Pakistan PF Rules: भारत में PF की मिनिमम लिमिट 1800 रुपये, जानें पाकिस्तान में कितना कटता है पीएफ?
भारत में कर्मचारियों की सैलरी के पीएफ कटौती में सरकार ने बदलाव किया है. अब अधिकतम सैलरी होने पर भी न्यूनतम अनिवार्य पीएफ कटौती 1800 तय की गई है. चलिए जानें कि पाकिस्तान में क्या नियम हैं.

Pakistan PF Rules: नौकरीपेशा लोगों के लिए भविष्य निधि यानी पीएफ बुढ़ापे का सबसे बड़ा सहारा होता है. भारत में हाल ही में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने हाल ही में अपने कुछ नियमों में बदलाव किया है. अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी चाहे कितनी भी ज्यादा क्यों न हो, अनिवार्य रूप से उसका 1800 रुपये काटना तय है. लेकिन क्या आपको पता है कि हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में पीएफ काटने को लेकर क्या नियम है, चलिए जानें.
भारत में पीएफ कटौती का नया गणित
भारत में ईपीएफओ के नए नियमों के मुताबिक 12 फीसदी की पीएफ कटौती के लिए अधिकतम 15,000 रुपये प्रति माह सैलरी लिमिट तय की गई है. इसका सीधा अर्थ है कि अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 1 लाख रुपये महीना है, तब भी अनिवार्य पीएफ कंट्रीब्यूश के रूप में उसके वेतन से केवल 1800 रुपये ही काटे जाएंगे. हालांकि जो कर्मचारी अपनी मर्जी से ज्यादा फंड जमा करना चाहते हैं उनके लिए वीपीएफ का ऑप्शन खुला है. भारत सरकार का यह नियम करीब आठ करोड़ सक्रिय नौकरीपेशा लोगों पर लागू होता है.
पाकिस्तान में पेंशन और ईओबीआई का नियम
पाकिस्तान में सामाजिक सुरक्षा और भविष्य निधि की व्यवस्था भारत से काफी अलग है. वहां पेंशन और बुढ़ापे के फायदों के लिए एक खास संस्था काम करती है, जिसे ईओबीआई (एंप्लाई ओल्ड एज बेनिफिट्स इंस्टीट्यूशन) कहा जाता है. पाकिस्तान में इस फंड की कटौती कर्मचारी की वास्तविक सैलरी पर नहीं की जाती है, बल्कि सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम वेतन के आधार पर होती है. वर्तमान में यहां न्यूनतम वेतन 40,000 रुपये प्रति माह तय है, जिसके हिसाब से पूरी गणना होती है.
यह भी पढ़ें: India Loans: कितने देशों को कर्ज देता है भारत, जानें सबसे ज्यादा किस पर उधार?
कर्मचारी और मालिक का हिस्सा कितना?
पाकिस्तान के ईओबीआई के नियम के अनुसार तय किए गए न्यूनतम वेतन का सिर्फ 1 फीसदी हिस्सा कर्मचारी की जेब से कटता है, जो करीब 400 रुपये बैठता है. वहीं उस कर्मचारी की कंपनी यानी नियोक्ता को अपनी अपनी तरफ से न्यूनतम वेतन का 5 फीसदी यानी करीब 2000 रुपये का योगदान देना होता है. इस तरह से कर्मचारी और कंपनी दोनों का हिस्सा मिलाकर कुल 2400 रुपये हर महीने उस फंड में जमा होते हैं. यह व्यवस्था वहां के सभी रजिस्टर्ड कंपनियों के लिए अनिवार्य है.
प्राइवेट कंपनियों में पीएफ के नियम
भारत में जहां एक निश्चित संख्या से अधिक कर्मचारियों वाली हर कंपनी के लिए पीएफ काटना कानूनी रूप से अनिवार्य है, लेकिन पाकिस्तान में ऐसा नहीं होता है. वहां पर निजी क्षेत्र की सभी कंपनियों के लिए प्रोविडेंट फंड लागू करना जरूरी नहीं होता है. हालांकि जिन चुनिंदा कंपनियों में पीएफ की सुविधा दी जाती है, वहां आमतौर पर कर्मचारी और कंपनी दोनों ही बेसिक सैलरी का 8.33 फीसदी हिस्सा फंड में जमा करते हैं. कुछ बड़ी कंपनियों में कर्मचारियों को अपनी मर्जी से इसे 10 फीसदी तक बढ़ाने की छूट भी मिलती है.
सामाजिक सुरक्षा और वेलफेयर फंड
इन मुख्य फंड्स के अलावा पाकिस्तान में कुछ अन्य सरकारी कटौतियां भी होती हैं. वहां ईएसएसआई (एंप्लाई सोशल सिक्योरिटी इंस्टीट्यूशन) के तहत कर्मचारियों को स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के लिए नियोक्ता 6 फीसदी और कर्मचारी 1 फीसदी का योगदान करते हैं. इसके साथ ही कंपनियों को अपनी कुल आय का 2 फीसदी हिस्सा वर्कर्स वेलफेयर फंड में जमा करना पड़ता है. कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत के मुकाबले पाकिस्तान में निजी क्षेत्र के आम कर्मचारियों के लिए पीएफ और बचत के नियम उतने सख्त और सुरक्षित नहीं हैं.
यह भी पढ़ें: दिल्ली के लाल किले को बनवाने में कितना खर्च आया था, आज के हिसाब से यह रकम कितनी?

























