क्या है जामिया मिल्लिया इस्लामिया का मतलब, किसने रखा यह नाम
जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र प्रदर्शन के बीच एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गया है. इसकी शुरुआत 1920 में अलीगढ़ में हुई थी. जानें इसके नाम का अर्थ, स्थापना और इसके पीछे की कहानी.

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र पिछले 12 अक्टूबर से स्टूडेंट्स यूनियन को बहाल करने और छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल और प्रदर्शन कर रहे हैं. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रो की सुरक्षा देखते हुए ऑफलाइन कक्षाएं बंद कर दी हैं और पढ़ाई ऑनलाइन चलाने के निर्देश दिए हैं. यूनिवर्सिटी में चल रहे इस प्रदर्शन के बीच आइए जानते हैं आखिर क्या है जामिया मिल्लिया इस्लामिया का मतलब और इससे जुड़ी कुख खास बातें.
दिल्ली के ओखला में स्थित यह विश्वविद्यालय आज देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरुआत दिल्ली से नहीं, बल्कि 1920 में अलीगढ़ से हुई थी. उस समय देश अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन के दौर से गुजर रहा था और शिक्षा को भी राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने की कोशिश हो रही थी. जामिया मिल्लिया इस्लामिया को समझने के लिए इसके तीन शब्दों को अलग-अलग देखना जरूरी है. जामिया का अर्थ विश्वविद्यालय और मिल्लिया का अर्थ राष्ट्रीय बताया जाता है. यानी नाम का मूल भाव एक ऐसे राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से जुड़ा था, जिसकी स्थापना एक स्वतंत्र शैक्षणिक सोच के साथ की गई थी.
राष्ट्रीय और शैक्षणिक सोच से जुड़ा है नाम
जामिया मिल्लिया इस्लामिया किसी एक व्यक्ति के नाम पर रखा गया नाम नहीं है. यह नाम उस समय की राष्ट्रीय और शैक्षणिक सोच को व्यक्त करता था. विश्वविद्यालय के आधिकारिक इतिहास के अनुसार, संस्थान की स्थापना 1920 में अलीगढ़ में हुई थी. इसके शुरुआती दौर में मौलाना मोहम्मद अली जौहर सहित कई प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं और शिक्षाविदों की भूमिका रही. जौहर इसके पहले कुलपति भी बने. इसके संस्थापकों में हकीम अजमल खान, डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी, अब्दुल मजीद ख्वाजा और मौलाना मोहम्मद अली जौहर जैसे नाम शामिल थे. बाद में महात्मा गांधी, डॉ. जाकिर हुसैन और अन्य शिक्षाविदों के योगदान ने जामिया की दिशा और विचारधारा को मजबूत किया.
1920 में अलीगढ़ से हुई शुरुआत
जामिया की स्थापना उस समय हुई जब देश में ब्रिटिश शासन के खिलाफ असहयोग आंदोलन जोर पकड़ रहा था. महात्मा गांधी ने ब्रिटिश सरकार से जुड़े शिक्षण संस्थानों के बहिष्कार का आह्वान किया था. जामिया इसी राष्ट्रीय आंदोलन के माहौल में अस्तित्व में आया. विश्वविद्यालय की अपनी रिपोर्ट भी इसे राष्ट्रीय शिक्षा की सोच से जोड़ती है. शुरुआत में संसाधन सीमित थे और संस्थान के सामने आर्थिक चुनौतियां भी थीं. इसके बावजूद जामिया से जुड़े लोगों ने इसे चलाने का प्रयास जारी रखा.
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अलीगढ़ से दिल्ली का सफर
1930 के दशक में संस्थान को अलीगढ़ से दिल्ली के ओखला क्षेत्र में रिलोकेट करने की प्रोसेस शुरू हुई. 1 मार्च 1935 को ओखला में एक स्कूल भवन की नींव रखी गई और 1936 में जामिया के अधिकांश संस्थान नए परिसर में रिलोकेट हो गए. इसके बाद ओखला जामिया की पहचान बन गया. यहां शिक्षा के साथ प्रयोग और नए शिक्षण तरीकों पर जोर दिया गया.
केवल धार्मिक शिक्षा नहीं
नाम का तीसरा हिस्सा इस्लामिया है, जिसकी वजह से अक्सर लोग पूरे नाम का अर्थ केवल धार्मिक शिक्षा से जोड़ देते हैं. लेकिन जामिया के इतिहास और उसके विकास को देखें तो संस्थान की गतिविधियां केवल धार्मिक अध्ययन तक सीमित नहीं रहीं. समय के साथ यहां ह्यूमैनिटीज, सोशल साइंस, साइंस, इंजीनियरिंग, शिक्षा, जनसंचार और कई अन्य क्षेत्रों में अध्ययन और रिसर्च विकसित हुए. विश्वविद्यालय 1962 में डीम्ड यूनिवर्सिटी बना और 1988 में संसद के अधिनियम के जरिए केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला.
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