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IAS IPS Posting: किसी IAS और IPS ऑफिसर को कहां पोस्टिंग मिलेगी, कैसे तय होता है कैडर सिस्टम?

IAS IPS Posting: किसी भी आईएएस या आईपीएस अधिकारी की पोस्टिंग और कैडर का तय होना उनकी यूपीएससी रैंक, पसंद और राज्यों में वैकेंसी पर निर्भर होती है. आइए जानते हैं पूरी प्रक्रिया.

IAS IPS Posting: हाल ही में केंद्र सरकार ने तीनों ऑल इंडिया सर्विसेज के लिए एक नई केडर एलोकेशन पॉलिसी को शुरू किया है. इससे ऑफिसर्स को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कैसे असाइन किया जाता है इसमें कुछ जरूरी बदलाव आए हैं. यह पॉलिसी आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों पर लागू होती है. इसी बीच आइए जानते हैं कि कैसे तय होता है ऑफिसर्स का कैडर सिस्टम.

कैडर एलोकेशन की बेसिक बातें

एक आईएएस या फिर आईपीएस ऑफिसर का कैडर मुख्य रूप से तीन बातों से तय होता है. यूपीएससी रैंक, कैंडिडेट की पसंद और अलग-अलग राज्यों में वैकेंसी की उपलब्धता. केंद्र ऑफिसर्स को यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन के जरिए भर्ती करता है और उन्हें उन राज्य कैडर में एलोकेट किया जाता है जहां वे अपने करियर का ज्यादातर समय बिताते हैं. नई पॉलिसी के तहत वैकेंसी की गिनती संबंधित साल की 1 जनवरी से की जाती है. इसमें राज्यों में कैडर वाइज जरूरत को ध्यान में रखा जाता है.

नया कैडर ग्रुपिंग सिस्टम 

सबसे बड़े बदलाव में से एक है पहले के 5 जोन सिस्टम की जगह अल्फाबेटिकल ग्रुपिंग सिस्टम लाना. भारत के 25 कैडर अब चार ग्रुप में बंटे हुए हैं. ग्रुप 1 में अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम, यूनियन टेरिटरीज, आंध्र प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार और छत्तीसगढ़ शामिल हैं. ग्रुप 2 में गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल और मध्य प्रदेश शामिल हैं. ग्रुप 3 में महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम और तमिलनाडु शामिल हैं. ग्रुप 4 में तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं.

प्रेफरेंस और साइकिल बेस्ड एलोकेशन 

कैंडिडेट्स को पहले अपना पसंदीदा ग्रुप बताना होगा और फिर उसके बाद उस ग्रुप में अपने पसंदीदा राज्यों को क्रम से लिस्ट करना होगा. एलोकेशन एक साइकिल सिस्टम का इस्तेमाल करके किया जाता है, जहां पर रैंक 25 के बैच में देखे जाते हैं. जैसे रैंक 1-25, 26-50, आदि. हर साइकिल में एक समय में सिर्फ एक ऑफिसर को एक खास कैडर में एलोकेशन किया जाता है. इससे यह पक्का होता है कि कोई एक राज्य टॉप रैंक पर मोनोपॉली ना करे और टैलेंट पूरे देश में बराबर बंटे.

इनसाइडर आउटसाइडर रूल 

न्यूट्रैलिटी और नेशनल इंटीग्रेशन को बनाए रखने के लिए कैडर सिस्टम 33:66 इनसाइडर आउटसाइडर रूल को फॉलो करता है.  यानी कि एक स्टेट कैडर में लगभग एक तिहाई सीट उस स्टेट के कैंडिडेट्स के लिए रिजर्व होती हैं, जबकि बाकी दो तिहाई दूसरे स्टेटस के कैंडिडेट्स को मिलती हैं. होम स्टेट कैडर मिलना मुमकिन है लेकिन सिर्फ तभी जब कैंडिडेट की रैंक काफी ऊंची हो और वह अपने होम स्टेट को टॉप प्रेफरेंस दे.

कैडर एलोकेशन को कौन कंट्रोल करता है 

इसकी फाइनल अथॉरिटी सेंट्रल मिनिस्ट्रीज के पास होती है. आईएएस ऑफिसर्स के लिए कैडर डिपार्मेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग द्वारा एलोकेशन किया जाता है. आईपीएस अधिकारियों के लिए जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की होती है.

वैसे तो केंद्र कैडर को तय करता है लेकिन राज्य के अंदर पोस्टिंग जैसे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, पुलिस सुपरिटेंडेंट या दूसरी भूमिकाएं संबंधित राज्य सरकारी संभालती हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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