Kidney Valley: इस गांव में लोगों की है बस एक किडनी, वजह जानकर नहीं होगा यकीन
Kidney Valley: दुनिया में एक देश ऐसा भी है जिसके गांव में हर परिवार के लगभग एक सदस्य की एक किडनी नहीं है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

- भूकंप के बाद आर्थिक तंगी से लोग स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे।
Kidney Valley: नेपाल के एक छोटे से गांव ने दुनिया को चौंका दिया है. दरअसल यहां गरीबी और मानव तस्करी के बीच एक दिल दहला देने वाली सच्चाई छिपी है. कावरेपलांचोक जिले में बसा होकसे गांव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किडनी वैली के नाम से जाना जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि यहां के कई घरों में कथित तौर पर कम से कम एक व्यक्ति ने अपनी किडनी बेची है.
क्या है इसकी वजह?
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस गांव के ज्यादातर निवासी घोर गरीबी में जी रहे थे. कई परिवारों को खाने का इंतजाम करने, कर्ज चुकाने या फिर रहने के लिए एक साधारण सा घर बनाने में भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था. ऐसे हालतों में अंगों की तस्करी करने वाले लोग कथित तौर पर गांव वालों के पास आए और उन्हें जल्दी पैसा कमाने का लालच दिया. कई परिवारों को किडनी बेचना ही आर्थिक रूप से गुजारा करने का एकमात्र जरिया नजर आया. माना जाता है कि कई गांव वालों ने अपनी किडनी सिर्फ 20000 से 70000 नेपाली रुपये में बेच दी. यह उस कीमत से काफी कम थी जिस पर अंगों की अवैध तस्करी करने वाले गिरोह कथित तौर पर भारी मुनाफा कमाते थे.
फैलाया सबसे बड़ा झूठ
इस कहानी का सबसे परेशान करने वाला पहलू यह है कि किडनी तस्करी करने वालों ने कथित तौर पर गांव वालों को यह यकीन दिलाया था कि किडनी भी बालों या फिर नाखूनों की तरह अपने आप फिर से उग जाती है. चिकित्सा संबंधी जानकारी और शिक्षा की कमी की वजह से कई गांव वालों ने कथित तौर पर इन बातों पर यकीन कर लिया.
भूकंप संकट ने और परेशानी बढ़ाई
नेपाल में 2015 में आए विनाशकारी भूकंप ने कथित तौर पर कई परिवारों को आर्थिक तबाही की तरफ और धकेल दिया. कई गांव वालों ने किडनी बेचकर मिले पैसों से पहले ही अपने घर बना लिए थे लेकिन भूकंप के दौरान उनमें से कई घर तबाह हो गए. सब कुछ खो देने के बाद ये परिवार एक बार फिर से अपनी जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए पैसों के लिए बेताब हो उठे.
गांव वालों के स्वास्थ्य पर पड़ा प्रभाव
किडनी बेचने से लंबे समय तक रहने वाले गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकते हैं. खासकर तब जब सर्जरी अवैध या फिर ठीक से कंट्रोल न होने वाले तरीकों से की जाती है. खबरों के मुताबिक कई गांव वालों को लंबे समय तक रहने वाली कमजोरी, चिकित्सीय मुश्किलें, ठीक से कम ना कर पाना और मानसिक ट्रॉमा जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ा.
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