दुश्मन गुस्से वाला है तो... दुनिया में युद्ध के लिए क्या हैं नियम, सबसे पहले कौन-सी बनी थी थ्योरी?
सुन त्जु (Sun Tzu) का चीन में जन्म हुआ था. उन्होंने अपनी किताब 'The Art of War' में युद्ध के नियमों के बारे में बहुत सी बातें लिखी हैं. युद्ध कला पर लिखने वाले वह पहले लेखक के रूप में जाने जाते हैं.

India Pakistan Conflict: भारत की ओर से पाकिस्तान में अंजाम दिए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनिया के दो सबसे कट्टर दुश्मन देशों के बीच जंग के आसार नजर आ रहे हैं. दोनों देशों की सीमाओं पर गहमागहमी बनी हुई है. पाकिस्तान एलओसी (LoC) पर लगातार फायरिंग कर रहा है और आम नागरिकों को निशाना बना रहा है, तो भारतीय सेना की ओर से भी इसका जवाब दिया जा रहा है. पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत को युद्ध की चेतावनी भी दे डाली है, जिसके बाद दुनिया के कई देश भारत और पाकिस्तान पर नजर बनाए हुए हैं.
बता दें, भारत और पाकिस्तान के बीच अब तक चार बार सीधे जंग लड़ी जा चुकी है और चारों मौकों पर भारतीय सेना ने पाकिस्तान को घुटनों पर लाकर खड़ा कर दिया है. अब एक बार फिर दोनों देशों के बीच जंग के बादल मंडराने लगे हैं. ऐसे में चलिए जानते हैं कि दुनिया में युद्ध को लेकर क्या नियम हैं और दो देशों के बीच जंग को लेकर सबसे पहले कौन सी थ्योरी बनी थी?
चीन के इस जनरल ने लिखे थे युद्ध के नियम
आज से करीब 2500 वर्ष पूर्व जनरल सुन त्जु (SunTzu) का जन्म चीन में हुआ था. सुन त्जु ने अपनी किताब 'The Art of War' में युद्ध के नियमों और दुश्मन देश के खिलाफ रणनीति के बारे में बहुत सी बातें लिखी हैं. युद्ध कला पर लिखने वाले वह पहले यथार्थवादी लेखक के रूप में जाने जाते हैं. कहा जाता है चीन इन्हीं नियमों के आधार पर अपनी विस्तारवादी नीति को अब तक जारी रखे हुए है. इस किताब में दुश्मन पर हमले के लिए रणनीति, युद्ध से पहले और युद्ध के बाद योजना बनाने और सूचना प्रणाली के बारे में भी बहुत सी बातें लिखी गई हैं. सुन त्जु का मानना था कि युद्ध का असल मकसद शांति है. उनकी पहली थ्योरी यह थी कि शांति के समय युद्ध एवं युद्ध के समय शांति की तैयारी की जानी चाहिए.
युद्ध के समय ऐसे होने चाहिए नियम
- सुन त्जु का मानना था कि संपूर्ण युद्ध प्रणाली छल पर आधारित है. अत: हमला करने पर लगना चाहिए कि हम आक्रमण की स्थिति में नहीं हैं. जब हम अपनी ताकतों का प्रयोग कर रहे हों तो स्वंय को निष्क्रिय दिखाएं. जब हम दुश्मन के निकट हों तो दुश्मन को लगना चाहिए कि हम उनसे बहुत दूर हैं और जब दूर हों तो उन्हें लगना चाहिए कि हम उनके बहुत करीब हैं.
- दुश्मन को फंसाने के लिए उसे प्रलोभन देना चाहिए. दुश्मन के इलाके में अफवाहों द्वारा अव्यवस्था फैलाएं. वह सभी मोर्चों पर मजबूत है तो उसका सामना करने के लिए तैयार रहें और यदि वह आपसे अधिक ताकतवर है तो उसका सामना करने से बचें
- दुश्मन गुस्सेवाला है तो परेशान करके उसे तंग करें. उसके सामने स्वयं को दुर्बल जाहिर करें, जिससे वह घमण्डी बन जाए.
- दुश्मन के साथ चूहे बिल्ली वाला खेल खेलना चाहिए. पहले कमजोर बनने का नाटक करते वक्त शांत बैठ जाना चाहिए, जिस तरह बिल्ली पहले दुबक कर बैठ जाती है और समय आने पर अचानक आक्रमण कर देती है. इसी तरह दुश्मन आराम से बैठा हो तो उसे आराम न करने दें, यदि उसकी सेना में एकजुटता है तो उसमें फूट डालें.
- दुश्मन के इलाके में वहां आक्रमण करें, जहां के लिए वह तैयार न हो और वहां प्रकट हो जाएं, जहां आपके होने की दुश्मन को अपेक्षा न हो.
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