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पाकिस्तान के पास कुल कितनी हैं मिसाइलें, एक बार में वह कितनी कर सकता है फायर?

पाकिस्तान ने अपने परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत 1980 में की थी. उसने चीन, ईरान और उत्तर कोरिया की मदद से कई मिसाइलें विकसित की हैं. पाकिस्तान की सबसे खतनाक मिसाइल 'शाहीन 3' को माना जाता है.

Operation Sindoor: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पीओके में एयरस्ट्राइक कर आतंकियों को ठिकाने लगाना शुरू कर दिया है. भारत की ओर से 6-7 मई की रात पाकिस्तान में स्थित 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर और जैश जैसे आतंकी संगठन शामिल हैं. पाकिस्तान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारत के हमले में 26 लोगों की मौत हुई है और 48 लोग घायल हुए हैं. 

ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ने की आशंका बढ़ गई है. दरअसल, देर रात ऑपरेशन को अंजाम देने के बाद से ही एलओसी (LoC) पर पाकिस्तान की ओर से आर्टिलरी फायरिंग की जा रही है, जिसका जवाब भारतीय सेनाएं दे रही हैं. पाकिस्तान की ओर से की जा रही गोलीबारी में कुछ नागरिकों के भी हलाहत होने की खबर है. अब सवाल यह है कि जिस तरह भारत ने पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक की, क्या उसी तरह पाकिस्तान भी मिसाइल हमला कर सकता है? पाकिस्तान के पास कितनी मिसाइलें हैं और एक बार में वह कितनी मिसाइलों से भारत पर हमला कर सकता है? 

भारत को टारगेट कर किया गया मिसाइलों को निर्माण

पाकिस्तान का मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह से भारत को ध्यान में रखकर शुरू किया गया था. इसकी शुरुआत 1980 में हुई थी, जब पाकिस्तान ने चीन, उत्तर कोरिया और ईरान की मदद से कई मिसाइलों का निर्माण किया. इसके बाद पाकिस्तान ने एक से बढ़कर एक मिसाइलें बनाई और उसका टारगेट हमेशा भारत ही रहा. वहीं, भारत ने अपने मिसाइल कार्यक्रम को चीन को ध्यान में रखकर शुरू किया था. ऐसे में आइए जानते हैं कि पाकिस्तान के पास कितनी और कौन-कौन सी मिसाइलें हैं... 

हत्फ 1: यह पाकिस्तान की पहली मिसाइल थी, जो कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है. इसकी मारक क्षमता 70 से 100 किलोमीटर है और यह अपने साथ 500 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जा सकती है. 

हत्फ 2:  इस मिसाइल को अब्दाली के नाम से भी जाना जाता है. इसकी मारक क्षमता 180 से 200 किलोमीटर तक है और यह अपने साथ 450 किलो तक विस्फोटक ले जा सकती है. 

हत्फ 3: इस मिसाइल को गजनवी के नाम से जानते हैं यह कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है और इसकी मारक क्षमता 290 किलोमीटर है और यह अपने साथ 700 किलो तक विस्फोटक ले जा सकती है. 

हत्फ 4: पाकिस्तानी सेना में इस मिसाइल को शाहीन 1 के नाम से शामिल किया गया है, जिसकी मारक क्षमता 750 किलोमीटर तक है. 

हत्फ 5: पाकिस्तान में इस मिसाइल को गौरी के नाम से जाना जाता है और यह 1250 से 1500 किलोमीटर तक तबाही मचा सकती है. इसे 2003 में पाकिस्तानी सेना में शामिल किया गया था. यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता रखती है. 

हत्फ 6: पाकिस्तानी सेना में इस मिसाइल को शाहीन 2 के नाम से शामिल किया गया है, जिसकी मारक क्षमता 1500 से 2000 किलोमीटर तक है. यह मिसाइल भी परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता रखती है. 

हत्फ 7: बाबर नाम से इस मिसाइल को पाकिस्तानी सेना में शामिल किया गया है और यह पारंपरिक और परमाणु हथियारों को ले जाने की सक्षम है. इसकी मारक क्षमता 350 से 700 किलोमीटर तक है और इसे जमीन से लॉन्च किया जा सकता है. 

हत्फ 8: यह एक क्रूज मिसाइल है, जिसे राद नाम से जाना जाता है. यह मिसाइल कम ऊंचाई पर मार करने में सक्षम है और अपने साथ परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है. मारक क्षमता 350 किलोमीटर तक है. 

हत्फ 9: नस्र नाम की यह मिसाइल भी परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और इसकी मारक क्षमता 60 किलोमीटर ही है. दावा किया जाता है कि यह मिसाइल एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी मात दे सकती है. 

शाहीन 3: इसे पाकिस्तान की सबसे खतरनाक मिसाइल कहा जाता है, जिसकी मारक क्षमता 2750 किलोमीटर तक है. रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने इस मिसाइल को अपडेट किया है और इसकी मारक क्षमता और भी ज्यादा हो गई है. यह मिसाइल पारंपरिक और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. 

अबाबील: पाकिस्तान के पास जमीन से जमीन पर वार करने वाली अबाबील मिसाइल भी है, जो 2200 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है. यह मिसाइल भी परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. 

यह भी पढ़ें: हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल और एंटी-बैलेस्टिक मिसाइल में क्या होता है अंतर, कौन-सी कब होती है इस्तेमाल?

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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