कहां से कहां तक है चीनी सीमा, इसमें कहां-कहां विवाद?
India-China Border: भारत और चीन के बीच विवाद एक बार फिर से बढ़ चुका है. इसी बीच आइए जानते हैं कि चीन की सीमा कहां तक है और इसमें कहां-कहां पर विवाद है.

- भारत-चीन सीमा विवाद पर राजनीतिक बहस तेज; सरकार ने स्थिति नियंत्रित बताई।
- एलएसी 3488 किमी लंबी, लद्दाख में अक्साई चीन मुख्य विवाद।
- पूर्वी सेक्टर में मैकमोहन रेखा चीन नहीं मानता, अरुणाचल पर दावा।
- वास्तविक नियंत्रण रेखा की अस्पष्टता से सीमा पर तनाव बढ़ता है।
India-China Border: भारत-चीन विवाद को लेकर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक के एक बयान ने भारत में राजनीतिक बहस छोड़ दी है. इसके बाद कांग्रेस पार्टी सरकार से जवाब मांग रही है और सरकार का कहना है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति कंट्रोल्ड है. फिर भी अरुणाचल प्रदेश में असाफिला और लोंगजू जैसे इलाके संवेदनशील बने हुए हैं, जिन पर दोनों देश अपना अपना दावा जताते हैं.
सीमा की लंबाई और भूगोल
भारत-चीन सीमा को आमतौर पर LAC कहा जाता है. यह मुख्य रूप से हिमालय पर्वत श्रृंखला के साथ-साथ चलती है. भारत के मुताबिक इसकी लंबाई लगभग 3488 किलोमीटर है, जबकि चीन का अनुमान इससे कम लगभग 2000 किलोमीटर है. यह सीमा भारत के एक केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और चार राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है.
इस सीमा को आमतौर पर 3 सेक्टरों में बांटा जाता है. पश्चिमी, मध्य और पूर्वी. लद्दाख को कवर करने वाला पश्चिमी सेक्टर इस विवाद का सबसे बड़ा और सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जाता है. मध्य सेक्टर को अपेक्षाकृत शांत माना जाता है जबकि पूर्वी सेक्टर में विवाद मुख्य रूप से मैकमोहन रेखा और अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावों से जुड़ा है. यह तीन स्तरीय विभाजन दोनों पक्षों द्वारा बताई गई जगहों और उनके अलग-अलग दावों को समझने में मदद करता है.

लद्दाख और अक्साई चीन
पश्चिमी सेक्टर, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और चीन के कंट्रोल वाले शिनजियांग और तिब्बत क्षेत्र के बीच स्थित है. यहां मुख्य विवाद अक्साई चीन को लेकर है जो लगभग 38000 वर्ग किलोमीटर का इलाका है. भारत इसे अपना हिस्सा मानता है जबकि इस पर चीन का कब्जा है जिसे भारत अवैध मानता है. इस सेक्टर में कई जगहें काफी संवेदनशील बनी हुई हैं. इनमें गलवान घाटी के साथ-साथ पैंगोंग त्सो झील, डेपसांग मैदान, गोगरा हॉट स्प्रिंग्स और डेमचोक शामिल हैं.
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड
मध्य सेक्टर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से होकर गुजरता है. तीनों सेक्टरों में से इसे सबसे कम विवादित और सबसे शांत माना जाता है. हालांकि कुछ खास जगहों को लेकर यहां भी मतभेद हैं. उत्तराखंड का बाराहोती इलाका इसी तरह की जगहों में से एक है. हिमाचल प्रदेश में जिन इलाकों का जिक्र किया गया है उनमें शिवरी, माहेश्वरी और शिपकी ला दर्रा शामिल है.
यहां के विवाद पश्चिमी और पूर्वी सेक्टर में किए गए बड़े क्षेत्रीय दावों की तुलना में काफी छोटे इलाकों से जुड़े हुए हैं. इसके बावजूद भी मध्य सेक्टर दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े व्यापक मुद्दे का ही एक हिस्सा है.

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सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश
पूर्वी सेक्टर में तिब्बत की सीमा से लगे सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश आते हैं. इसकी सीमा रेखा मैकमोहन लाइन पर आधारित है. इसे 1914 के शिमला समझौते के तहत तय किया गया था. भारत इस रेखा को वैध अंतर्राष्ट्रीय सीमा मानता है लेकिन चीन इसे नहीं मानता. सबसे बड़ा विवाद अरुणाचल प्रदेश को लेकर है. चीन पूरे राज्य पर अपना दावा करता है जो लगभग 90000 वर्ग किलोमीटर में फैला है और इसे दक्षिण तिब्बत कहता है. भारत अरुणाचल प्रदेश को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है. चीन का यह दावा पूरे राज्य पर है ना कि सिर्फ उन जगहों पर जहां सेनाओं के बीच आमना-सामना हुआ है.
असाफिला, लोंगजू और तक्सिंग सर्कल को भी काफी संवेदनशील सीमावर्ती इलाके बताए गए हैं. यहां कभी-कभी दोनों देशों की सेनाओं के बीच आमना-सामना हो जाता है.
बार-बार होने वाले तनाव का एक मुख्य कारण यह है कि जमीन पर वास्तविक नियंत्रण रेखा को साफ तौर से चिह्नित नहीं किया गया है. सीमा कहां से गुजरती है इसे लेकर भारत और चीन की अपनी-अपनी अलग समझ है. यही वजह है कि दोनों तरफ के गश्ती दल अपनी-अपनी समझ के हिसाब से आगे बढ़ सकते हैं.
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