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किस कार का इस्तेमाल करती हैं ममता बनर्जी? ये कितनी सुरक्षित

Mamata Banerjee Car Attack: बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी की कार पर पत्थरों से हमला किए जाने की खबर है. इसी क्रम में यह भी जान लेते हैं कि आखिर उनके पास कौन सी कार है.

Mamata Banerjee Car Attack: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कार पर बैरकपुर में हुए पथराव ने उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. टीएमसी कार्यकर्ता के घर जाते समय हुए इस हमले पर ममता ने कहा कि अगर कार की खिड़की खुली होती तो उनका सिर फट सकता था. इस घटना के बाद ममता बनर्जी की कार और उसकी सुरक्षा की चर्चाएं तेज हो गई हैं. आइए जानते हैं कि ममता बनर्जी के पास कौन सी कार है, यह कितनी सुरक्षित है.

ममता बनर्जी की कार और पर्सनल वाहन

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रह चुकीं ममता बनर्जी के नाम पर कोई भी निजी गाड़ी दर्ज नहीं है. कोलकाता शहर में रोजाना के कामकाज के लिए वह अपनी पार्टी के एक सहयोगी द्वारा दी गई पुरानी हुंडई सैंट्रो (Hyundai Santro) कार का इस्तेमाल करती हैं. वहीं कोलकाता से बाहर लंबे दौरों पर जाने के लिए वह महिंद्रा स्कॉर्पियो या अन्य एसयूवी का इस्तेमाल करती हैं. मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह भारी सरकारी खर्च पर मिलने वाली महंगी बुलेट-प्रूफ गाड़ियों में सफर नहीं करेंगी.

क्रैश टेस्ट में कैसी है हुंडई सैंट्रो की सुरक्षा?

बैरकपुर में पत्थरों से हुए हमले के बाद ममता बनर्जी की हुंडई सैंट्रो की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं. ग्लोबल एनकैप के क्रैश टेस्ट में इस कार को 5 में से केवल 2-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली है. जांच रिपोर्ट में कार के ढांचे यानी बॉडी शेल और पैरों के पास के हिस्से को अस्थिर माना गया था. दुर्घटना या बड़े हमले की स्थिति में यह कार ज्यादा सुरक्षा नहीं देती है और टेस्ट के दौरान ड्राइवर की छाती व घुटनों की सुरक्षा भी कमजोर पाई गई थी.

यह भी पढ़ें: किस राज्य में सबसे सख्त है धर्म परिवर्तन कानून, कहां-कितनी सजा?


किस कार का इस्तेमाल करती हैं ममता बनर्जी? ये कितनी सुरक्षित

ममता बनर्जी को कौन सी सुरक्षा मिलती है?

ममता बनर्जी को आधिकारिक तौर पर देश की दूसरी सबसे बड़ी जेड-प्लस (Z+) श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, जो येलो बुक प्रोटोकॉल के तहत दी जाती है. इसमें कुल 55 या उससे अधिक सशस्त्र कमांडो और सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं. 

  • सुरक्षा का सबसे पहला यानी इनर रिंग घेरा अत्यधिक प्रशिक्षित एनएसजी या एसपीजी स्तर के कमांडो संभालते हैं. 
  • मिडल रिंग में गतिविधियों पर नजर रखने वाले सपोर्ट जवान होते हैं. 
  • आउटर रिंग यानी तीसरे घेरे में सीआरपीएफ, सीआईएसएफ या स्थानीय पुलिस के जवान आवागमन और आसपास की भीड़ को नियंत्रित करते हैं.

पूर्व सीएम का काफिला और आवास की सुरक्षा

जेड-प्लस प्रोटोकॉल के तहत वीआईपी के काफिले में आगे-पीछे एस्कॉर्ट गाड़ियां, पायलट वाहन, बुलेटप्रूफ कार और कई बार एम्बुलेंस भी शामिल रहती है. साथ ही रिहायशी आवास और दफ्तर पर 24 घंटे सशस्त्र गार्ड मुस्तैद रहते हैं. हालांकि, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल बदलने के बाद ममता बनर्जी के आवास के बाहर से कुछ अतिरिक्त बैरिकेड्स हटाए गए हैं. इसके अतिरिक्त, पुराने निजी सुरक्षा अधिकारियों को बदले जाने के विवाद के बाद उन्होंने नए सरकारी सुरक्षाकर्मियों की सेवा लेने से इनकार कर दिया था.

ममता बनर्जी की संपत्ति और बैंक बैलैंस

ममता बनर्जी की सादगी उनकी कुल संपत्ति के आंकड़ों में भी दिखाई देती है. चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के अनुसार उनकी कुल चल संपत्ति सिर्फ 15.37 लाख रुपये हैं. साल 2021 में यह आंकड़ा 16.72 लाख रुपये था, यानी पिछले पांच सालों में उनकी संपत्ति में करीब 1.35 लाख रुपये की गिरावट आई है. उनकी संपत्ति का सबसे बड़ा हिस्सा बैंक खातों में जमा 12.76 लाख रुपये है. इसके अलावा उनके पास लगभग 1.45 लाख रुपये की कीमत का 9.75 ग्राम सोना मौजूद है.


किस कार का इस्तेमाल करती हैं ममता बनर्जी? ये कितनी सुरक्षित

बिना घर और जमीन वाली मुख्यमंत्री

अन्य दिग्गज राजनेताओं के उलट ममता बनर्जी के पास कोई भी अचल संपत्ति नहीं है. उनके नाम पर न तो कोई घर है, न कमर्शियल बिल्डिंग और न ही कोई खेती वाली जमीन है. चुनावी हलफनामे के अनुसार दैनिक जरूरतों के लिए उनके पास 75,700 रुपये नकद, जो 2021 के 69,255 रुपये के मुकाबले थोड़ा ज्यादा है. हलफनामे में उन्होंने अपने ऊपर किसी भी तरह के कर्ज या देनदारी की घोषणा नहीं की है. बिना निजी घर और अपनी गाड़ी के वह देश की सबसे कम संपत्ति वाली मुख्यमंत्री के तौर पर जानी जाती हैं.

यह भी पढ़ें: किन राज्यों में बाहरी नहीं खरीद सकते जमीन, क्यों लिया गया ऐसा फैसला?

About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

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