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क्या सऊदी अरब और भारत में एक साथ दिख सकता है ईद का चांद? जानें अगले 5 साल का पैटर्न

इस्लामिक हिजरी कैलेंडर चंद्रमा की चाल पर आधारित होता है. वहीं इस्लाम में रमजान के 29 या 30 रोजे पूरे होने के बाद जब  शव्वाल महीने का पहला चांद दिखाई देता है तो उसके अगले दिन ईद-उल-फितर मनाई जाती है.

दुनिया भर में मुसलमान के सबसे बड़े और पवित्र त्योहार में से एक ईद-उल*फितर की तारीख हर साल चर्चा का विषय बन जाती है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ईद की तारीख पूरी तरह चांद के दीदार पर निर्भर करती है. जैसे-जैसे रमजान का महीना खत्म होने के करीब आता है, लोगों की नजरे आसमान पर टिक जाती हैं कि आखिरी  शव्वाल का चांद कब दिखाई देगा और ईद किस दिन मनाई जाएगी.

ज्यादातर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या सऊदी अरब में और भारत में एक ही दिन चांद दिखाई दे सकता है या हमेशा हर बार की तरह दोनों देशों में ईद को लेकर एक दिन का अंतर रहेगा. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सऊदी अरब और भारत में क्या एक साथ ईद का चांद दिख सकता है और अगले 5 साल का पैटर्न क्या रहेगा.

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चांद दिखने पर क्यों तय होती है ईद?

इस्लामिक हिजरी कैलेंडर चंद्रमा की चाल पर आधारित होता है. वहीं इस्लाम में रमजान के 29 या 30 रोजे पूरे होने के बाद जब  शव्वाल महीने का पहला चांद दिखाई देता है तो उसके अगले दिन ईद-उल-फितर मनाई जाती है. यही वजह है कि ईद की तारीख हर साल बदलती रहती है और उसका अंतिम फैसला चांद देखने वाली समितियां की घोषणा के बाद ही होता है. वहीं इस बार सऊदी अरब  के सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के लोगों को 18 मार्च की शाम यानी आज शव्वाल का चांद देखने की अपील की है. ऐसे में अगर आज चांद दिखाई देता है तो कल यानी 19 मार्च को ईद मनाई जाएगी. इसके अलावा भारत में आमतौर पर सऊदी अरब के एक दिन बाद ईद होती है. ऐसे में यहां इस बार 20 या 21 मार्च को ईद मनाए जाने की संभावना है, जो चांद दिखने पर निर्भर करेगी.

सऊदी अरब और भारत में 1 दिन का अंतर क्यों?

आमतौर पर देखा जाता है कि सऊदी अरब में ईद भारत से एक दिन पहले मनाई जाती है. इसके पीछे बड़ा कारण दोनों देशों की भौगोलिक स्थिति है. सऊदी अरब भारत के पश्चिम में स्थित है और खगोलीय नियमों के अनुसार नया चांद सबसे पहले पश्चिम क्षेत्र में दिखाई देता है. इसके अलावा टाइम जोन का भी अंतर जरूरी भूमिका निभाता है. जब सऊदी अरब में सूर्यास्त के समय चांद देखने का मौका होता है, तब भारत में काफी देर हो चुकी होती है. ऐसे में इस समय भारत में चांद देख पाना मुश्किल होता है, इसलिए यहां आमतौर पर अगले दिन चांद देखने की प्रक्रिया होती है.

क्या दोनों देशों में एक साथ दिख सकता है चांद?

एक्सपर्ट्स के अनुसार कुछ खास कंडीशन में ऐसा हो सकता है, जब सऊदी अरब और भारत में एक ही दिन चांद दिखाई दें. दरअसल इस्लामिक कैलेंडर पूरी तरह लूनर साइकिल पर चलता है. वहीं हर साल ईद 10 से 11 दिन पहले आती है, ऐसे में हर बार चांद का दिखाना अलग होता है. लेकिन लगभग हर 2 से 3 साल में एक बार ऐसा मौका आता है, जब चांद दोनों देशों में एक साथ दिख जाता है और एक ही दिन ईद पड़ती है.

क्या है अगले 5 साल का पैटर्न?

अगर अगले 5 साल का पैटर्न के अनुमान के अनुसार इस बार यानी 2026 में सऊदी अरब में भारत से एक दिन पहले ईद मनाई जाएगी. वहीं अनुमान है कि 2026 के बाद  यानी 2027 में भारत और सऊदी अरब में एक ही दिन ईद मनाने की संभावना है. इसके बाद फिर दोनों देशों की ईद की तारीख में अंतर हो सकता है.  हालांकि यह पूरा पैटर्न इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार चलता है.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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