‘कमजोर इरादे, संवाद की कमी और...’, असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस क्यों हारी? एक्सपर्ट ने बताई बड़ी वजह
Congress in Assam: राजनीतिक विश्लेषक नरेश अरोड़ा ने कहा कि इस बार अगर असम कांग्रेस के कैंडिडेट से भी पूछेंगे कि आपकी पार्टी का इस बार क्या मैसेजिंग था, तो कैंडिडेट्स भी नहीं बता पाएंगे.

- पिछली बार से बदतर प्रदर्शन, एकता की कमी दिखी.
असम विधानसभा चुनाव 2026 में विपक्षी कांग्रेस पार्टी को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सामने चुनावी मैदान में करारी शिकस्त मिली. कांग्रेस पार्टी ने चुनाव में मात्र 19 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि इसकी सहयोगी रायजोर दल ने दो सीटें हासिल की, ऐसे में कांग्रेस गठबंधन ने असम में कुल 21 सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन जिस राज्य में पहले कांग्रेस पार्टी सत्ता में रह चुकी है, वहां अब ऐसा क्यों हो रहा कि पार्टी को जनता का समर्थन नहीं मिल रहा है. इस बात पर राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि असम चुनाव में कांग्रेस की हार की सबसे बड़ी वजह पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और राज्य नेतृत्व के बीच संवाद का न होना प्रमुख रहा.
पार्टी चुनाव में पीछे चल रही थी, ये शंका कांग्रेस को भी नहीं थीः अरोड़ा
'इनसाइड ऑट विथ मेघा प्रसाद' में राजनीतिक विश्लेषक और डिजाइन बॉक्स के फाउंडर नरेश अरोड़ा ने असम विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस की हार को लेकर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि अगर आप असम की कांग्रेस के उम्मीदवारों से भी पूछेंगे कि इस बार आपकी पार्टी का क्या संदेश था, तो उम्मीदवार भी नहीं बता पाएंगे, क्योंकि दिल्ली और गुवाहाटी के बीच संवाद टूट गया था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी वहां पर चुनाव में हमेशा से पीछे थी, ऐसा किसी को भी शंका नहीं थी. पार्टी को भी नहीं. अब जब आपको शंका नहीं है कि आप चुनाव में पीछे चल रहे हैं, तो आप क्या करते हैं उस टाइम पर, जो बचा होता है या जो दिख रहा होता है उसको बचाने की कोशिश करते हैं.
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उन्होंने कहा कि वहां पर जो इलेक्शन मैनेजमेंट जो लोग कर भी रहे थे पार्टी की तरफ से भी उनके आपस में भी संवाद खत्म हो गया और वो संवाद खत्म किस बात पर कि किसी को टिकट किसी की मर्जी से नहीं मिल रहा, किसी की मर्जी से पैसा खर्च नहीं हो रहा, हम किसी की मर्जी से कोई नियुक्तियां नहीं हो पा रही, किसी की मर्जी से कोई कैंपेन प्लान नहीं बन पा रहा. असम में कांग्रेस पार्टी के भीतर व्यक्तिगत ईगो और एरोगेंस देखने को मिला.
पिछली बार दिखी थी एकजुटता, इस बार हालत और खराबः अरोड़ा
नरेश अरोड़ा ने कहा, ‘असम में जो भी लोग कांग्रेस के सरपरस्त थे, जिन लोगों के हाथ में कांग्रेस की बागडोर थी, चाहे वो स्टेट लीडरशिप के हाथ में थी या सेंट्रल लीडरशिप. अगर आप आपस में संवाद ही नहीं करेंगे, बात ही नहीं करेंगे, तो पार्टी कैसे चलेगी? कैसे कोई चुनाव लड़ेगा?’
उन्होंने कहा, ‘पिछली बार भी वहां पर कांग्रेस की हालत ठीक नहीं थी, लेकिन इस बार तो और ज्यादा खराब रही. पिछले चुनाव में जो नेता थे, उन्होंने कम से कम एकजुटता दिखाई थी, उसमें सबका योगदान था, लेकिन इस बार अगर असम कांग्रेस के कैंडिडेट से भी पूछेंगे कि आपकी पार्टी का इस बार क्या मैसेजिंग था तो कैंडिडेट्स भी नहीं बता पाएंगे. और क्यों? क्योंकि कुछ किसी की कोई बातचीत, कोई संवाद किसी के साथ था ही नहीं. मतलब दिल्ली और गुवाहाटी के बीच में संवाद टूट गया था कांग्रेस पार्टी का. बहुत दिन के लिए.’
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