एक्सप्लोरर

क्या बुजुर्गों का देश बनकर रह जाएगा भारत? 2050 तक कैसी होगी तस्वीर

भारत विकसित होने से पहले ही बुजुर्ग आबादी के बड़े संकट की ओर बढ़ रहा है, जहां 2050 तक 34.7 करोड़ वरिष्ठ नागरिक होंगे. चलिए जानें कि इसमें कितने कामकाजी युवा होंगे.

भारत की जनसांख्यिकी और सामाजिक संरचना में एक बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है. ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (TRI) द्वारा जारी एक नए वाइट पेपर के मुताबिक, भारत समृद्ध और अमीर बनने से पहले ही बुजुर्ग आबादी वाले देश की श्रेणी में शामिल हो रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2050 तक देश का औसतन हर पांचवां व्यक्ति वरिष्ठ नागरिक होगा, जिनमें से करीब 70 फीसदी बुजुर्ग ग्रामीण इलाकों में रहेंगे. घटते पारिवारिक ढांचे और बढ़ती उम्र की वजह से देश की पारंपरिक देखभाल प्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव तेजी से बढ़ रहा है.

अमीर बनने से पहले ही बुजुर्ग होता भारत

विकसित देशों ने तब आबादी के बूढ़े होने की चुनौती का सामना किया, जब वे पहले से आर्थिक रूप से समृद्ध हो चुके थे. इसके विपरीत, भारत बहुत कम आय स्तर पर ही इस बड़े जनसांख्यिकीय बदलाव की तरफ बढ़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2050 तक देश में 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों की संख्या बढ़कर 34.7 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. इसका मतलब है कि देश की कुल आबादी में हर पांच में से एक व्यक्ति बुजुर्ग होगा, जो सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा नीतियों के लिए एक नया और बड़ा संकट खड़ा कर सकता है.

कामकाजी आबादी पर बढ़ता सहारा देने का बोझ

स्टडी के आंकड़ों से पता चलता है कि बुजुर्गों को सहारा देने वाले कामकाजी वर्ग का अनुपात तेजी से गिर रहा है. साल 2001 में प्रति एक बुजुर्ग की देखभाल के लिए 8.4 कामकाजी लोग मौजूद थे, जो 2026 तक घटकर औसतन 5.2 रहने का अनुमान है. यह गिरावट स्पष्ट करती है कि भविष्य में पेंशन, वित्तीय सहायता और दैनिक देखभाल के लिए कामकाजी युवाओं पर बोझ दोगुना होने वाला है. इसके साथ ही, लगभग 10 में से 7 वरिष्ठ नागरिक गांवों में निवास करेंगे, जहां बुनियादी सुविधाएं पहले से ही सीमित हैं.

यह भी पढ़ें: भारत पर 100% का टैरिफ, क्या अमेरिका के खिलाफ WTO जा सकता है भारत?


क्या बुजुर्गों का देश बनकर रह जाएगा भारत? 2050 तक कैसी होगी तस्वीर

परिवारों पर बढ़ता बुजुर्गों की सेवा का दबाव

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) और राष्ट्रीय आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आया है कि भारत में न्यूक्लियर फैमिली का चलन तेजी से बढ़ा है. युवाओं का रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन और लोगों की औसत आयु बढ़ने से बुजुर्गों की देखभाल का ढांचा चरमरा रहा है. इन सब चुनौतियों के बावजूद, आज भी देश के लगभग 94 प्रतिशत बुजुर्गों की देखभाल उनके परिवारों के भीतर ही की जाती है. छोटे होते परिवारों के कारण अब कम सदस्यों को बुजुर्गों की स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों की जटिल जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है.

घर की महिलाओं पर बजुर्गों की देखभाल का बोझ

टाइम यूज सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, घरों में बुजुर्गों और परिजनों की देखभाल का सबसे बड़ा बोझ महिलाओं पर है. महिलाएं प्रतिदिन औसतन 305 मिनट बिना किसी वेतन के सेवा और देखभाल के कार्यों में लगाती हैं, जबकि पुरुषों का योगदान महज 56 मिनट का है. बिना किसी आर्थिक पारिश्रमिक के काम का यह असमान बंटवारा महिलाओं की औपचारिक लेबर फोर्स में भागीदारी को रोकने वाली सबसे बड़ी दीवार बना हुआ है. जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती भीषण गर्मी, लू और बाढ़ जैसी आपदाएं महिलाओं के इस अवैतनिक काम के बोझ को और बढ़ा रही हैं.

पुरानी स्वास्थ्य प्रणाली और नई जरूरतें

भारत का मौजूदा सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचा मुख्य रूप से प्रसव, बच्चों के टीकाकरण और तीव्र बीमारियों के तुरंत इलाज पर केंद्रित रहा है. हालांकि, बुजुर्ग होती आबादी के इस नए दौर में लंबे समय तक चलने वाली पुरानी बीमारियों, शारीरिक दिव्यांगता और मानसिक समस्याओं से निपटने के लिए यह ढांचा नाकाफी साबित हो रहा है. रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि बढ़ती उम्र से जुड़ी इन जटिल बीमारियों का समाधान सिर्फ अस्पतालों के जरिए संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सामुदायिक स्तर पर दीर्घकालिक होम-केयर और विशेष स्वास्थ्य सेवाओं का जाल खड़ा करना होगा.


क्या बुजुर्गों का देश बनकर रह जाएगा भारत? 2050 तक कैसी होगी तस्वीर

दीर्घकालिक देखभाल नीति और प्राथमिक चुनौतियां

रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण भारत में बुजुर्गों की सामाजिक सुरक्षा और पेंशन योजनाओं को नए सिरे से डिजाइन करना होगा. अगर समय रहते ग्रामीण इलाकों में ओल्ड-एज होम, केयर-गिवर ट्रेनिंग और आर्थिक सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले दो दशकों में भारत एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक संकट में फंस सकता है. सरकार और नीति निर्माताओं को केवल आर्थिक विकास दर पर नहीं, बल्कि बुजुर्ग होती आबादी की बुनियादी जरूरतों पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा.

यह भी पढ़ें: बिना इजाजत किसी का बना लिया वीडियो, इस पर कितनी हो सकती है सजा?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

कहां से हुई लोकतंत्र की शुरुआत? कहां बनी थी पहली पार्लियामेंट
कहां से हुई लोकतंत्र की शुरुआत? कहां बनी थी पहली पार्लियामेंट
भारत में कैसे खत्म हुआ था मुगल काल, कौन जीता था आखिरी मुगल युद्ध?
भारत में कैसे खत्म हुआ था मुगल काल, कौन जीता था आखिरी मुगल युद्ध?
मकान में दिखें ये बदलाव तो तुरंत कर दें खाली, किसी भी पल ढह सकता है घर
मकान में दिखें ये बदलाव तो तुरंत कर दें खाली, किसी भी पल ढह सकता है घर
इस गांव में आज भी चलता है राजा का राज, क्या नहीं माना जाता देश का कानून?
इस गांव में आज भी चलता है राजा का राज, क्या नहीं माना जाता देश का कानून?
Advertisement

वीडियोज

Sansani | UP News: दगाबाज सनम...बेवफा बवाल ! | Meerut
Protest Against CEC | SIR Controversy: Gyanesh Kumar के खिलाफ ठाकरे बंधुओं का मोर्चा | Congress
Premanand Maharaj: संतों का डेरा या 'धन साधकों' का बसेरा?
Mad Sandhu Murder Case: इन्फ्लुएंसर मैड संधू की गोली मारकर हत्या | ABP News
UP Politics | UP Chunaav 2027: गठबंधन में 'दरार'...27 में कैसे बेड़ापार?। Akhilesh Yadav | Congress
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
PM मोदी-अमित शाह को खरगे ने बताया अवैध तो भड़की BJP, रिजिजू बोले- 'क्या आप और राहुल...'
PM मोदी-अमित शाह को खरगे ने बताया अवैध तो भड़की BJP, रिजिजू बोले- 'क्या आप और राहुल...'
पंजाब चुनाव: AAP-SAD और BJP प्रचार में जुटीं, कांग्रेस ने उठाया यह कदम
पंजाब चुनाव: AAP-SAD और BJP प्रचार में जुटीं, कांग्रेस ने उठाया यह कदम
'90 लाख वोटरों का...' चुनाव आयोग के काम पर सवाल! SC के पूर्व जज ने क्या कहा
'90 लाख वोटरों का...' चुनाव आयोग के काम पर सवाल! SC के पूर्व जज ने क्या कहा
KKK15 Winner: 'खतरों के खिलाड़ी 15' के विनर बने अविनाश मिश्रा, ट्रॉफी के साथ घर ले गए इतनी प्राइज मनी
'खतरों के खिलाड़ी 15' के विनर बने अविनाश मिश्रा, ट्रॉफी के साथ घर ले गए इतनी प्राइज मनी
500 विकेट लेने वाले इंग्लैंड के दिग्गज खिलाड़ी ने लिया संन्यास, रिटायरमेंट की वजह चौंकाने वाली
500 विकेट लेने वाले इंग्लैंड के दिग्गज खिलाड़ी ने लिया संन्यास, रिटायरमेंट की वजह चौंकाने वाली
बिहार: राहत बांटने के दौरान लोगों पर तानी पिस्टल, थानाध्यक्ष सस्पेंड
बिहार: राहत बांटने के दौरान लोगों पर तानी पिस्टल, थानाध्यक्ष सस्पेंड
'झूठे आरोप, सबूत...', फ्लाई दुबई कांड से कनेक्शन जोड़ने पर भड़का ईरान
'झूठे आरोप, सबूतों से छेड़छाड़', फ्लाई दुबई कांड से कनेक्शन जोड़ने पर भड़का ईरान
रामपुर में आजम खान परिवार से मिले स्वामी प्रसाद मौर्य, सियासी हलचल तेज
रामपुर में आजम खान परिवार से मिले स्वामी प्रसाद मौर्य, सियासी हलचल तेज
Embed widget