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Overcrowded Prisons: देश की ये जेलें हैं ओवरक्राउडेट, कैपेसिटी से ज्यादा बंद हैं कैदी

Overcrowded Prisons: एनसीईआरटी की एक रिपोर्ट में देश की कुछ सबसे ज्यादा भीड़ वाली जेलों के बारे में पता चला है. आइए जानते हैं कौन सी हैं वे जेल.

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  • भारत की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी, दिल्ली सबसे गंभीर.
  • तिहाड़ जेल सहित कई राज्यों में भीड़ खतरनाक स्तर पर है.
  • 75-77% कैदी विचाराधीन, अदालतों में लंबित मामलों की अधिकता.
  • जेलों में 18-30 आयु वर्ग के युवा और कम शिक्षित अधिक.

Overcrowded Prisons: भारत की जेलों में भीड़भाड़ खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है. कई जेलों में अब उनकी क्षमता से कहीं ज्यादा कैदी रखे जा रहे हैं. नेशनल क्राईम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की रिपोर्ट प्रिजन स्टैटिसटिक्स इंडिया 2024 के मुताबिक दिल्ली की जेलें इस समय देश में सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाली हैं. यहां क्षमता से 194.6% ज्यादा कैदी हैं. आसान शब्दों में कहें तो जिस जेल में ज्यादा से ज्यादा आधिकारिक तौर पर 100 कैदियों को रखने की क्षमता है वहां इस समय लगभग 195 कैदी बंद हैं.

भीड़भाड़ वाली जेलों की सूची

नेशनल क्राईम रिकॉर्ड्स ब्यूरो रिपोर्ट में दिल्ली को जेलों में भीड़भाड़ के मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र बताया गया है. राजधानी के सभी 16 जेलों में कैदियों की कुल स्वीकृत क्षमता 10,026 है. हालांकि जेलों में कैदियों की वास्तविक संख्या बढ़कर 19,512 हो गई है. तिहाड़ जेल, खासकर जेल नंबर एक में स्थिति काफी ज्यादा गंभीर है. मार्च 2025 तक इस जेल की आधिकारिक क्षमता सिर्फ 565 कैदियों की थी लेकिन यहां 2436 कैदी बंद थे.

दूसरे राज्य भी गंभीर भीड़भाड़ का सामना कर रहे 

दिल्ली अकेली ऐसी नहीं है. कई दूसरे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी अपनी आधिकारिक क्षमता से कहीं ज्यादा कैदियों की संख्या से जूझ रहे हैं. मेघालय में क्षमता से 163.5 प्रतिशत ज्यादा कैदी दर्ज किए गए. इसी के साथ जम्मू-कश्मीर में यह दर 148.3% है. मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी भीड़भाड़ की दर 140% से ज्यादा है. उत्तर प्रदेश में जेलों में कैदियों की संख्या स्वीकृत क्षमता से लगभग डेढ़ गुना ज्यादा होने का अनुमान है.

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विचाराधीन कैदियों की संख्या सबसे ज्यादा 

जेल में भीड़भाड़ की सबसे बड़ी वजह विचाराधीन कैदियों की बड़ी संख्या है. पूरे भारत में लगभग 75% से 77% कैदी विचाराधीन हैं.  यानी ऐसे लोग जिनके मामले अभी भी अदालत में लंबित हैं और जिन्हें अभी तक दोषी नहीं ठहराया गया है. महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों में यह आंकड़ा कथित तौर पर 80% से भी ज्यादा है. 

दिल्ली के आंकड़े तो और भी चौंकाने वाले हैं. दिल्ली की जेलों में लगभग 88% कैदी विचाराधीन हैं. सिर्फ 11.4% कैदी ही दोषी ठहराए गए हैं. 

युवा और आर्थिक रूप से कमजोर आबादी 

एनसीआरबी की रिपोर्ट यह भी बताती है कि दिल्ली की जेलों में बंद लोगों में आधे से ज्यादा 18 से 30 आयु वर्ग के हैं. यह सभी कैदियों का लगभग 58% है. शैक्षिक डेटा एक मिली-जुली तस्वीर दिखाता है. हजारों कैदी या तो अनपढ़ हैं या फिर उन्हें सिर्फ बुनियादी शिक्षा ही मिली हुई है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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