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Delimitation India: आजादी के बाद से कितनी बार हो चुका डिलिमिटेशन, जानें हर बार क्या हुआ बदलाव?

Delimitation India: सरकार एक बार फिर से देश में परिसीमन लाने की तैयारी कर रही है. आइए जानते हैं कि इतिहास में कितनी बार परिसीमन हुआ है.

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  • लोकसभा सीटों की संख्या 543 से 850 हो सकती है।
  • जनसंख्या वृद्धि व महिला आरक्षण हेतु परिसीमन की तैयारी।
  • 1952, 1963, 1973, 2002 में हुए परिसीमन।
  • जनगणना के आधार पर चुनावी क्षेत्रों का पुनर्गठन।

Delimitation India: 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले बड़ी राजनीतिक बहस के बीच भारत में परिसीमन एक बार फिर से चर्चा का विषय बन चुका है. केंद्र सरकार एक बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है. इससे लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर लगभग 850 हो सकती है. इसका दोहरा लक्ष्य है. जनसंख्या वृद्धि के अनुरूप प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना और महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करना. इसी बीच आइए जानते हैं कि इतिहास में भारत में कितनी बार परिसीमन हुआ है और हर चरण में क्या बदलाव आए हैं.

क्या है परिसीमन? 

परिसीमन का मतलब है जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर चुनावी क्षेत्र की सीमाओं को फिर से निर्धारित करने की प्रक्रिया. इसका उद्देश्य समान प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना है, ताकि हर निर्वाचित प्रतिनिधि लगभग समान संख्या में नागरिकों का प्रतिनिधित्व कर सके. भारत में यह काम एक परिसीमन आयोग द्वारा किया जाता है. 

पहला परिसीमन 

परिसीमन का पहला अभ्यास 1952 में 1951 की जनगणना के आधार पर किया गया था. एक नए स्वतंत्र राष्ट्र के लिए यह काफी जरूरी कदम था. ऐसा इसलिए क्योंकि इसने पहली बार चुनावी क्षेत्र की सीमाओं को निर्धारित किया था और भारत के पहले आम चुनावों के सुचारू संचालन को संभव बनाया था.

दूसरा परिसीमन 

दूसरा परिसीमन 1963 में 1961 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल करके किया गया था. इस चरण के दौरान जनसंख्या वृद्धि को दर्शाने के लिए लोकसभा सीटों में समायोजन किया गया था. इससे यह पक्का हुआ कि अलग-अलग क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व संतुलित बना रहे.

तीसरा परिसीमन 

1971 की जनगणना पर आधारित 1973 के तीसरे परिसीमन से एक बड़ा बदलाव आया. लोकसभा सीटों की कुल संख्या बढ़ाकर 543 कर दी गई. हालांकि इसके तुरंत बाद 1976 में एक संवैधानिक संशोधन के जरिए से सीटों की संख्या को साल 2000 तक के लिए स्थिर कर दिया गया. ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि जिन राज्यों ने जनसंख्या वृद्धि को सफलतापूर्वक कंट्रोल किया था उन्हें प्रतिनिधित्व के मामले में किसी भी प्रकार की हानि ना हो. 

चौथा परिसीमन 

लगभग 3 दशकों के बाद परिसीमन का चौथा अभ्यास 2002 में 2001 की जनगणना के आधार पर शुरू किया गया. दिलचस्प बात यह है कि सीटों की संख्या पर लगी रोक के चलते लोकसभा सीटों की कुल संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई. इसके बजाय इस चरण में निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं को फिर से तय करने और अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण को संशोधित करने पर ध्यान लगाया गया था.

यह भी पढ़ें: क्या है लोकसभा का नियम 66 का प्रावधान, जिसे निलंबित करने जा रही सरकार?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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