एक्सप्लोरर

इस शहर में मरना है कानूनी अपराध, आखिरी सांस लेने से पहले ही लोगों को खदेड़ देता है प्रशासन

दुनिया के एक देश में मरने पर कानूनी पाबंदी है. विज्ञान के एक खौफनाक राज और सदियों पुरानी महामारी के वायरस को जिंदा रखने वाली बर्फ के कारण यहां लाशें दफनाना बैन है, आइए उसके बारे में जानें.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • नॉर्वे के स्वालबार्ड में मौत पर है रोक.
  • कड़ी ठंड से शव रहते हैं ममी जैसे.
  • वायरस फैलने के डर से बाहर भेजा जाता.
  • 1950 से लागू है यह अनोखा नियम.

दुनिया का नियम है कि जिसने जन्म लिया है, उसकी मौत तय है. लेकिन इस धरती पर एक ऐसा अनोखा शहर भी है जहां मौत की दस्तक पर ही कानूनन ताला लगा दिया गया है. हम बात कर रहे हैं उत्तरी ध्रुव के पास बसे बेहद ठंडे इलाके की, जहां यमराज के आने से पहले ही इंसान को शहर की सरहद से बाहर खदेड़ दिया जाता है. इस जगह पर अगर कोई बीमार या बूढ़ा हो जाए, तो प्रशासन उसे तुरंत हवाई जहाज में बिठाकर विदा कर देता है. आखिर मौत को अपराध बनाने के पीछे कौन सा वैज्ञानिक खौफ छिपा है, आइए जानते हैं. 

नार्वे का वह अनोखा शहर 

कुदरत के सबसे अटल नियम को चुनौती देने वाला यह अनोखा शहर आर्कटिक महासागर के पास बसे नार्वे देश का एक छोटा सा द्वीप है. इस बर्फीले द्वीप का नाम 'स्वालबार्ड' है और इसकी राजधानी का नाम 'लॉन्गइयरब्येन' है. उत्तरी ध्रुव के बेहद नजदीक होने के कारण यह पूरी दुनिया के सबसे ठंडे रिहायशी इलाकों में गिना जाता है. इसी जगह पर पिछले 70 सालों से इंसानों के मरने और उन्हें दफनाने पर मुकम्मल सरकारी पाबंदी लागू है.

अंधविश्वास नहीं, वैज्ञानिक कारण 

सुनने में यह कानून भले ही किसी तानाशाही शासन का अजीबोगरीब फरमान या कोई पुराना अंधविश्वास लग सकता है, लेकिन इसके पीछे पूरी तरह से विज्ञान का एक बड़ा और खौफनाक सच काम कर रहा है. प्रशासन की इस कड़ाई के पीछे इंसानी वजूद को बचाने की एक बेहद जरूरी कोशिश छिपी है. अगर इस नियम को जरा सा भी ढीला छोड़ दिया जाए, तो पूरी दुनिया के सामने एक भयानक संकट खड़ा हो सकता है.

यह भी पढ़ें: Indian Currency Value: नॉर्वे में कितने हो जाते हैं भारत के 10000 रुपये, इससे यहां क्या-क्या खरीद सकते हैं?

जमीन, जो कभी पिघलती नहीं 

लॉन्गइयरब्येन में कड़ाके की ठंड पड़ती है और सर्दियों के मौसम में यहां का तापमान गिरकर माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इतनी भीषण ठंड की वजह से इस पूरे शहर की जमीन हमेशा बर्फ की एक मोटी और बेहद सख्त परत से ढकी रहती है. विज्ञान की दुनिया में इस तरह हमेशा जमी रहने वाली मिट्टी और बर्फ की परत को 'परमाफ्रॉस्ट' के नाम से पुकारा जाता है.

कब्रिस्तान की लाशें बनीं ममी 

इस अजीब कानून की शुरुआत साल 1950 के दशक के आस-पास हुई थी. उस दौरान यहां रिसर्च कर रहे वैज्ञानिकों ने कब्रिस्तान का मुआयना करते हुए एक बेहद चौंकाने वाली बात देखी. उन्होंने पाया कि कड़ाके की ठंड की वजह से कई साल पहले दफनाए गए इंसानी शव वैसे के वैसे ही सुरक्षित पड़े थे. वे कुदरती रूप से ममी बन चुके थे और मिट्टी में गल या सड़ नहीं रहे थे.

स्पैनिश फ्लू का बड़ा खतरा 

वैज्ञानिकों की चिंता तब और ज्यादा बढ़ गई जब उन्हें पता चला कि साल 1918 में दुनिया भर में तबाही मचाने वाली महामारी स्पैनिश फ्लू के शिकार जो लोग यहां दफनाए गए थे, उनके शवों के भीतर वह घातक वायरस आज भी पूरी तरह से जिंदा और एक्टिव हालत में मौजूद था. इस बात के सामने आते ही प्रशासन और दुनिया भर के विशेषज्ञों के होश उड़ गए. 

टाइम बम बन चुका कब्रिस्तान 

रिसर्च में यह साफ हो गया कि अगर ग्लोबल वार्मिंग यानी वैश्विक तापमान बढ़ने की वजह से यह परमाफ्रॉस्ट की बर्फ कभी पिघल गई, तो इन लाशों में बंद सदियों पुराने जानलेवा वायरस और बैक्टीरिया दोबारा हवा में फैल जाएंगे. इससे पूरी दुनिया में एक ऐसी भयानक महामारी फैल सकती है जिसका आज के विज्ञान के पास कोई इलाज नहीं होगा. एक तरह से यह कब्रिस्तान पूरी मानव जाति के लिए टाइम बम बन गया था.

यमराज से पहले आती है फ्लाइट 

इस जानलेवा खतरे से अपने नागरिकों और दुनिया को बचाने के लिए स्थानीय प्रशासन ने साल 1950 में यहां मरने पर पूरी तरह रोक लगा दी. तब से लेकर आज तक इस कानून का कड़ाई से पालन हो रहा है. जब भी कोई व्यक्ति यहां गंभीर रूप से बीमार होता है या अपनी उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंचता है, तो उसे तुरंत हवाई जहाज या पानी के जहाज से नार्वे के मुख्य हिस्से (मेनलैंड) भेज दिया जाता है ताकि वह वहां अंतिम सांस ले सके.

यह भी पढ़ें: न्यूक्लियर प्लांट को ही क्यों टारगेट करते हैं दुश्मन देश, जानें इस पर हमला क्यों समझा जाता है जंग के मैदान में जीत?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

Bakrid 2026: बकरीद के लिए इस नस्ल के बकरे हैं सबसे अच्छे, जमकर खरीद रहे लोग
बकरीद के लिए इस नस्ल के बकरे हैं सबसे अच्छे, जमकर खरीद रहे लोग
Bakrid 2026: बकरीद पर क्यों होती है खस्सी बकरे की डिमांड, नॉर्मल से कितने होते हैं अलग?
बकरीद पर क्यों होती है खस्सी बकरे की डिमांड, नॉर्मल से कितने होते हैं अलग?
Home Generated Electricity: घर में कैसे बना सकते हैं पानी से बिजली, क्या इससे पूरी की जा सकती है हर जरूरत?
घर में कैसे बना सकते हैं पानी से बिजली, क्या इससे पूरी की जा सकती है हर जरूरत?
History of Indian Rupee: डॉलर से कितना पुराना है भारत का रुपया, जान लें इसका पूरा इतिहास
डॉलर से कितना पुराना है भारत का रुपया, जान लें इसका पूरा इतिहास
Advertisement

वीडियोज

Kedarnath Yatra 2026 :धाम में भारी अव्यवस्था! VIP कल्चर के चक्कर में आम भक्तों का फूटा गुस्सा!
Sansani | Crime News: ट्विशा की आखिरी रात का रहस्य ! | Twisha Sharma Case
Janhit | Twisha Murder Case: दिसंबर में शगुन के गीत, मई में राम नाम सत्य! | Bhopal News | ABP News
Bomb Attack In Pakistan's Balochistan: बलूचिस्तान में विद्रोह की नई पिक्चर रिलीज! | Pakistan
ABP Report | Iran US War: क्या अपना यूरेनियम अमेरिका को नहीं देगा ईरान? | Iran-US War Update
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement
Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
Weather Update: भीषण लू की चेतावनी के बीच आज कहां होगी बारिश? दिल्ली-यूपी-बिहार से राजस्थान तक का मौसम जानें
भीषण लू की चेतावनी के बीच आज कहां होगी बारिश? दिल्ली-यूपी-बिहार से राजस्थान तक का मौसम जानें
भीषण गर्मी से धधक रहा यूपी! वाराणसी-प्रयागराज समेत 10 जिलों में लू का रेड अलर्ट, इन जिलों में होगी बारिश
भीषण गर्मी से धधक रहा यूपी! वाराणसी-प्रयागराज समेत 10 जिलों में लू का रेड अलर्ट, इन जिलों में होगी बारिश
IPL 2026: रिंकू सिंह से सूर्यकूमार यादव तक बन सकते हैं नए कप्तान, अगले सीजन कई फ्रेंचाइजी इन्हें सौंप सकती है टीम की कमान
IPL 2026: रिंकू सिंह से सूर्यकूमार यादव तक बन सकते हैं नए कप्तान, अगले सीजन कई फ्रेंचाइजी इन्हें सौंप सकती है टीम की कमान
चौथी बार पढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, दिल्ली में 100 के पार तो मुंबई में 111, जानें कहां कितनी हुई कीमत
चौथी बार पढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, दिल्ली में 100 के पार तो मुंबई में 111, जानें कहां कितनी हुई कीमत
जयपुर: बच्चों के सामने पत्नी की पिटाई, मुंह पर थूकता दिखा पति, अनु मीणा सुसाइड केस में CCTV से खुले राज
जयपुर: बच्चों के सामने पत्नी की पिटाई, मुंह पर थूकता दिखा पति, अनु मीणा सुसाइड केस में CCTV से खुले राज
Drishyam 3 Vs Karuppu Box office: 50 करोड़ के पार हुई 'दृश्यम 3', सूर्या की 'करुप्पू' का ऐसा है हाल, जानें संडे की कमाई
बॉक्स ऑफिस: 50 करोड़ के पार हुई 'दृश्यम 3', सूर्या की 'करुप्पू' का ऐसा है हाल, जानें संडे की कमाई
Bakrid 2026: बकरीद के लिए इस नस्ल के बकरे हैं सबसे अच्छे, जमकर खरीद रहे लोग
बकरीद के लिए इस नस्ल के बकरे हैं सबसे अच्छे, जमकर खरीद रहे लोग
Dark Vs Light Mode: आंखों के लिए कौन-सा सही? यह बात जान ली तो सब पता चल जाएगा
Dark Vs Light Mode: आंखों के लिए कौन-सा सही? यह बात जान ली तो सब पता चल जाएगा
Embed widget