समुद्र में गिर जाए तेल तो उसे कैसे निकाला जाता है, इसमें कितना आता है खर्च?
UAE Oil Spill: हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात के तट पर तेल का रिसाव हुआ है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अगर समुद्र में तेल फैल जाए तो उसे कैसे साफ किया जाता है.

- संयुक्त अरब अमीरात तट पर तेल रिसाव, पर्यावरण चिंता बढ़ी।
- तेल फैलने से रोकने, निकालने के लिए बूम-स्किमर उपयोग।
- रासायनिक छिड़काव, जलाना और सूक्ष्मजीव भी सफाई के तरीके।
- सफाई लागत, तरीका रिसाव प्रकार-स्थान पर निर्भर करता है।
UAE Oil Spill: संयुक्त अरब अमीरात के तट पर तेल का रिसाव फैल रहा है. इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की चिंता बढ़ गई है. 24 अक्टूबर कोपरनिकल सैटेलाइट नेटवर्क द्वारा ली गई तस्वीर में समुद्र में तेल की एक परत फैलती हुई दिखाई थी. यह उत्तरी अमीरात में से एक उम्म अल क्वैन के पास तक पहुंच गई है. इस घटना को लेकर जताई जा रही चिंता के बीच अधिकारियों ने कई समुद्री तटों पर लोगों के जाने पर रोक लगा दी है.
तेल का रिसाव तब होता है जब समुद्र में तेल फैल जाता है. ऐसा अक्सर किसी जहाज के दुर्घटनाग्रस्त होने या फिर तेल निकालने वाले प्लेटफार्म में खराबी आने के कारण होता है. रिसाव के पैमाने और जगह के आधार पर इसे साफ करने का खर्चा लाखों से लेकर अरबों डॉलर तक हो सकता है.
तेल को रोकना और इकट्ठा करना
तेल पानी से हल्का होता है इस वजह से यह सतह पर तैरता रहता है. इस वजह से सबसे पहला कदम तेल को और ज्यादा फैलने से रोकना होता है. बचाव दल कंटेनमेंट बूम का इस्तेमाल करते हैं. ये लंबी और मजबूत तैरने वाली रुकावटें होती हैं जिन्हें प्रभावित इलाके के चारों तरफ लगाया जाता है. यह रुकावटें एक घेरा बना लेती हैं जिससे तेल एक तय जगह के अंदर ही रहता है और उसे इकट्ठा करना आसान हो जाता है.
इसके बाद घेरे में जमा तेल को हटाने के लिए स्किमर नावों का इस्तेमाल किया जाता है. इन खास नावों में वैक्यूम सिस्टम या रोलर जैसे उपकरण लगे होते हैं. इन्हें स्किमर कहा जाता है. यह उपकरण पानी की सतह से तेल को इकट्ठा करके अलग कंटेनर में डाल देते हैं. इस मैकेनिक प्रक्रिया में तेल को छोटे-छोटे बूंदों में तोड़ने के बजाय उसे पूरी तरह से बाहर निकाल लिया जाता है.

रासायनिक और दूसरी सफाई के तरीके
सफाई के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, यह उस जगह की स्थिति और तेल के फैलाव पर निर्भर करता है. तेल को रोकने और इकट्ठा करने का मुख्य उद्देश्य तेल को वापस निकालना होता है, जबकि डिस्पसेंट और सूक्ष्मजीव तेल को तोड़ने में मदद करते हैं. तेल को जलाकर भी खत्म किया जा सकता है, लेकिन ऐसा कुछ खास परिस्थितियों में ही किया जाता है. किसी एक तरीके से पूरी सफाई प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती है.
जब तेल का फैलाव काफी बड़े इलाके में हो जाता है तो अक्सर विमान के जरिए उस पर रसायनिक डिस्पसेंट का छिड़काव किया जाता है. यह रसायन तेल की मोटी परत को छोटी-छोटी बूंद में तोड़ देते हैं, जिससे वे पानी में आसानी से घुल मिल जाते हैं. इसके बाद बैक्टीरिया इन बिखरे हुए तेल के कणों को तोड़कर खत्म कर सकते हैं.
एक और तरीका इन सीटू बर्निंग यानी मौके पर ही तेल को जलाना है. इस तरीके में बचाव दल पहले बूम का इस्तेमाल करके तेल को इकट्ठा करते हैं और फिर समुद्र की सतह पर मौजूद उस तेल में आग लगा देते हैं.
सफाई प्रक्रिया के बाद के चरण में बायोरिमेडिएशन यानी सूक्ष्म जीवों के जरिए सफाई भी एक बड़ी भूमिका निभा सकती है. पानी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तेल खाने वाले बैक्टीरिया या फिर दूसरे सूक्ष्मजीव छोड़े जाते हैं.

सफाई की लागत अलग-अलग क्यों होती है?
लागत इस बात पर होती है कि कितना तेल फैला है, तेल हल्का है या फिर भारी और घटना कहां हुई है. खुले समुद्र की तुलना में समुद्र तट या फिर किनारे के पास फैले तेल को साफ करना काफी महंगा पड़ता है. तटीय इलाकों या संवेदनशील बर्फीले क्षेत्र में सफाई का खर्च, खुले समुद्र में तेल साफ करने के खर्चे से चार से पांच गुना ज्यादा हो सकता है.
समुद्र में एक गैलन तेल हटाने का खर्च ₹6,500 से ₹13,000 के बीच आता है. किसी बड़े टैंकर या फिर जहाज से जुड़ी बड़ी दुर्घटना के मामले में सफाई का कुल खर्च ₹20,000 करोड़ से ₹78,000 करोड़ तक पहुंच सकता है.
आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव
सफाई पर होने वाला सीधा खर्च कुल नुकसान का सिर्फ एक हिस्सा है. तेल रिसाव की वजह से पर्यटन पर बुरा असर पड़ सकता है, प्रभावित मछुआरों को मुआवजा देना पड़ सकता है और समुद्री जीवन को बचाने की कोशिश करनी पड़ सकती है. इससे अरबों रूपयों का नुकसान हो सकता है.
उम्म अल कुवैन के पास हुई घटना यह बताती है कि तेल को तुरंत रोकना और साफ करना क्यों जरूरी है. बूम, स्किमर, डिस्पर्सेंट, कंट्रोल तरीके से तेल जलाना और बायोरेमेडिएशन इन सभी की अपनी भूमिका होती है. लेकिन रिसाव कितना बड़ा है, किस तरह का तेल है और घटना कहां हुई है इसी से तय होता है कि कौन सा तरीका अपनाया जाएगा.
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