कहां है वह कृष्ण प्रतिमा, जिसे अपना पति मानती थीं मीरा?
Janmashtami 2026: आज भारत में श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि कहां है श्री कृष्ण की वह प्रतिमा जिसे अपना पति मानती थी मीरा बाई. जानें क्या कहता है इतिहास.

- जन्माष्टमी कृष्ण जन्म और भक्त मीरा बाई की भक्ति दर्शाती है।
- मीरा बाई की पूजित कृष्ण मूर्ति आज भी सुरक्षित है।
- यह 500 वर्षीय कृष्ण मूर्ति घाणेराव महल में संरक्षित है।
- मूर्ति चित्तौड़गढ़ से उनके चचेरे भाई को सौंपी गई।
Janmashtami 2026: भगवान कृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में हिंदू समुदायों में जन्माष्टमी मनाई जाती है. वक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और रात में पूजा करते हैं. उस समय के आसपास कृष्ण को भोग लगाते हैं जो उनके उपवास को तोड़ने से पहले उनके जन्म का प्रतीक माना जाता है. यह त्यौहार राजपूत युग की कवयित्री और भक्त मीरा बाई की गहरी भक्ति को याद करने का भी अवसर है. मीरा बाई बचपन से ही श्री कृष्ण को अपना पति मानती थीं. ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के मुताबिक मीरा अपने बचपन के दौरान श्री कृष्ण की जिस मूर्ति की पूजा करती थीं वह आज भी राजस्थान में संरक्षित है.
मूर्ति को मुरलीधर जी के नाम से जाना जाता है
इतिहासकारों और परंपरा से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक मीरा बाई ने बचपन में जो कृष्ण मूर्ति अपने पास रखी थी वह आज राजस्थान के पाली जिले के घाणेराव महल के एक मंदिर में संरक्षित है. मूर्ति को मुरलीधर जी के नाम से जाना जाता है और इसे एक दुर्लभ काले संगमरमर की छवि के रूप में बताया गया है. इसकी ऊंचाई लगभग 14 इंच है. ऐसा माना जाता है कि यह लगभग 500 साल पुरानी है.

मीरा मूर्ति को चित्तौड़गढ़ ले गई थीं
मूर्ति की कहानी मीरा बाई के जीवन से गहराई से जुड़ी हुई है. रिकॉर्ड के मुताबिक 1516 में अपनी शादी के बाद मीरा मूर्ति को अपने साथ चित्तौड़गढ़ ले गई थीं. जब वह अपने आध्यात्मिक पद पर आगे बढ़ती रहीं तो यह मूर्ति उनकी भक्ति का एक जरूरी हिस्सा बनी रही. बाद में जब मीरा ने शाही जीवन को छोड़ दिया और अंत में वृंदावन की तरफ जाने से पहले त्याग के रास्ते पर चल पड़ीं उन्होंने मूर्ति को अपने चचेरे भाई ठाकुर प्रताप सिंह को सौंप दिया. बाद में प्रताप सिंह का परिवार मूर्ति को घाणेराव ले आया जहां इसे संरक्षित रखा गया.
राजस्थान में घाणेराव महल
घाणेराव महल राजस्थान के पाली जिले के घनेराव गांव में स्थित है. यह ऐतिहासिक महल अरावली पर्वतमाला की तलहटी में स्थित है. यह संरचना राजपूत वास्तुकला परंपरा का एक उदाहरण है जिसमें मेवाड़ी और मारवाड़ी दोनों शैलियों से जुड़े तत्व शामिल हैं. इस महल का निर्माण ठाकुर गोपाल दास जी ने 1606 में करवाया था. आज ऐतिहासिक महल को एक हेरिटेज होटल में बदल दिया गया है. महल परिसर में मीरा बाई से जुड़ी मुरलीधर जी की मूर्ति संरक्षित है.

घाणेराव कैसे जा सकते हैं?
घाणेराव जोधपुर और उदयपुर के बीच स्थित है. इससे दोनों शहरों से यहां पहुंचा जा सकता है. यह रणकपुर जैन मंदिर और कुंभलगढ़ किले जैसे पर्यटक आकर्षणों के करीब भी है. रेल यात्रियों के लिए फालना और मारवाड़ जंक्शन सबसे पास के प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं. यह लगभग 30 से 40 किलोमीटर दूर है. किसी भी स्टेशन से आगंतुक टैक्सी या फिर स्थानीय परिवहन द्वारा घाणेराव जा सकते हैं.
हवाई यात्रियों के लिए उदयपुर हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा है. यह घाणेराव से लगभग 110 से 120 किलोमीटर दूर है. बाकी यात्रा कैब या फिर बस से पूरी की जा सकती है. इसी के साथ सड़क यात्रा एक और सुविधाजनक विकल्प है. खास तौर से घाणेराव को रणकपुर और कुंभलगढ़ के साथ जोड़ने की योजना बनाने वाले आगंतुकों के लिए.
कहां रह सकते हैं?
घाणेराव के आसपास आगंतुकों के पास आवास के कई विकल्प हैं. सबसे खास विकल्प घाणेराव रॉयल कैसल में रहना है. यह विरासत का अनुभव देता है. कमरे का किराया लगभग ₹4500 से ₹5500 प्रति रात हो सकता है.
जो लोग काफी ज्यादा प्रकृति केंद्रित प्रवास की तलाश में है वे अलोफ द जंगल लॉज पर विचार कर सकते हैं. इसे घाणेराव जंगल लॉज के रूप में भी जाना जाता है. इसका किराया लगभग ₹17000 प्रति रात से ज्यादा से शुरू होता है.
कम बजट वाले यात्रियों के लिए घाणेराव और उसके आसपास ग्रामीण लॉज, धर्मशाला और दूसरे आवास विकल्प भी मौजूद हैं. इनमें से कुछ का अनुमानित किराया लगभग ₹1500 से ₹2500 प्रति रात है.
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दो दिवसीय यात्रा की लागत क्या हो सकती है?
घाणेराव पैलेस की दो दिवसीय, एक रात की यात्रा का बजट प्रति व्यक्ति लगभग ₹3000 से ₹4500 हो सकता है. इसमें स्लीपर क्लास ट्रेन या फिर स्थानीय बस यात्रा, बुनियादी आवास और स्थानीय जगह पर भोजन शामिल है.
मिड रेंज की यात्रा में प्रति व्यक्ति लगभग ₹7000 से ₹10000 का खर्चा आ सकता है. इसमें फालना या फिर मारवाड़ जंक्शन से टैक्सी, हेरीटेज पैलेस में आवास और काफी अच्छी गुणवत्ता वाले रेस्टोरेंट में भोजन के साथ-साथ प्रवेश और गाइड खर्च शामिल हो सकते हैं.
लग्जरी अनुभव चाहने वालों के लिए बजट प्रति व्यक्ति ₹20000 से ज्यादा हो सकता है. इसमें उदयपुर की हवाई यात्रा, एक निजी एसयूवी, लग्जरी आवास, रिसोर्ट डाइनिंग, एक जंगल सफारी और कुंभलगढ़ और रणकपुर की अनुकूलित यात्रा भी शामिल हो सकती है.
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