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Mohan Bhagwat: बीजेपी और आरएसएस में क्या है अंतर, भागवत ने कैसे समझाया इनके बीच का डिफरेंस?

Mohan Bhagwat: हाल ही में मोहन भागवत ने भाजपा और आरएसएस को लेकर एक बड़ी बात कही है. आइए जानते हैं क्या है दोनों के बीच अंतर और मोहन भागवत ने कैसे बताया डिफरेंस.

Mohan Bhagwat: भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच संबंध भारत में लंबे समय से राजनीतिक बहस और लोगों की जिज्ञासा का विषय रहा है. इस मुद्दे पर सीधे बात करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने  हाल ही में यह साफ किया है कि सिर्फ भाजपा की गतिविधियों के जरिए आरएसएस को समझने की कोशिश करना एक बड़ी गलती होगी. आइए जानते हैं कि आरएसएस और भाजपा कैसे अलग हैं.

आरएसएस और भाजपा के बीच अंतर 

मोहन भागवत ने इस बात पर जोर दिया है कि आरएसएस मुख्य रूप से एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है ना कि राजनीतिक. इसका मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना, चरित्र निर्माण करना और राष्ट्रीय सेवा के लिए समर्पित अनुशासित स्वयंसेवकों को तैयार करना है. आपको बता दें कि संघ खुद को अराजनीतिक बताता है जिसका मतलब है कि यह चुनाव नहीं लड़ता या फिर राजनीतिक सत्ता को हासिल करने की कोशिश नहीं करता. वहीं भारतीय जनता पार्टी एक राजनीतिक पार्टी है जिसकी मुख्य भूमिका चुनाव लड़ना, सरकार बनाना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए नीतियों को लागू करना है.

आरएसएस नहीं करता किसी को कंट्रोल 

मोहन भागवत ने साफ तौर से कहा है कि भाजपा, विश्व हिंदू परिषद और विद्या भारती जैसे समूह स्वतंत्र रूप से काम करते हैं. आरएसएस उन्हें किसी रिमोट कंट्रोल से नहीं चलाता है. हर संगठन का अपना नेतृत्व, फैसले लेने की प्रक्रिया और काम करने का तरीका होता है. अब भले ही वे सामान्य सांस्कृतिक मूल्य साझा करते हों. 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्वयंसेवकों को बनाने पर काफी ज्यादा ध्यान देता है. ये स्वयंसेवक अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और सेवा में प्रशिक्षित होते हैं.भागवत ने बताया कि हालांकि कई स्वयंसेवक बाद में राजनीति, शिक्षा या समाज सेवा में कैरियर चुनते हैं लेकिन आरएसएस यह तय नहीं करता कि उन्हें कहां या फिर कैसे काम करना चाहिए. अगर कोई भी स्वयंसेवक राजनीति में शामिल होता है तो यह उसका खुद का फैसला होता है ना कि संगठन का कोई आदेश या निर्देश. 

आरएसएस एक सामाजिक संगठन 

आरएसएस का गठन किसी भी राजनीतिक आंदोलन या फिर विद्रोह की प्रतिक्रिया में नहीं हुआ था. मोहन भागवत ने कहा कि इसका मिशन सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता को मजबूत करके इंडिया को भारत बनाए रखना है. दूसरी तरफ भाजपा राजनीतिक क्षेत्र में काम करती है. यहां चुनाव, गठबंधन, शासन और विपक्ष उसके कामकाज का हिस्सा हैं.

आरएसएस और भाजपा के बीच ऐतिहासिक संबंध 

ऐतिहासिक रूप से भाजपा की जड़ें भारतीय जनसंघ से जुड़ी हुई हैं, जिसकी स्थापना आरएसएस से मिली वैचारिक प्रेरणा से हुई थी. यही वजह है कि आरएसएस को अक्सर भाजपा का पैरेंट ऑर्गनाइजेशन बताया जाता है. हालांकि भागवत की बात से यह साफ होता है कि यह रिश्ता प्रशासनिक नहीं बल्कि वैचारिक है. इसी से पता चलता है कि भाजपा का अपना संविधान, संगठनात्मक ढांचा और आंतरिक लोकतंत्र है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कई बड़े भाजपा नेताओं ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत आरएसएस के स्वयंसेवक के तौर पर की थी. यह साझा पृष्ठभूमि अक्सर इस धारणा को बढ़ावा देती है कि दोनों संगठन एक ही हैं. 

असल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जमीन स्तर पर काम करता है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लंबे समय तक चलने वाले सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव पर ध्यान लगाता है. वहीं दूसरी तरफ भाजपा राजनीतिक व्यवस्था के अंदर शासन करने और नीतियों को लागू करने के लिए काम करती है.

ये भी पढ़ें: वेनेजुएला से क्या-क्या मंगाता है भारत, जिसकी राजधानी पर एक साथ हुए कई मिसाइल अटैक

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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