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Plutonium Vs Uranium: प्लूटोनियम या यूरेनियम... क्या है ज्यादा खतरनाक, 1KG में कितने बनेंगे परमाणु बम?

Plutonium Vs Uranium: प्लूटोनियम और यूरेनियम दोनों ही परमाणु बम बनाने के लिए एक जरूरी घटक हैं. आइए जानते हैं कि क्या 1 किलो की मात्रा से परमाणु बम बनाया जा सकता है.

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  • चीन के दावे से प्लूटोनियम-यूरेनियम की खतरनाक क्षमता चर्चा में।
  • प्लूटोनियम 239 यूरेनियम से अधिक रेडियोधर्मी और जहरीला है।
  • परमाणु हथियार हेतु प्लूटोनियम का क्रिटिकल मास कम होता है।
  • एक किलो पदार्थ से बम नहीं, जटिल इंजीनियरिंग आवश्यक।

Plutonium Vs Uranium: हाल ही में चीन के एक सरकारी अखबार ने यह दावा किया है कि जापान के पास इतना प्लूटोनियम है कि वह 5500 परमाणु हथियार बना सकता है. इस तरह के दावों ने एक बार फिर से प्लूटोनियम और यूरेनियम जैसे परमाणु पदार्थों को वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया है. ये दोनों ही परमाणु तकनीक के मुख्य घटक हैं. आइए जानते हैं कि यह कितने खतरनाक हैं और क्या इनमें से सिर्फ 1 किलोग्राम का इस्तेमाल करके परमाणु बम बनाया जा सकता है?

कौन ज्यादा खतरनाक? 

प्लूटोनियम और यूरेनियम दोनों ही रेडियोएक्टिव और खतरनाक हैं. लेकिन प्लूटोनियम 239 को आमतौर पर कई मायनों में ज्यादा खतरनाक माना जाता है. यूरेनियम की तुलना में प्लूटोनियम में रेडियोएक्टिविटी का स्तर काफी ज्यादा होता है. इसका मतलब है कि समान मात्रा होने पर भी यह ज्यादा रेडिएशन उत्सर्जित करता है. इससे इसे संभालना और स्टोर करना ज्यादा नुकसानदायक हो जाता है.

स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर के लिहाज से प्लूटोनियम काफी जहरीला होता है. इससे काफी छोटे कण भी अगर सांस के जरिए शरीर में चले जाएं या निगले जाएं तो फेफड़े, हड्डियों या लीवर में जमा हो सकते हैं और कैंसर जैसी बीमारियां बना सकते हैं. यूरेनियम भी नुकसानदेह होता है लेकिन इसकी रेडियोएक्टिविटी और जहरीले प्रकृति का असर प्लूटोनियम की तुलना में कम होता है.

क्रिटिकल मास की भूमिका 

यह समझने के लिए की क्या 1 किलो से परमाणु बम बनाया जा सकता है, क्रिटिकल मास के बारे में जानना काफी जरूरी है. यह विखंडनीय पदार्थ की वह न्यूनतम मात्रा होती है जो किसी परमाणु चेन रिएक्शन को जारी रखने के लिए जरूरी होती है. प्लूटोनियम 239 का क्रिटिकल मास यूरेनियम 235 की तुलना में कम होता है. इसका मतलब है कि चेन रिएक्शन शुरू करने के लिए कम पदार्थ की जरूरत पड़ती है. यही वजह है कि हथियारों के लिए प्लूटोनियम को अक्सर ज्यादा असरदार माना जाता है. 

क्या 1 किलो से परमाणु बम बनाया जा सकता है? 

प्लूटोनियम या फिर यूरेनियम में से किसी का भी एक किलोग्राम परमाणु विस्फोट करने के लिए काफी नहीं होता. यह उस क्रिटिकल मास से काफी कम होता है जो किसी चेन रिएक्शन को जारी रखने के लिए जरूरी होता है. इसके अलावा परमाणु हथियार बनाना सिर्फ मात्रा का खेल नहीं है. इसके लिए बेहद जटिल इंजीनियरिंग, पदार्थ को सटीक आकार देने की कला, एडवांस्ड ट्रिगरिंग तंत्र और खास परिस्थितियों की जरूरत होती है. 

प्लूटोनियम क्यों ज्यादा असरदार? 

अपने कम क्रिटिकल मास और ज्यादा असरदार होने की वजह से प्लूटोनियम को अक्सर छोटे आकार के परमाणु हथियारों के लिए ज्यादा उपयुक्त माना जाता है. यूरेनियम आधारित उपकरणों की तुलना में यह छोटे डिजाइन बनाने की सुविधा देता है. हालांकि इस वजह से यह ज्यादा संवेदनशील हो जाता है और उसे संभालना भी मुश्किल होता है.

यह भी पढ़ें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से LPG लेकर आ रहा ग्रीन सान्वी, भारत आने तक पी जाएगा कितना तेल?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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