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ईरान-अमेरिका युद्ध में क्यों नहीं खत्म होते हथियार, कितना बड़ा है जखीरा?

Iran-US Conflict: ईरान और अमेरिका का युद्ध काफी वक्त से चल रहा है. आइए जानते हैं कि अब तक इन दोनों देशों के हथियार खत्म क्यों नहीं हो रहे.

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  • घरेलू उत्पादन व विशाल भंडार से हथियार निरंतर उपलब्ध हैं।
  • ईरान सस्ते ड्रोन, मिसाइल और भूमिगत सुविधाओं पर निर्भर है।
  • अमेरिका विशाल रक्षा उद्योग, महंगे उन्नत हथियार रखता है।

Iran-US Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच टकराव काफी लंबे वक्त से चल रहा है. लेकिन दोनों देश अपने हथियारों का भंडार खत्म के बिना मिसाइल, ड्रोन और दूसरे हथियार कैसे दागते रह सकते हैं? दरअसल इसका जवाब उनके पास पहले से मौजूद भारी हथियारों के भंडार, घरेलू स्तर पर हथियारों के उत्पादन और काफी अलग-अलग सैन्य रणनीति के मेल में छिपा है. जिस तरफ ईरान काफी हद तक सस्ते ड्रोन और मिसाइल पर निर्भर है वहीं अमेरिका एडवांस्ड और काफी महंगे हथियार सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है. 

ईरान और अमेरिका के हथियार क्यों खत्म नहीं हो रहे? 

इसके सबसे बड़ी वजह है कोई भी देश पूरी तरह से अपने मौजूदा भंडार पर निर्भर नहीं है. दोनों देशों ने ऐसे डिफेंस उद्योग स्थापित किए हैं जो लगातार हथियारों का उत्पादन करने में सक्षम हैं. हालांकि उनके उत्पादन का पैमाना और तकनीक काफी अलग-अलग हैं. ईरान ने आयात पर प्रतिबंधों और रोक के बावजूद दशकों तक घरेलू मिसाइल और ड्रोन उद्योग विकसित किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक उसने पहाड़ी इलाकों में भूमिगत सुविधा और छिपे हुए हथियार इंफ्रास्ट्रक्चर भी बनाए हैं. इससे दुश्मन के लिए उसके पूरे हथियार भंडार को नष्ट करना और भी मुश्किल हो गया है.

वहीं अमेरिका के पास दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस में से एक है. हालांकि सस्ते ड्रोन बनाने की तुलना में एडवांस्ड सटीक हथियार बनाना काफी ज्यादा मुश्किल है. कुछ एडवांस्ड मिसाइल पुर्जों को बदलने में महीनों या फिर साल भी लग सकते हैं.


ईरान-अमेरिका युद्ध में क्यों नहीं खत्म होते हथियार, कितना बड़ा है जखीरा?

अमेरिकी सेना का हथियार भंडार काफी बड़ा 

अमेरिका के पास कुल मिलाकर काफी बड़ा सैन्य हथियार भंडार है. उसका सालाना डिफेंस बजट लगभग 895 अरब डॉलर से 916 अरब डॉलर है. इससे अमेरिका विमान, मिसाइल, नौ-सैनिक संपत्ति और एयर डिफेंस सिस्टम का भारी भंडार बनाए रख सकता है. अमेरिकी सेना में 13 लाख से ज्यादा सक्रिय सैनिक और लगभग 8 लाख रिजर्व सैनिक हैं. उसके हवाई बेड़े में 13000 से ज्यादा विमान और हेलीकॉप्टर शामिल हैं. 

देश के पास हजारों पारंपरिक मिसाइलें भी हैं. इनमें टॉम हॉक क्रूज मिसाइलें शामिल हैं. साथ ही पैट्रियट और THAAD जैसे एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम भी हैं. अमेरिकी नौसेना 11 परमाणु संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर संचालित करती है. इसी के साथ देश के पास 5000 से ज्यादा वॉरहेड वाला परमाणु हथियार भंडार है. 

ईरान के संसाधन 

ईरान का मिलिट्री बजट काफी कम है. यह लगभग 10 अरब से 15.4 अरब डॉलर के बीच माना जाता है. इसके बावजूद भी ईरान ने मिसाइल, ड्रोन और असीमित युद्ध पर आधारित एक रणनीति विकसित की है. ईरान के पास लगभग 6.10 लाख एक्टिव ड्यूटी सैनिक हैं. इनमें उनकी रेगुलर मिलिट्री और इस्लामी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के सैनिक शामिल हैं.

उसकी मिसाइल फोर्स को मिडल ईस्ट में सबसे बड़ी ताकतों में से एक माना जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक उसके पास 3000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल हैं. ईरान के पास ड्रोन का भी काफी बड़ा बेड़ा है. 

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ईरान के पुराने होते एयरक्राफ्ट 

ईरान की पारंपरिक वायु सेना अमेरिका की तुलना में काफी कमजोर है. यह लगभग 400 से 500 फाइटर एयरक्राफ्ट का संचालन करती है. जिनमें से कई पुराने अमेरिकी या फिर रूसी डिजाइन वाले प्लेटफार्म हैं. हालांकि तेहरान अपनी सैन्य क्षमता के जरिए इस कमजोरी की भरपाई करता है. उसकी मिसाइल फोर्स लंबी दूरी तक हमला करने की ताकत देती है. इसी के साथ उसकी नौसैनिक रणनीति बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर के बजाय छोटी तेज चलने वाली नांव, पनडुब्बी और झुंड में हमला करने की रणनीति पर केंद्रित है.

ईरान का पहाड़ी भूगोल भी मिसाइल और ड्रोन इंफ्रास्ट्रक्चर को छुपाने के लिए एक प्राकृतिक फायदा देता है. जमीन के नीचे बनी सुविधा दुश्मन के लिए सिर्फ हवाई हमले से पूरे हथियार के नेटवर्क को नष्ट करना काफी मुश्किल बना सकती हैं.


ईरान-अमेरिका युद्ध में क्यों नहीं खत्म होते हथियार, कितना बड़ा है जखीरा?

असली लड़ाई प्रोडक्शन की क्षमता 

हथियारों का जखीरा मिलिट्री ताकत का सिर्फ एक हिस्सा है. ज्यादा जरूरी सवाल यह है कि कोई देश इस्तेमाल किए गए हथियारों की भरपाई कितनी तेजी से कर सकता है. ईरान की रणनीति बड़ी संख्या में सस्ते मिसाइल और ड्रोन पर जोर देती है. जिस वजह से वह अपनी छोटी अर्थव्यवस्था के बावजूद हमले जारी रख पाता है. अमेरिका के पास कहीं ज्यादा वित्तीय और तकनीकी संसाधन हैं. लेकिन इसके बावजूद भी उसके सबसे आधुनिक हथियारों में जटिल सप्लाई चेन और काफी खास तरह के पार्ट्स शामिल होते हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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