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होंगे दुनिया के बादशाह! यहां भी इतने लोग करते हैं एस्ट्रो-टैरो कार्ड और भविष्यवाणी करने वालों पर विश्वास, होश उड़ा देंगे आंकड़े

30% से ज्यादा अमेरिकी युवा एस्ट्रोलॉजी, टैरो कार्ड रीडिंग पर भरोसा कर रहे हैं और वह साल में कम से कम एक बार अपने भविष्यवक्ताओं से सलाह लेते हैं. इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं.

एक समय था जब भारत को लोग जादू-टोने वाला देश मानते हैं. यहां के ज्योतिषशास्त्र का मजाक भी उड़ाया जाता था, लेकिन अब दुनिया के बड़े-बड़े देश भारत के ज्योतिष शास्त्र, भविष्यवक्ताओं और टैरो कार्ड रीडिंग पर भरोसा करने लगे हैं. ऐसा हम नहीं अमेरिका से सामने आए आंकड़े कह रहे हैं. भले ही अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश हो, इस देश ने टेक्नोलॉजी की दुनिया में महारथ हासिल कर ली हो, लेकिन जो आंकड़े सामने आए हैं वो होश उड़ाने वाले हैं. 

2024 में हुई एक रिसर्च में सामने आया है कि 30 फीसदी से ज्यादा अमेरिकी युवा एस्ट्रोलॉजी, टैरो कार्ड रीडिंग पर भरोसा कर रहे हैं और वह साल में कम से कम एक बार अपने भविष्य को लेकर भविष्यवक्ताओं से सलाह लेते हैं. हालांकि, बहुत से युवाओं का कहना है कि वह ऐसा मनोरंजन के लिए करते हैं तो कई लोग इसको लेकर गंभीर भी हैं. 

कोरोना पीरियड में बढ़ा लोगों का भरोसा

अमेरिका में हुए एक सर्वे में सामने आया है कि कोरोना महामारी के दौरान यहां के युवाओं का एस्ट्रोलॉजी में भरोसा बढ़ा है और वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए इससे जुड़े. 9593 अमेरिकी लोगों पर हुए एक सर्वे के बाद आए आंकड़ों से पता चला है कि 27 फीसदी लोगों का कहना है कि वे ज्योतिष शास्त्र पर विश्वास करते हैं, जिसमें कम से कम 5 फीसदी अमेरिकी सप्ताह में कम से कम एक बार ज्योतिष से सलाह जरूर लेते हैं. वहीं 7% लोग महीने में एक से दो बार ज्योतिष से मिलते हैं. 

एस्ट्रोलॉजी पर भरोसा करने वाली ज्यादातर महिलाएं

अमेरिकी लोगों पर हुए सर्वे में पता चला है कि ज्योतिष शास्त्र पर विश्वास करने वालों की संख्या में अधिकतर महिलाएं हैं. 18 से 49 वर्ष के बीच की 43 फीसदी महिलाओं का कहना है कि वह ज्योतिष पर भरोसा करती हैं. हालांकि, 50 या इससे ज्यादा उम्र की 27 फीसदी महिलाएं ही इस पर भरोसा करती हैं. पुरुषों के मामले में ये आंकड़े काफी अलग हैं. 18 से 49 वर्ष की आयु के 20 फीसदी पुरुष और 50 वर्ष और उससे अधिक आयु के 16 फीसदी पुरुष ज्योतिष शास्त्र पर भरोसा करते हैं. 

यह भी पढ़ें: एक छोटी गलती की वजह से छिड़ जाता तीसरा विश्व युद्ध, अमेरिकी सिस्टम में दिखी रूस की परमाणु मिसाइल

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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