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Home Generated Electricity: घर में कैसे बना सकते हैं पानी से बिजली, क्या इससे पूरी की जा सकती है हर जरूरत?

Home Generated Electricity: घर पर बहते पानी या छत की टंकी में इन-लाइन टरबाइन लगाकर तकनीकी रूप से बिजली बनाई जा सकती है. आइए जानें कि यह तकनीक कितने काम की है.

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  • घरेलू जल विद्युत संयंत्र बड़े उपकरणों के लिए व्यावहारिक रूप से अव्यावहारिक है.

Home Generated Electricity: घरेलू स्तर पर ऊर्जा के नए विकल्पों को तलाशने की मुहिम में पानी से बिजली बनाने का विचार बेहद रोमांचक नजर आता है. वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुसार, पानी के बहाव या गतिज ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलना पूरी तरह से संभव है. इंटरनेट पर अक्सर ऐसे कई देसी जुगाड़ और वीडियो देखने को मिलते हैं, जो घर पर ही पानी की मदद से बल्ब जलाने का दावा करते हैं. हालांकि, प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके घर के भीतर तैयार होने वाली यह बिजली व्यावहारिक रूप से कितनी कारगर है और क्या यह आपके पूरे घर का भारी लोड अकेले संभाल सकती है, इसके पीछे के जमीनी सच और विज्ञान को गहराई से समझना बेहद जरूरी है. 

माइक्रो-हाइड्रो टरबाइन और बहता पानी

घर पर पानी से बिजली बनाने के लिए बहते हुए पानी या ऊंचाई से गिरते पानी की गतिज ऊर्जा की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. यदि किसी रिहायशी इलाके या घर के पास कोई छोटी नहर, झरना या बारहमासी बहती हुई प्राकृतिक धारा उपलब्ध हो, तो वहां 'माइक्रो-हाइड्रो टरबाइन' सिस्टम स्थापित किया जा सकता है. इस प्रणाली में पानी के तेज बहाव के बीच एक विशेष पंखा या टरबाइन रखा जाता है. पानी के टकराने से जब यह टरबाइन तेजी से घूमता है, तो यह अपने साथ जुड़े जनरेटर को सक्रिय कर देता है और यांत्रिक ऊर्जा को बिजली में बदल देता है. 

कंपनियों के देसी तकनीकी जुगाड़

आजकल सोशल मीडिया और इंटरनेट पर कई तकनीकी और रचनात्मक प्रयोग करने वाले प्लेटफॉर्म मौजूद हैं, जो बहुत ही कम खर्च में घर पर बिजली बनाने का तरीका सिखाते हैं. इन घरेलू प्रोजेक्ट्स में आमतौर पर एक छोटी डीसी मोटर, प्लास्टिक के पंखों और पीवीसी पाइपों का इस्तेमाल करके एक छोटा सा टरबाइन मॉडल तैयार किया जाता है. जब इस हाथ से बने टरबाइन पर तेज धार से पानी डाला जाता है, तो मोटर घूमने लगती है और उससे उत्पन्न होने वाली बिजली से छोटे एलईडी बल्ब या मोबाइल चार्जर आसानी से काम करने लगते हैं.

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छत की पानी टंकी से कैसे काम करेगी टरबाइन?

शहरी घरों में बिजली पैदा करने का एक और व्यावहारिक तरीका छत पर रखी पानी की टंकी का उपयोग करना है. इसके लिए टंकी से नीचे आने वाले मुख्य सप्लाई पाइप के बीच में एक छोटा 'इन-लाइन वॉटर टरबाइन' फिट किया जाता है. जब भी घर के भीतर कोई व्यक्ति नहाने या बर्तन धोने के लिए नल खोलता है, तो पाइप से गुजरने वाला पानी टरबाइन के ब्लेड्स को घुमाता है. इस प्रक्रिया से पैदा होने वाली ऊर्जा से 12 वोल्ट की छोटी बैटरियां चार्ज की जा सकती हैं, जो आपातकालीन लाइट जलाने में काम आती हैं.

बेहद सीमित होती है यह बिजली

सरकार देश में रिन्यूएबल एनर्जी यानी नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन घरेलू हाइड्रो प्रोजेक्ट्स की अपनी कुछ कड़ी सीमाएं हैं. पानी की टंकी से उत्पन्न होने वाली बिजली की मात्रा बेहद सीमित होती है. यह बिजली पूरे घर के बड़े और भारी उपकरण जैसे फ्रिज, एसी या वाशिंग मशीन चलाने के लिए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं होती. घरेलू पाइप का पानी केवल कुछ ही सेकंड या मिनट के लिए बहता है, जिससे लगातार बिजली मिलना नामुमकिन है. 

खारे पानी से बिजली बनाने का तरीका

पानी से बिजली बनाने का एक और वैज्ञानिक तरीका साल्ट वॉटर यानी खारे पानी का प्रयोग करना है. चूंकि नमक का पानी विद्युत का एक बेहतरीन सुचालक होता है, इसलिए तांबे (कॉपर) और जस्ते (जिंक) की छड़ों को नमक के घोल में डुबोकर एक बुनियादी रासायनिक सेल या साल्ट वॉटर बैटरी तैयार की जा सकती है. विज्ञान के प्रयोगों के लिहाज से यह तरीका बेहद शिक्षाप्रद और दिलचस्प है, लेकिन इससे उत्पन्न होने वाला वोल्टेज इतना कम होता है कि यह केवल एक छोटी सी एलईडी लाइट चमकाने या स्कूली प्रोजेक्ट्स तक ही सीमित रह जाता है. 

घर पर बिजली बनाने के लिए आवश्यक उपकरण और लागत

यदि कोई व्यक्ति अपने घर पर इस तरह का छोटा जल विद्युत प्लांट लगाना चाहता है, तो उसे कुछ बुनियादी उपकरणों की आवश्यकता होगी. इसमें पानी की गति को घुमावदार ऊर्जा में बदलने के लिए एक टरबाइन, उस ऊर्जा को बिजली में बदलने के लिए डीसी मोटर या जनरेटर, वोल्टेज मापने के लिए एक मल्टीमीटर और पैदा हुई बिजली को सुरक्षित रखने के लिए बैटरी तथा इन्वर्टर शामिल हैं. हालांकि, पूरे घर की जरूरतों को पूरा करने के मामले में यह सिस्टम सौर ऊर्जा यानी सोलर पैनल के मुकाबले काफी कमजोर और अव्यावहारिक साबित होता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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