CBSE ने जारी किया नया पेरेंटिंग कैलेंडर, जानिए 2026-27 सत्र में क्या-क्या बदलेगा
CBSE ने 2026-27 सत्र के लिए नया पेरेंटिंग कैलेंडर जारी किया है. इसका उद्देश्य बच्चों के बेहतर विकास के लिए स्कूल और अभिभावकों को एक साथ लाना है.ताकि छात्रों को बेहतर सीखने का माहौल मिल सके.

- सीबीएसई ने 2026-27 सत्र के लिए नया पैरेंटिंग कैलेंडर जारी किया.
- इसका लक्ष्य बच्चों का मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक विकास करना है.
- अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी, स्कूलों से इसे लागू करने की अपील.
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए Parenting Calendar लॉन्च कर दिया है. इस पहल का उद्देश्य सिर्फ बच्चों की पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को भी मजबूत बनाना है. बोर्ड का मानना है कि जब स्कूल और परिवार मिलकर बच्चों के लिए काम करते हैं, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और सीखने का अनुभव भी बेहतर होता है.
CBSE के अनुसार, Parenting Calendar की शुरुआत 2025-26 सत्र में की गई थी. उस दौरान स्कूलों, शिक्षकों और अभिभावकों से इस पहल को अच्छा सहयोग मिला. इसी फीडबैक को ध्यान में रखते हुए इस बार कैलेंडर में कई नए बदलाव किए गए हैं, ताकि इसे और ज्यादा उपयोगी बनाया जा सके.
बच्चों के विकास पर रहेगा खास फोकस
नए Parenting Calendar में ऐसी कई गतिविधियां शामिल की गई हैं, जिनमें अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी होगी. इन गतिविधियों का मकसद बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सामाजिक कौशल को बेहतर बनाना है. बोर्ड चाहता है कि माता-पिता सिर्फ परीक्षा या रिजल्ट के समय ही नहीं, बल्कि पूरे साल बच्चों की सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बनें.
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नई जरूरतों के हिसाब से किया गया अपडेट
इस बार कैलेंडर में बदलते शिक्षा माहौल के अनुसार खुद को तैयार करने जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है. इसके अलावा, अलग-अलग क्षमता वाले बच्चों की जरूरतों को समझने और उन्हें बेहतर सहयोग देने पर भी जोर दिया गया है.अभिभावकों के लिए वर्कशॉप और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की भी सलाह दी गई है, ताकि वे बच्चों की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकें.
स्कूलों से की गई यह अपील
CBSE ने अपने सभी संबद्ध स्कूलों से कहा है कि वे Parenting Calendar को नियमित रूप से लागू करें और इसमें बताई गई गतिविधियों को पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान आयोजित करें.बोर्ड का कहना है कि इससे स्कूल और अभिभावकों के बीच संवाद मजबूत होगा और बच्चों को पढ़ाई के साथ एक सकारात्मक और सहयोगी माहौल मिलेगा.बोर्ड का यह भी मानना है कि आज के समय में बच्चों के सामने पढ़ाई के अलावा कई तरह की चुनौतियां हैं. ऐसे में परिवार और स्कूल अगर मिलकर काम करें, तो बच्चों को हर स्तर पर बेहतर सहयोग मिल सकता है.
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