फोन, एसी या फिर टीवी से भी ईरान में तबाही मचा सकता है इजरायल, ये है तरीका
इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ऐसे ऑपरेशनों के लिए जानी जाती है, जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता. इसकी बानगी दुनिया ने तब देखी थी जब इजरायल ने पेजर ब्लास्ट के जरिए हिजबुल्लाह की कमर तोड़ दी थी.

Iran Israel War: इजरायल और ईरान के बीच बीते 7 दिनों से छिड़ी जंग घातक होती जा रही है. दोनों देश एक-दूसरे पर एक से एक खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं. ईरान ने इजरायली हमलों का बदला लेने के लिए बैलेस्टिक मिसाइलों से भी हमले शुरू दिए हैं. ताजा हमले में ईरान ने इजरायली स्टॉक एक्सचेंज और अस्पतालों को निशाना बनाया है, जिसके बाद इजरायल की ओर से और भी बड़े हमले की आशंका बढ़ गई है.
मिडिल ईस्ट के दो बड़े देशों के बीच जंग को देखें तो आबादी और क्षेत्रफल में छोटा होने के बावजूद इजरायल का पलड़ा भारी दिखता है, जिसकी वजह है इजरायल की टेक्नोलॉजी. इजरायल की सुरक्षा और खुफिया एजेंसी मोसाद इतनी खतरनाक है कि वह ईरान में मौजूद फोन, एसी या फिर टीवी से भी तबाही मचा सकती है. चलिए जानते हैं कैसे...
कभी भी मचा सकता है पेजर ब्लास्ट जैसी तबाही
इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ऐसे ऑपरेशनों के लिए जानी जाती है, जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता. इसकी एक बानगी 2024 में दुनिया ने देखी थी, जब इजरायल ने पेजर ब्लास्ट के जरिए हिजबुल्लाह की कमर तोड़ दी थी. इजरायल ने हिजबुल्लाह लड़ाकों द्वारा इस्तेामल की जाने वाली कम्यूनिकेशन डिवाइस पेजर में बड़ी घुसपैठ की थी. हिजबुल्लाह लड़ाकों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे पेजर अचानक फटने लगे थे, जिसमें 4000 से ज्यादा लोगों घायल हुए थे और लोगों की मौत हो गई थी. इस ऑपरेशन को अंजाम देने के बाद इजरायल ने अपने दुश्मन देशों को साफ संकेत दे दिया था कि वह कभी भी मोबाइल फोन, टीवी या भी एसी के जरिए घुसपैठ कर सकता है और इन इलेक्ट्रॉनिक डिसाइसेस का इस्तेमाल हथियार के तौर पर कर सकता है.
ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों को भी ऐसे उतारा मौत के घाट
आज से 7 दिन पहले इजरायल ने जब ईरान पर हमला किया तो उसके परमाण वैज्ञानिकों से लेकर टॉप सैन्य लीडर्स को मौत के घाट उतारा दिया. इजरायल के हमले इतने सटीक थे कि परमाणु वैज्ञानिकों व सैन्य अधिकारियों के बेडरूम में ही उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया, वो भी पूरी बिल्डिंग को नुकसान पहुंचाए बिना. इन हमलों में इजरायल ने मोबाइल ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया था, जिससे टारगेट की रियल टाइम लोकेशन उन तक पहुंच रही थी.
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Source: IOCL
























