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ईरान से जंग लड़ने के चक्कर में अमेरिका का कितना हुआ नुकसान? होश उड़ा देंगे आंकड़े

ईरान के साथ छिड़ी जंग अमेरिका के लिए आर्थिक और सैन्य रूप से बेहद महंगी साबित हुई है. इस संघर्ष में अमेरिकी सेना ने अपने अब तक के सबसे कीमती निगरानी ड्रोन, रडार सिस्टम समेत अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है.

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  • ईरान युद्ध ने अमेरिका के रक्षा बजट को भारी नुकसान पहुंचाया है.
  • अमेरिका ने इस युद्ध में अरबों डॉलर के सैन्य विमान और ड्रोन खो दिए.
  • ईरानी हमलों से रडार और डिफेंस सिस्टम तबाह हुए, सुरक्षा पर संकट.
  • युद्ध की लागत 200 बिलियन डॉलर के पार, तेल कीमतों में वृद्धि.

आधुनिक युद्धों में जीत और हार का फैसला अब सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि रक्षा बजट के भारी-भरकम बिलों से भी होता है. 2026 में ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव ने अमेरिका की उस धारणा को तोड़ दिया है कि वह कम नुकसान में दुश्मन को काबू कर लेगा. 2,000 करोड़ रुपये के एक अकेले ड्रोन से लेकर अत्याधुनिक रडार प्रणालियों तक, अमेरिका को इस जंग में जो कीमत चुकानी पड़ रही है, वह उसके सैन्य इतिहास के सबसे महंगे अध्यायों में से एक बनती जा रही है.

अरबों डॉलर का सैन्य सामान स्वाहा

ईरान के साथ जारी इस जंग में अमेरिका को सबसे बड़ा झटका उसके हवाई बेड़े को लगा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च और अप्रैल 2026 के बीच ही अमेरिका ने अरबों डॉलर मूल्य के सैन्य विमान और ड्रोन खो दिए हैं. इनमें F-15E स्ट्राइक ईगल, A-10 थंडरबोल्ट और अत्याधुनिक F-35 लाइटनिंग II जैसे विमान शामिल हैं. एक-एक फाइटर जेट की कीमत करोड़ों में होती है, और इनके गिरने से न केवल वित्तीय घाटा हुआ है, बल्कि अमेरिकी वायुसेना की 'अजेय' छवि को भी ठेस पहुंची है.

ड्रोन बेड़े की टूटी कमर

इस युद्ध की सबसे चौंकाने वाली बात अमेरिकी ड्रोनों का भारी संख्या में तबाह होना है. केवल अप्रैल के शुरुआती हफ्तों में ही अमेरिका ने 24 'MQ-9 रीपर' ड्रोन खो दिए, जिनकी कुल कीमत 6,000 करोड़ रुपये (720 मिलियन डॉलर) से अधिक है. इसके अलावा, करीब 2,000 करोड़ रुपये का 'MQ-4C ट्राइटन' ड्रोन फारस की खाड़ी में क्रैश हो गया. यह ड्रोन इतना महंगा है कि इसकी कीमत में दो F-35 लड़ाकू विमान खरीदे जा सकते थे. ड्रोनों का यह नुकसान अमेरिका के लिए एक बड़ा रणनीतिक और आर्थिक झटका है.

रडार और डिफेंस सिस्टम पर हमला

ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता ने अमेरिकी सुरक्षा घेरे में भी सेंध लगाई है. युद्ध के दौरान ईरान ने कई महत्वपूर्ण अमेरिकी रडार प्रणालियों और उपग्रह टर्मिनलों को निशाना बनाया है. इनमें THAAD जैसे उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम के रडार और AN/TPY-2 जैसे अर्ली वार्निंग रडार शामिल हैं. इन प्रणालियों को दोबारा स्थापित करना न केवल खर्चीला है, बल्कि इसमें लंबा समय भी लगता है. रडार प्रणालियों का नष्ट होना खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी बेस को असुरक्षित बना रहा है.

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खजाने पर 200 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त बोझ

युद्ध की बढ़ती लागत ने अमेरिकी सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि मार्च 2026 के अंत तक, पेंटागन ने इस सैन्य अभियान के लिए पहले ही 18 बिलियन डॉलर खर्च कर दिए थे. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, रक्षा विभाग ने संसद से 200 बिलियन डॉलर (लगभग 16.7 लाख करोड़ रुपये) के अतिरिक्त फंड की मांग की है. यह भारी-भरकम राशि सीधे तौर पर अमेरिकी करदाताओं की जेब पर बोझ डालेगी और देश की अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर धकेल सकती है.

तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार में हलचल

केवल सैन्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी अमेरिका को अप्रत्यक्ष रूप से बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है. होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और ईरान के हमलों के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है. कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे अमेरिका में गैस और ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. इस ऊर्जा संकट ने मुद्रास्फीति (महंगाई) को बढ़ावा दिया है, जिससे अमेरिकी परिवारों की क्रय शक्ति कम हो गई है.

सैनिकों की जान और मानवीय क्षति

हथियारों और पैसों के नुकसान के साथ-साथ अमेरिका को अपने सैनिकों की शहादत का गम भी झेलना पड़ रहा है. अब तक की आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, इस जंग में 15 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और 500 से अधिक घायल हुए हैं. इसके अलावा, कई पायलटों को दुश्मन के इलाके में इजेक्शन करना पड़ा, जिनके रेस्क्यू मिशन में भी करोड़ों रुपये और कई अन्य सैन्य संपत्तियां दांव पर लगानी पड़ीं. सैनिकों का हताहत होना किसी भी देश के लिए सबसे बड़ा और अपूरणीय नुकसान होता है.

30 अरब डॉलर का भारी वित्तीय झटका

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) के एक पॉडकास्ट के दौरान भारतीय वायुसेना के पूर्व दिग्गज अधिकारी, रिटायर्ड एयर मार्शल संजीव कपूर ने अमेरिका को हुए नुकसान का कच्चा चिट्ठा खोला. संजीव कपूर ने चर्चा के दौरान एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया. उनके आकलन के मुताबिक, इस पूरे संघर्ष में अमेरिका को लगभग 30 अरब डॉलर (भारतीय मुद्रा में करीब 2,51,000 करोड़ रुपये) का नुकसान उठाना पड़ा है. यह राशि इतनी बड़ी है कि कई छोटे देशों का वार्षिक बजट भी इसके बराबर नहीं होता. इसमें नष्ट हुए सैन्य उपकरणों, मिसाइलों के खर्च और खाड़ी क्षेत्र में सेना की तैनाती को बनाए रखने की लागत शामिल है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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