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India UAE Pipeline: भारत से UAE तक पाइपलाइन बिछाने में कितना खर्चा आएगा, जानें प्रति किलोमीटर का हिसाब

India UAE Pipeline: भारत और संयुक्त अरब अमीरात को जोड़ने वाले समुद्र के नीचे तेल और गैस पाइपलाइन बिछाने पर विचार किया जा रहा है. आइए जानते हैं इसमें कितना खर्चा आ सकता है.

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  • भारत यूएई के बीच पानी के नीचे पाइपलाइन की हो रही है जांच।
  • ईरान से जुड़े तनाव, समुद्री बाधाओं को कम करने का लक्ष्य।
  • ₹35000-₹43000 करोड़ तक आ सकती है परियोजना की लागत।
  • गहराई, जंगरोधी तकनीक, विशेष जहाजों से लागत में वृद्धि।

India UAE Pipeline: ईरान से जुड़े मौजूदा तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में रूकावटों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत कथित तौर पर एक रणनीतिक परियोजना पर विचार कर रहा है. इस परियोजना का मकसद खाड़ी देशों से सीधे समुद्र के नीचे पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए तेल और गैस लाना है. रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत सरकार भारत और संयुक्त अरब अमीरात को जोड़ने वाली समुद्र के नीचे तेल और गैस पाइपलाइन बिछाने की संभावना की जांच कर रही है. ऐसा इसलिए ताकि जोखिम भरे समुद्री शिपिंग मार्गों पर निर्भरता कम की जा सके. आइए जानते हैं कि इसमें कितने लागत आ सकती है.

कितनी होगी लागत? 

वैश्विक समुद्र के नीचे पाइपलाइन परियोजनाओं पर आधारित मौजूदा अनुमानों के मुताबिक भारत और यूएई के बीच समुद्र के नीचे पाइपलाइन बनाने की कुल लागत लगभग ₹35000 करोड़ से ₹43000 करोड़ के बीच हो सकती है. दोनों देशों के बीच समुद्री दूरी लगभग 1600 से 2000 किलोमीटर है. 

पानी के नीचे प्रति किलोमीटर लागत 

इस भारी भरकम बजट के पीछे सबसे बड़ी वजह है यह है कि गहरे समुद्र के नीचे पाइपलाइन बिछाने में काफी ज्यादा लागत लगती है. वैश्विक स्तर पर उच्च दबाव वाले समुद्र के नीचे तेल और गैस पाइपलाइन बनाने में आमतौर पर प्रति किलोमीटर 2 मिलियन डॉलर से 2.5 मिलियन डॉलर का खर्चा आता है. भारतीय मुद्रा में यह पाइपलाइन के हर किलोमीटर के लिए लगभग ₹17 करोड़ से ₹21.5 करोड़  के बराबर होता है. अगर समुद्र तल की बनावट और सुरक्षित नौवहन मार्गों को ध्यान में रखते हुए कुल मार्ग लगभग 2000 किलोमीटर तक फैलता है तो खर्च ₹40000 करोड़ तक पहुंच सकता है या फिर उससे भी ज्यादा हो सकता है.

गहरे समुद्र की स्थिति 

इस परियोजना के लिए एक बड़ी चुनौती अरब सागर की काफी ज्यादा गहराई है. कथित तौर पर प्रस्तावित मार्ग के कुछ हिस्से 3400 मीटर से भी ज्यादा गहरे हैं. इतनी गहराई पर बिछाई गई पाइपलाइन को पानी के नीचे के भारी दबाव को सहना पड़ता है. इसके लिए काफी ज्यादा मोटी स्टील की पाइपों का इस्तेमाल करना पड़ेगा. ये पाइप पारंपरिक जमीनी पाइपलाइन प्रणालियों की तुलना में काफी ज्यादा महंगे होते हैं. 

जंग रोधी तकनीक से लागत में बढ़ोतरी 

समुद्र के नीचे बने इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए खारे पानी से होने वाला जंग सबसे बड़े खतरों में से एक है. पाइपलाइन को लंबे समय तक जंग और नुकसान से बचाने के लिए कंपनियों को थ्री लेयर पॉलीइथाइलीन और कंक्रीट वेट कोटिंग जैसी आधुनिक कोटिंग का इस्तेमाल करना होगा. ये काफी ज्यादा महंगी होती हैं.

कुछ और खर्चे

लागत का एक और बड़ा कारण गहरे पानी में पाइप बिछाने वाले खास जहाजों की जरूरत है. दुनिया भर में ऐसे जहाजों की संख्या काफी कम है और उन्हें एक दिन के लिए किराए पर लेने की दर कई करोड़ रुपये तक हो सकती है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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