल को सही पोषण मिलेगा, खाद पर बेवजह खर्च नहीं होगा और मिट्टी की सेहत भी बनी रहेगी.
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