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Central Schemes Rules: क्या केंद्र की योजनाओं को लागू करने से रोक सकती है राज्य सरकार, पश्चिम बंगाल में कौन-कौन सी स्कीम नहीं चलती?

Central Schemes Rules: राज्य सरकार के पास केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करने या ना करने का पूरा हक होता है. आइए जानते हैं कि इसके लिए क्या नियम हैं.

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  • केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य लागू करने में देरी कर सकते हैं।
  • पश्चिम बंगाल ने आयुष्मान भारत की जगह स्वास्थ्य साथी योजना चलाई।
  • पीएम किसान योजना लागू होने में पश्चिम बंगाल को हुई देरी।
  • MGNREGA की फंडिंग रोकी गई, पीएम आवास की ब्रांडिंग पर मतभेद।

Central Schemes Rules: केंद्र सरकार समय-समय पर देश में नई योजनाएं लागू करती रहती है. लेकिन राज्य सरकार अपने इलाके में केंद्र की योजनाओं को लागू करने में देरी, या उन में बदलाव, या फिर उन्हें पूरी तरह से रोकने के लिए भी कदम उठा सकती है. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर राज्य सरकार को यह शक्ति कैसे मिलती है और क्या है इसके लिए नियम? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब और साथ ही यह भी कि पश्चिम बंगाल में केंद्र की कौन सी योजनाएं पूरी तरह से लागू नहीं हो पाई.

राज्य केंद्र की योजनाओं को कैसे प्रभावित कर सकते हैं? 

केंद्र की योजनाओं में केंद्र और राज्य दोनों फंडिंग में हिस्सा लेते हैं. यह फंडिंग 60:40 के अनुपात में होती है. हालांकि इन्हें लागू करने का काम ज्यादातर राज्य सरकार की मशीनरी ही संभालती है. इससे राज्यों को काफी ताकत मिल जाती है. वे लागू करने में देरी कर सकते हैं, ब्रांडिंग बदल सकते हैं या इसमें हिस्सा लेने से मना भी कर सकते हैं. 

संविधान के अनुच्छेद 256 और 257 के तहत राज्यों से यह उम्मीद की जाती है कि वे केंद्र के कानूनों का पालन सुनिश्चित करें. लेकिन अनुच्छेद 282 उन्हें अनुदान स्वीकार करने में अपनी समझ का इस्तेमाल करने की भी छूट देता है. अदालतें आमतौर पर राज्यों को योजनाओं को लागू करने के लिए मजबूर करने से बचती हैं.

आयुष्मान भारत की जगह राज्य की योजना 

इसका सबसे बड़ा उदाहरण आयुष्मान भारत है. यह केंद्र का एक बड़ा स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम है. पश्चिम बंगाल ने इसे लागू ना करने का फैसला किया है और इसके बजाय अपनी खुद की योजना स्वास्थ्य साथी चला रहा है. इसकी वजह उसने राज्य की प्राथमिकताओं के साथ बेहतर तालमेल बताया है.

पीएम किसान सम्मान निधि योजना में देरी

किसानों को आर्थिक मदद देने के मकसद से शुरू की गई पीएम किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi Yojana) को राज्य में लागू करने में काफी देरी का सामना करना पड़ा है. लाभार्थियों के डेटा के सत्यापन और प्रशासनिक तालमेल को लेकर हुए विवादों की वजह से इसे लागू करने की प्रक्रिया धीमी हो गई है.

MGNREGA की फंडिंग रोकी गई 

MGNREGA को लागू करने पर भी असर पड़ा है. केंद्र ने कथित अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन को वजह बताकर इसकी फंडिंग रोक दी है. इसका सीधा असर राज्य के ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों पर पड़ा है. 

इन सबके अलावा पीएम आवास योजना के तहत ब्रांडिंग को लेकर मतभेद सामने आए हैं. राज्य सरकार द्वारा इसका नाम बदलकर बांग्ला आवास योजना रखने के कदम से केंद्र के साथ टकराव पैदा हो गया है. इसका असर इसकी फंडिंग और इसे लागू करने की प्रक्रिया पर पड़ा है. 

दूसरी योजनाओं में रूकावटों का सामना 

कई दूसरी पहलों को भी रूकावटों का सामना करना पड़ा है. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना जैसे कार्यक्रमों का इंप्लीमेंटेशन सीमित रहा है. इसी के साथ कुछ में रुकावटें आई हैं.

यह भी पढ़ें: कांग्रेस को जिस 24 अकबर रोड मुख्यालय को खाली करने का मिला नोटिस, वहां जमीन की कीमत कितनी?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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