Madhya Pradesh UCC Bill : खून के रिश्तों में नहीं कर सकेंगे शादी, क्या मध्यप्रदेश के मुसलमानों पर भी लागू होगा यह नियम?
Madhya Pradesh UCC Bill : इन्हीं में एक जरूरी प्रावधान प्रतिबंधित रक्त संबंधों (ब्लड रिलेशन) के बीच विवाह पर रोक का भी है. इस नियम को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है.

Madhya Pradesh UCC Bill : मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर चर्चा तेज हो गई है. राज्य मंत्रिमंडल ने यूसीसी विधेयक के प्रारूप को मंजूरी दे दी है, जिसे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाना है. इस ड्राफ्ट में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं. इन्हीं में एक जरूरी प्रावधान प्रतिबंधित रक्त संबंधों (ब्लड रिलेशन) के बीच विवाह पर रोक का भी है. इस नियम को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है और सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह प्रावधान मध्य प्रदेश के मुसलमानों पर भी लागू होगा. तो आइए जानते हैं कि क्या मध्यप्रदेश के मुसलमानों पर भी यह नियम लागू होगा.
यूसीसी ड्राफ्ट में क्या है नया प्रावधान?
प्रस्तावित यूसीसी के तहत प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह की अनुमति नहीं होगी. इसके अलावा पुरुष की शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और महिला की 18 वर्ष तय की गई है. विवाह का पंजीकरण सभी के लिए जरूरी होगा. सरकार का कहना है कि विवाह, उत्तराधिकार और अन्य पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने का उद्देश्य समान अधिकार तय करना है. हालांकि, अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) और संरक्षित क्षेत्रों में रहने वाले विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है.
क्या मुसलमानों पर भी लागू होगा यह नियम?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूसीसी ड्राफ्ट को मंजूरी मिलने के बाद कहा कि सबके लिए एक विवाह-एक कानून का सिद्धांत लागू किया जा रहा है. सरकार के अनुसार, यह कानून आदिवासी समुदायों को छोड़कर सभी वर्गों पर लागू होगा. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जन परामर्श के दौरान 80 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम महिलाओं और लगभग 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने समान कानून का समर्थन किया. हालांकि, मुस्लिम समाज के कुछ संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि निकाह, तलाक और विरासत जैसे मामलों का समाधान शरीयत के अनुसार होना चाहिए और आदिवासी समुदाय की तरह मुस्लिम समाज को भी यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए.
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ब्लड रिलेशन में शादी पर रोक क्यों?
विशेषज्ञों के अनुसार, खून के रिश्तों में शादी होने पर कुछ जेनेटिक बीमारियों के बच्चों में आने की संभावना बढ़ सकती है. अगर परिवार के दोनों पक्षों में एक जैसे दोषपूर्ण जीन मौजूद हों, तो बच्चे को दोनों तरफ से वही जीन मिलने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे जेनेटिक बीमारी सामने आ सकती है. इसी कारण विशेषज्ञ मानते हैं कि ब्लड रिलेशन में शादी होने पर कुछ गंभीर बीमारियों का जोखिम सामान्य शादी की तुलना में ज्यादा हो सकता है.
किन बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी शादी में थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, सिस्टिक फाइब्रोसिस, हीमोफीलिया, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी और ताए-साक्स जैसी जेनेटिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा अगर परिवार में पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या अस्थमा जैसी बीमारियों का इतिहास हो, तो अगली पीढ़ी में इनके होने की संभावना भी ज्यादा हो सकती है.
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