बीच समंदर में कैसे स्थिर रहता है इतना भारी जहाज, क्या शिप रुकने पर भी चालू रहता है इंजन?
पश्चिम एशिया के संघर्ष के बीच समुद्र में फंसे जहाजों की स्थिरता का विज्ञान काफी रोचक है. समंदर में खड़े जहाज का मुख्य इंजन भले ही बंद हो, लेकिन बिजली और नेविगेशन के लिए जनरेटर लगातार चलते रहते हैं.

ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक शिपिंग कारोबार की रफ्तार थाम दी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील इलाकों में जहाजों की आवाजाही बंद होने से फारस की खाड़ी में दर्जनों विशालकाय जहाज हफ्तों से एक ही जगह खड़े हैं. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि लहरों के बीच हजारों टन वजनी ये जहाज आखिर स्थिर कैसे रहते हैं? क्या इंजन बंद करने पर ये दिशा भटक नहीं जाते या फिर लंगर के भरोसे खड़ा रहना कंपनियों की जेब पर कितना भारी पड़ता है? आइए, समुद्री इंजीनियरिंग के इन दिलचस्प पहलुओं को करीब से समझते हैं.
क्या बीच समंदर में खड़े रहने पर भी चालू रहता है जहाज का इंजन?
किसी भी बड़े जहाज में आमतौर पर दो तरह के इंजन सिस्टम काम करते हैं. इसमें पहला मेन इंजन होता है, जिसका मुख्य काम जहाज को समुद्र में आगे बढ़ाना और गति देना है. जब जहाज को किसी एक जगह पर खड़ा करना होता है, तो इस मुख्य इंजन को बंद कर दिया जाता है. हालांकि, मुख्य इंजन बंद होने का मतलब यह कतई नहीं है कि जहाज पूरी तरह शांत हो गया है. जहाज के भीतर की व्यवस्थाओं को जीवित रखने के लिए ऑक्सिलरी इंजन या जनरेटर का चालू रहना अनिवार्य होता है.
क्यों चालू रहते हैं जनरेटर?
भले ही जहाज एक जगह खड़ा हो, लेकिन उसके भीतर बिजली, एयर कंडीशनिंग, नेविगेशन उपकरण और सुरक्षा प्रणालियों को चलाने के लिए ऊर्जा की निरंतर आवश्यकता होती है. इसके लिए जहाज के जनरेटर चौबीसों घंटे चलते रहते हैं. यदि ये जनरेटर बंद कर दिए जाएं, तो जहाज एक डेड शिप की तरह हो जाएगा, जिससे संचार और जरूरी डिवाइस काम करना बंद कर देंगे. यही कारण है कि बीच समंदर में खड़े जहाज से भी हमेशा इंजनों की गूंज सुनाई देती रहती है, जो असल में इन जनरेटरों की आवाज होती है.
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ईंधन की भारी खपत और आर्थिक घाटा
जहाज का खड़ा रहना शिपिंग कंपनियों के लिए किसी बड़ी आर्थिक चपत से कम नहीं है. भले ही मुख्य इंजन शांत हो, लेकिन चलते हुए जनरेटर हर रोज हजारों लीटर कीमती बंकर फ्यूल डकार जाते हैं. होर्मुज जैसे तनावपूर्ण इलाकों में जब जहाज हफ्तों तक फंसे रहते हैं, तो ईंधन का यह खर्च और कर्मचारियों का वेतन मिलकर करोड़ों का घाटा पैदा करता है. यही वजह है कि कंपनियां लंबे समय तक एंकरिंग करने के बजाय जल्द से जल्द सुरक्षित रास्तों से जहाज निकालने की कोशिश करती हैं.
बीच समंदर में कैसे रुका रहता है जहाज?
अब सवाल आता है कि समुद्र की ताकतवर लहरें इन जहाजों को बहाकर क्यों नहीं ले जातीं? इसके लिए जहाज में विशालकाय एंकर (लंगर) और लोहे की बेहद भारी-भरकम जंजीरों का इस्तेमाल किया जाता है. जब कैप्टन जहाज को रोकने का फैसला करता है, तो इन लंगरों को समुद्र की तलहटी में गिरा दिया जाता है. ये एंकर समुद्र के नीचे की मिट्टी या चट्टानों में मजबूती से धंस जाते हैं. एंकर के साथ लगी लोहे की जंजीर का अपना वजन भी इतना अधिक होता है कि वह जहाज को लहरों के थपेड़ों के बावजूद एक निश्चित दायरे में थामे रखती है.
लहरों के बीच स्थिरता की तकनीक
समुद्र की गहराई और लहरों की गति के हिसाब से लंगर की जंजीर की लंबाई तय की जाती है. यह जंजीर केवल जहाज को बांधती ही नहीं, बल्कि एक शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करती है, जिससे लहरों का दबाव सीधे जहाज के ढांचे पर नहीं पड़ता है. अगर समुद्र बहुत ज्यादा अशांत हो, तो कई बार जहाज को सुरक्षित रखने के लिए एंकर के साथ-साथ इंजन का हल्का इस्तेमाल भी करना पड़ सकता है, ताकि वह अपनी पोजीशन न खोए. इस तरह, इंजीनियरिंग और भारी धातुओं के तालमेल से ये तैरते हुए शहर समंदर के बीचों-बीच अडिग खड़े रहते हैं.
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